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ये रिपोर्टिंग है या ड्रामेबाजी? देखें- ‘न्यूज नेशन’ की नाली पत्रकारिता

राजीव नयन बहुगुणा-

पहले मैं इसे बनावटी और फ़र्ज़ी वीडियो मानता रहा, जो रिपोर्टर की प्रतिष्ठा गिराने के लिए बनाया गया है.

मैंने सुना और देखा भी है कि किसी मशीन से अब ऐसे वीडियो खूब बनाये जाते हैं. पुष्टि करने पर पता चला कि वीडियो असली है, और पत्रकार तथा चैनल भी नामी है.

मैं अपने परिचय विवरण से पत्रकार की संज्ञा तुरंत हटा रहा हूँ…


अनिल कुमार-

अब तक आपने सुअर की तरह नाली/गटर/पानी में खड़े होकर रिपोर्टिंग करते कई रिपोर्टरों को देखा होगा, लेकिन यह पहला रिपोर्टर है, जो तैरकर रिपोर्ट कर रहा है! वह तैरने के बावजूद भी एक जगह स्थिर रहकर! नाली वाले रिपोर्टरों से बेहद अलग!

इतना खूबसूरती से तैराकी तो गधा भी नहीं कर पाता है, जितना शानदार तरीके से रिपोर्टर तैर रहा है! बिना हाथ का सहारा लिये तैरने वाला यह पहला रिपोर्टर है! ऐसे ही रिपोर्टर किसी दिन यह पता लगाने में सफल रहेंगे कि गुडगांव का गटर किस नाले से मिलता है!

टीवी रिपोर्टिंग की यही सुंदरता है कि सुअर, कुत्ता, कीड़ा, मेढ़क, डोडहा, गदहा, जोंक हुये बिना भी नाली में उतर सकते हैं! हालांकि नाली में उतरने का खोजकर्ता अजीत अंजुम को माना जाता है, लेकिन कुछ इतिहासकारों में इसको लेकर मतभेद है!


उमाशंकर सिंह-

इस रिपोर्टर ने इसे स्वेच्छा से ही किया होगा! इस ‘अंडर वाटर ग्राउंड रिपोर्टिंग’ में झोंकी गई मेहनत पर कोई सवाल नहीं है। डर है तो बस इतना कि किसी और चैनल में बैठा कोई संपादक भी अपने रिर्पोटर से ज़बरदस्ती यही न डिमांड करने लगे!

गला काट प्रतिस्पर्धा जो है!

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