अविनाश दास-
बिहार-झारखंड के सीमावर्ती ज़िले से प्रकाशित प्रभात खबर के एक छोटे से संस्करण से निकल कर जिस दिन मैंने एनडीटीवी ज्वाइन किया था, उसी दिन निधि कुलपति के साथ एक निजी हादसा हुआ था। पूरे न्यूज़ रूम में उदासी थी।
एनडीटीवी से उनका रिश्ता पेशेवर से ज़्यादा पारिवारिक था। उनका क्या, एक दौर में लगभग सबका। मेरे लिए टीवी उन दिनों नया था। प्रियदर्शन जी, अनवर, समरेंद्र, पार्थ, एनपी, नीरज जी, अजय जी, ताज़िल, संजॉया सर… एक लंबी फ़ेहरिस्त है, जो मेरे लिए दोस्त-साथी-शिक्षक सब थे। हम सब डेस्क पर थे और अक्सर बुलेटिन के लिए ख़बरों के रनडाउन बनाने के साथ एंकर लिंक भी लिखते थे।
स्टूडियो में क़दम रखने से पहले एंकर्स हमारी डेस्क पर आकर एंकर लिंक्स पढ़ते थे और बोलने की अपनी सहूलियत के हिसाब से उसको संपादित कर लेते थे। नग़मा हों, सिक्ता हों, अभिसार हों या कोई और, मेरे लिखे एंकर लिंक्स पर चुटकी लेते थे। उन चुटकियों का कुल मतलब होता था कि यह अख़बार नहीं है। अख़बार की भाषा अलग होती है, टीवी की अलग।
निधि कुलपति उन लिंक्स को पढ़ कर हल्का सा मुस्कुराती थीं और चुपचाप उसे ठीक कर लिया करती थीं। एनडीटीवी में ये तमाम लोग काफ़ी समझदार और बेहद पढ़े-लिखे थे। लगता था जैसे देश की तमाम बड़ी मेधाएं एक जगह इकट्ठी हो गयी हैं।
खेल डेस्क एक कोने में था, जहां अफ़शां, विमल मोहन वग़ैरा बैठते थे। वहां एक और सज्जन बैठते थे, जिनका नाम था असदुर्रहमान क़िदवाई। बहुत बाद में उनसे मेलजोल तब बढ़ा, जब उन्होंने मुझे समझाया कि किताब में नुक़्ता नहीं लगता।
खेल डेस्क पर भाषा को लेकर इतना चैतन्य पत्रकार मैंने इससे पहले नहीं देखा था। जब मैं ब्लॉगिंग की प्रैक्टिस में था, उनका एक ब्लॉग मेरे ज़ेहन से नहीं जाता, जिसका नाम था, “हमकलाम”। इस ब्लॉग में वह फ़िल्मी गीतों में ग़ैरफ़िल्मी शायरों के प्रभाव पर रोशनी डालते थे। बताया करते थे कि किस फ़िल्मी गीत के कौन से अंतरे पर किस शायरी का असर है।
असद भाई को मैं ज्ञान और सूचना के अक्षय भंडार की तरह देखा करता था। दो-चार दिन पहले ही उनका संदेश आया कि वह एनडीटीवी से मुक्त हो रहे हैं। चूंकि उस संदेश में कुछ भी निजी नहीं है, इसलिए यहां उसे शेयर कर रहा हूं-
“अविनाश, 26 साल 11 महीने और 2 दिन NDTV में पूरे करने के बाद इस हफ़्ते के आख़िर में हम 58 साल के हो जाने पर रिटायर हो जाएंगे। पीछे मुड़कर देखते हैं तो गुज़रा हुआ सारा वक़्त याद आ रहा है। ख़ुशनसीब हैं कि ऐसी जगह नौकरी मिली जहां इज़्ज़त के साथ उम्र कट गयी। Roys ने जगह ही इतने प्यार से बनायी कि यहां काम मशक़्क़त से नहीं बल्कि बहुत आराम से हुआ करता था। ये सफ़र बहुत ही ख़ूबसूरत रहा और अब जब इसकी आख़िरी मंज़िल पर हैं तो तुम जैसे साथी बहुत याद आ रहे हैं, जिन्होंने हमसफ़र बन कर इसे और हसीन बना दिया। मंज़िल पर पहुंचे तो एहसास हुआ कि तुम जैसे दोस्त ही इस सफ़र का हासिल थे। बहुत ख़ुशी होती है ये देख कर कि तुम अपनी सलाहियत के बल पर क्या ख़ूब चमक रहे हो।
यूं ही चमकते रहो… ऐसी कहानियां रचो और दिखाओ जिसका औरों में दम नहीं। इस अंधेरे दौर में भी चराग़ां होता रहना चाहिए। चूंकि हंसी मज़ाक़ फ़ितरत में है इसलिए अगर इस दौरान हमसे कोई गुस्ताख़ी हुई हो, हमारी कोई बात बुरी लगी हो, या जाने अनजाने दुख पहुंचा हो तो कहा सुना माफ़ कर देना। गुस्ताख़ी माफ़! दुआ है कि तुम्हारी आइंदा ज़िंदगी का सफ़र और भी ज़्यादा ख़ुशगवार हो। असदुर्रहमान क़िदवाई।”
निधि, असद भाई जैसे लोग एनडीटीवी का रौशन चेहरा थे। हम भाग्यशाली थे, जो कुछ साल इन जैसे लोगों की छाया में रहे और बहुत कुछ सीखा। आप सब रिटायरमेंट के बाद अपनी अगली पारी में कुछ शानदार करेंगे, यह उम्मीद भी है और विश्वास भी।
मूल खबरें….
आज निधि कुलपति एनडीटीवी से रिटायर हो रही हैं!
एनडीटीवी से आज 27 साल बाद असद उर रहमान किदवई जी भी रिटायर हो गए!




Ram Singh Rana
May 24, 2025 at 12:08 pm
In any field any ICON is become one time next is upgrade in any sense. As line In Cricket Gavaskar, Tendulkar, Kohli every player had a different skills, In Movie like Rajkapoor, Rajesh Khanna, Manoj Kumar theek waise hi Nidhi Kulpati as news anchor.
Nidhi is a memorable news Icon anchor for TV news Media.