सुशील मोहापात्रा-
निधि जी के साथ-साथ असद जी भी आज एनडीटीवी से रिटायर्ड हुए। असद जी 26 साल 11 महीने 2 दिन एनडीटीवी से जुड़े रहे। जब जवान थे तब असद जी एनडीटीवी से जुड़े और आज 58 साल उम्र रिटायर्ड हो रहे है।
किसी भी प्राइवेट संस्था में 27 साल तक काम करना कोई छोटी बात नहीं है। ये तब संभव है जब आप का न्यूज रूम शानदार हो, आपके साथ काम करने वाले लोग शानदार हो।
Roys (प्रणय-राधिका) ने एनडीटीवी को प्यार से बनाया कि यहां काम मशक़्क़त से नहीं बल्कि बहुत आराम से हुआ करता था। न्यूज रूम हमेशा परिवार के तरह लगता था।
बहुत सारी बधाई Asad Ur Rahman Kidwai (असद उर रहमान किदवई) जी। पिछली यादों को याद करते हुए अब आप को आगे बढ़ना है।
रवीश कुमार-
असदुर्रहमान क़िदवाई रिटायर हो गए…..
कौन है, क्या थे कि हो चुकी इस दुनिया में असद रिटायर हो गए। NDTV में असद एक ऐसे सहयोगी के रुप में हमसफ़र रहे जिनका होना उनके नहीं होने से था। वे होते हुए भी कहीं नहीं होते थे। दफ़्तर में कई तरह के सहयोगी होते हैं। एक जो हमेशा दिखते हैं, जो आपसे भिड़ते हैं, जिनसे आप भिड़ जाते हैं। एक होते हैं जो दिखते ही नहीं लेकिन आपके सहयोगी होते हैं।
किसी दफ़्तर में कुछ लोगों के आगे जाने के लिए बहुत लोग ख़ुद को पीछे कर लेते हैं। अकसर आगे जाने वाले को पता नहीं चलता है। अगर आपका पीछे खड़े लोगों से रिश्ता अच्छा है तभी आगे जाने का सफ़र लंबा होता है। कुछ देर से ही सही, कुछ कम ही सही, हो तो सब सही-सही।
टीवी की दुनिया की रफ़्तार उनके लिए नहीं थी लेकिन इस रफ़्तार में असद कभी नहीं फिसले। कभी दावा ही नहीं किया, न शिकायत। किसी से ईर्ष्या भी नहीं। होड़ भी नहीं। क्या मिला, क्या नहीं। सबके लिए ख़ुश होने वाले ऐसे योगी कम मिलते हैं। शब्दों को सही से लिखने और बोलने के उस्ताद असद ने उतना ही हस्तक्षेप किया जितना ज़रूरी था। काम के बीच हँसी मज़ाक की उपस्थिति को अनिवार्य बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। वरना तनावों को अहंकार हो जाता कि उनके अलावा दुनिया में कोई और भाव नहीं है।
असद के साथ कितना काम किया। अपनी ग़लतियों को जाना और ठीक करने के लिए उनकी तरफ़ देखा। मंज़ूरी के लिए उनकी तरफ़ मुड़ा। एक अच्छा सहयोगी आपके जीवन में चुपके से बहुत कुछ धर कर चला जाता है। हमने साझी विरासत को जीवन के दस्तरख़्वान पर देखा तो असद के साथ देखा। किसी ग़लत पर एक चुप प्रतिक्रिया ने उनके मुक़ाबले ज़्यादा डराया जो ग़लत होने की आशंका पर ही टूट पड़ते थे। असद आँधियों के गुज़र जाने के ठीक बाद की हवा की तरह आते थे और बहा ले जाते थे।
मैं खुशकिस्मत हूँ कि मेरा जीवन ऐसे शानदार लोगों से समृद्ध हुआ। असद के NDTV से रिटायर की ख़बर ने उदास भी किया और रोमांचित भी। मेरा भी इस पेशे से रिटायर होने का एक सपना है। उम्मीद है एक दिन पूरा होगा और इस पेशे को पूरी तरह छोड़ सकूँगा। एक ही अफ़सोस है कि असद जैसे सहयोगी को विदा करने के लिए गेट तक छोड़ने का मौक़ा नहीं मिला।
असदुर्रहमान क़िदवाई, हमारे लिखे और बोले हुए बहुत से शब्दों ने आपका शुक्रिया कहा है। स्वीकार करें और मेरी तरफ़ से शुभकामनाएँ।
आज निधि कुलपति जी के रिटायरमेंट की खबर…



