अमिताभ श्रीवास्तव-
नोएडा के दिल दहला देने वाले निठारी कांड की याद दिलाती फिल्म “सेक्टर 36” से विक्रांत मैसी ने एक बार फिर साबित किया है कि वह मौजूदा दौर के अभिनेताओं की क़तार में अपनी विस्फोटक प्रतिभा के बूते पर लगातार अपनी एक अलग पहचान को मज़बूत करते जा रहे हैं।
याद दिला दें कि नोएडा के निठारी गाँव में 2005-2006 के बीच लगातार कई बच्चों के लापता होने, शवों के टुकडे मिलने और इस मामले में डी-5 कोठी के नौकर सुरेंद्र कोली और कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को फाँसी की सजा हुई थी। बाद में पंधेर छूट गये लेकिन सुरेंद्र कोली की फाँसी बहाल रही लेकिन 2023 में दोनों को सारे आरोपों से बरी कर दिया गया था।
फिल्म में विक्रांत मैसी ने सुरेंद्र कोली से मिलता जुलता किरदार निभाया है। बचपन में यौन शोषण के शिकार रहे एक विकृत मनोदशा वाले खतरनाक और क्रूर मनोरोगी यौन कुंठित सीरियल किलर की जटिल भूमिका में विक्रांत पहले फ़्रेम से ही अपनी भाव-भंगिमा, दैहिक भाषा, संवाद अदायगी और चेहरे की अभिव्यक्तियों से जबरदस्त असर छोड़ते हैं।
बारहवीं फ़ेल जैसी सफल फिल्म में सकारात्मक और प्रेरक चरित्र निभाने के बाद ऐसा नकारात्मक किरदार स्वीकारने के लिए विक्रांत ने जो हिम्मत दिखाई है, वह क़ाबिले तारीफ है और यह दिखाती है कि उन्हें इमेज की परवाह नहीं है, वह चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाना चाहते हैं। मोनिंदर सिंह पंधेर से मिलते जुलते छोटे से किरदार में आकाश खुराना ने धूर्त, घिनौने, चरित्रहीन पैसेवाले व्यक्ति की भूमिका को बख़ूबी साकार किया है।

इन दोनों के सामने पुलिस के सब इंस्पेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका में दीपक डोबरियाल फिल्म के तीसरे सबसे अहम किरदार हैं। एक भ्रष्ट पुलिसवाला कैसे धीरे धीरे सिस्टम के कुचक्र को समझते हुए पूरा केस सुलझाने के नजदीक पहुँचता है और पूरी प्रक्रिया में कैसे उसमें बदलाव आता है, इस पूरे ग्राफ के उतार-चढ़ाव को दीपक डोबरियाल ने बहुत बढ़िया तरीके से अभिव्यक्त किया है। दीपक कहीं भी विक्रांत के आगे कमतर नहीं लगते।
नेटफ्लिक्स पर आज रिलीज़ हुई सेक्टर 36 में आदित्य निंबालकर का निर्देशन कसा हुआ है। चुस्त कैमरा, साउंड और एडिटिंग ने इस फिल्म को असरदार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।



