संजय श्रीवास्तव-
“द इकोनॉमिस्ट” मैगजीन के नवंबर के अंक में नए साल 2025 को लेकर कई पठनीय लेख पेश किए हैं. जिसमें जाते हुए साल की बातें हैं तो आने वाले साल की आहट और पदचाप सुनने की कोशिश भी.
इस अंक में मैगजीन ने साहित्य से लेकर इतिहास, फिक्शन, अर्थशास्त्र से जुड़ी 90 के आसपास उन बेस्ट किताबों की एक सूची पेश की है, जिन्हें उसने वर्ष 2024 में प्रकाशित किताबों में बेस्ट माना है. इसमें एक ही भारतीय को जगह मिली है, वो हैं बेहतरीन भारतीय लेखक अमिताव घोष, मेरे पसंदीदा लेखक. आइबिस ट्रायलॉजी के साथ मैं उनकी किताबों की मुरीद हूं. उनकी जो किताब इस सूची में है उसका नाम है Smoke And Ashes : Opium’s Hidden Histories यानि धुआँ और राख: अफीम का छिपा हुआ इतिहास. जिसे अमेरिका में Farrar, Straus and Giroux और ब्रिटेन में John Murray पब्लिकेशर्स ने छापा.
किताब जांच करती है कि कैसे नशीले अफीम के व्यापार ने मुक्त बाजार पूंजीवाद और वैश्वीकरण को आकार दिया. अफीम के पौधा की कहानी मुनाफे और ताकत की गजब की कहानी है.
जब अमिताव घोष ने अपने उपन्यासों के विशाल चक्र इबिस ट्रिलॉजी के लिए शोध शुरू किया, तो वे यह देखकर चौंक गए कि 19वीं सदी के नाविकों और सैनिकों के जीवन को अफीम के व्यापार ने काफी हद तक तय किया. इस व्यापार ने भारत समेत ब्रिटेन तक में बड़े बिजनेस एंपायर की नींव रखी.
स्मोक एंड एशेज एक यात्रा वृत्तांत, संस्मरण और इतिहास है, जो दशकों के शोध पर आधारित है. इसमें घोष ने अफीम व्यापार के ब्रिटेन, भारत और चीन के साथ-साथ पूरी दुनिया पर पड़ने वाले परिवर्तनकारी प्रभाव का पता लगाया.
यह व्यापार ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा संचालित किया गया, अफीम भारत में उगाई जाती थी. चीन को बेचने के लिए ले जाई जाती थी. जो उस समय का बहुत बड़ा ऐसा व्यापार था जो ईस्ट इंडिया कंपनी को मोटा राजस्व देता था.
इस बड़े व्यापार और मुनाफ़े का पता लगाते हुए घोष को दुनिया की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों, अमेरिका के सबसे शक्तिशाली परिवारों और प्रतिष्ठित संस्थानों (एस्टर और कूलिज से लेकर आइवी लीग तक) और समकालीन वैश्विकता का मूल इस अफीम में मिला. अमिताव घोष ने स्मोक एंड एशेज में एक छोटे से पौधे की भूमिका को उजागर किया, जिसने हमारी दुनिया को बनाया.



