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सुख-दुख

पत्रकारों की सुरक्षा इस समय बड़ा मुद्दा है, जिस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए!

देवकी नंदन मिश्रा-

जागरण सीतापुर के पत्रकार राघवेन्द्र वाजपेयी के हत्यारे और साजिश करने वाले बिना किसी पत्रकार संगठन के दबाव के गिरफ्तार हो जायेंगे लेकिन सवाल उससे भी बड़ा है पत्रकारों की सिक्योरिटी का। खबर लिखने पर छत्तीसगढ़ के पत्रकार की हत्या, अब सीतापुर में हत्या यह निहायत ही चिंताजनक है।

खबर लिखने पर सरकारी अधिकारी मुक़दमा लिखवा दे रहा है पत्रकार को डरा रहा है। दबंग ठेकेदार भी पत्रकार को खबर लिखने पर धमका रहा है और सरकार पत्रकार को कोई सिक्योरिटी नहीं देती है जबकि एक MLA इस समय कम से कम दो गनर और कई तो तीन चार लेकर चल रहे है। जबकि एक गनर से ज़्यादा MLA को नहीं मिलना चाहिये। और विधायक जी लोग क्या कर रहे हैं यह सबको पता है।

हाँ कुछ पत्रकार साथी भी वसूली करते है खबर लिखकर और उसकी क्लिप दिखाकर। हमें उन पत्रकरों की इस तरह की गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा। मैंने सैकड़ो खबरे लिखी अपराधियों और अफसरों के ख़िलाफ़ लेकिन कभी किसी ने धमकी नहीं दी।

आज बहुत सारे पत्रकार केवल वही खबर करते है जिसमें वसूली की जा सके। और यह सब मुख्यमंत्री जी और उनके अफसर भी जानते हैं। अपने बीच से वसूलीबाज़ पत्रकार की पहचान भी करनी होगी।

वैसे पत्रकार की सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा है इस समय। जिस पर चर्चा खुलकर होनी चाहिये।

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