आवेश तिवारी-
राहुल कँवल को बहुत रूचि है यह जानने में कि राहुल गांधी की कौन महिला मित्र हैं? शाह को यह बताने में बहुत रूचि है कि राहुल किससे मिलने जाते हैं. शाह बता रहे हैं कि उनकी पार्टी में यही सब चर्चाएँ होती हैं.
राहुल कँवल के पास यह साहस नहीं है कि वह शाह से पूछ सके कि जो ऑडियो टेप सोशल मीडिया पर मौजूद हैं उनमे वो किसका पीछा करने की बात कर रहे हैं? शाह के पास इसका जवाब कभी नहीं था.
राहुल कँवल यह नहीं पूछ सकता कि एक राज्यपाल के पति ने अपनी चिट्ठी में जो कहा था वो क्यों कहा था?
राहुल कँवल में यह दम नहीं है कि वह पूछे कि वो उस लड़की के बारे में बात करे जिसे न जाने किसके भय से देश छोड़कर जाना पड़ा?
राहुल कँवल के पास यह साहस नहीं है कि वह शाह से पूछ सके कि मोदी जी ने जशोदा बेन को क्यों छोड़ दिया? ऐसी क्या कमी थी उनके में?
राहुल कंवल को दिक्कत यह है कि राहुल गांधी ने कभी फोन करके उससे पूछा नहीं कि कैसे हैं कंवल सर? कभी पवन खेड़ा ने भी नहीं कहा कि बहुत अच्छा शो रहा।
सत्ता के सामने कपड़े खोलकर खड़े हो जाने वाले पत्रकार बहुत हैं लेकिन अंततः वो अपना शील बचा ले जाते हैं। व्यक्तिगत हमले नहीं करते। राहुल गांधी या हर किसी का व्यक्तिगत जीवन है। उसे जीवन की तमाम छोटी बड़ी बातें। अगर जनता ही सब कुछ जानती है तो मुझसे लोग कहते हैं कि राहुल कंवल न्यूजरूम में और डिबेट में जोशी जी से सीधे आदेश लेता है। बदले के और क्या पाता है वो राहुल ही जाने।
मुझे खुशी होगी अगर राजदीप खुलकर राहुल की इस हरकत का सार्वजनिक तौर पर विरोध करें। राहुल कंवल की पत्नी से भी प्रार्थना है अपने पति को समझाएं ऐसी हरकत न करे जिसमें खुद एक्सपोज हो। किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति में सिर्फ अनुमान के आधार पर उसके व्यक्तिगत जीवन की चर्चा उसका अपमान है।
राहुल कंवल की इज्जत कितनी है इस ट्वीट में दिखती है। राहुल कंवल ने जून 2020 में एक ट्वीट किया था। उस ट्वीट में उन्होंने कहा था कि मुझे खुशी है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल मेरा कार्यक्रम न्यूज ट्रैक देखते हैं।
केजरीवाल ने पलट कर जवाब दिया ” सॉरी राहुल, मैं तुम्हारा कार्यक्रम नहीं देखता।

आवेश तिवारी कांग्रेस से जुड़े पत्रकार हैं.
इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को पढ़ें-
इस देश के गृह मंत्री का बेहद छिछोरे और निम्न स्तरीय भाषा और बयान देने का इतिहास पुराना है लेकिन उनको अपनी कांक्लेव में बुला कर नेता प्रतिपक्ष के ख़िलाफ़ अनर्गल आरोप लगवाना, भद्दी फबतियाँ कसना, सस्ती टिप्पणियां करने वाले ‘पत्रकार’ भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं
घटिया घिनौनी बातें करने का शौक है तो यह पूछ कर दिखाओ…
मोदी से अपनी पत्नी के त्याग पर सवाल
अमित शाह गुजरात में लड़कियों की जासूसी किसके कहने पर और क्यों कराते थे
मानसी जोशी कौन है? उसकी जासूसी किसने और क्यों की?
एक घटिया आदमी जो दुर्भाग्य से इस देश का गृह मंत्री है मंच पर बैठ कर बकवास करता है, तुम उसकी बकवास को चटकारे लगा कर बढ़ाते हो, फिर एक अनजान आदमी के हाथ में माइक देकर अनर्गल मनगढ़ंत बात कराते हो, कुछ चीप घिनौने लोग तालियाँ बजाते हैं
यह पत्रकारिता है? यह है कॉनक्लेव का लेवल? अगर किसी विपक्ष के नेता ने मनगढ़ंत तो छोड़िये, मोदी और शाह के काले सियाह इतिहास का ज़िक्र भर कर दिया होता तो क्या तब भी ऐसे ही ‘बताइए-बताइए’ कहते, तब भी ऐसे ही एक अनजान आदमी को माइक देकर उस बात को बढ़ाते?



