उमाकांत लखेड़ा-
कोटद्वार उत्तराखंड में बेलगाम पुलिस झूठे केस में पत्रकारों को फंसाने के उपक्रम में जुटी है। 20 साल की होनहार युवती को 16 जनवरी को भाजपा के अरबपति नेता की SUV गाड़ी से स्कूटी समेत रौंद डाला गया।
अकेली मां का सहारा बनने के सपने संजो रही लड़की अंजली थापा की कुछ देर में जान चली गई। चूंकि मुजरिम रामकुमार फूल ऊंची पहुंच और बेशुमार दौलत का मालिक है। सो पुलिस ने गजब की सुस्ती दिखाई और किसी जगह खबर न छपे, इस काम में ताकत झोंक दी।
तेरह दिन बाद भी पुलिस ने मुजरिम नहीं पकड़ा. कोटद्वार के युवा पत्रकार सुधांशु थपलियाल ने हौसला दिखा सवाल पूछा. गजब है कि उन्होंने पोस्ट में पुलिस का नाम तक नहीं लिखा था।
कोटद्वार के सहायक एसपी चंद्रमोहन और थानेदार कोटद्वार ने आधी रात को पत्रकार को उनके घर से बिना कोई कारण बताए उठवा लिया! पूरी रात पत्रकार को खूंखार अपराधी की तरह लॉकअप में रखा।
आधी रात को ही पुलिस ने मनगढ़ंत एफसीआर लिख दी। दर्ज रिपोर्ट में आरोप लगाया कि पत्रकार के सवाल पूछने पर पुलिस की मानहानि हुई है।
जरा सोचिए कैसी पुलिस और कैसी सरकार है इस राज्य में! इसी प्रदेश का एक अरबपति मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पहाड़ के लोगों को विधानसभा के भीतर खुले आम गाली देता है। आम लोगों का भी कहना है मंत्री का बालबांका तक नहीं हुआ क्योंकि उनने नीचे से ऊपर तक सबको जेब में रखा हुआ है।
इन्हीं दिनों कोटद्वार में एक सड़क हादसे में एक युवा लड़की मौत के जिम्मेदार बड़े व्यापारी मुजरिम भाजपा नेता पर एक्शन की मांग पर पुलिस क्यों आपा खो बैठी। पत्रकार का मोबाइल भी अभी तक जब्त है। बड़बोले थानेदार ने पत्रकार सुधांशु थपलियाल को धमकाया कि भविष्य पुलिस पर कुछ भी लिखा तो अंजाम बुरा होगा।
मतलब यह कि पूरे राज्य में पत्रकारों को डराने धमकाने के लिए उत्तराखंड की पुलिस ने जजों और न्यायालयों का काम भी अपने हाथ में ले लिया! क्या अब इससे भी अच्छे दिन चाहिए जनता को?
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