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दिल्ली

जंतर-मंतर पर पत्रकारों की हिरासत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, दिल्ली पुलिस और केंद्र को नोटिस!

10 और 11 अक्टूबर को प्रदर्शन की कवरेज कर रहे 40 से ज्यादा पत्रकारों को हिरासत में लेने का आरोप, मोबाइल-कैमरे जब्त करने और वीडियो मिटाने की शिकायत; DUJ ने उपकरण लौटाने और स्वतंत्र जांच की मांग की…

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लेने, उनके साथ कथित मारपीट और उनके मोबाइल फोन व कैमरे जब्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) की याचिका पर 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करते हुए अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष DUJ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि 10 और 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को उनके पेशेवर काम के दौरान हिरासत में लिया गया। याचिका के मुताबिक, कई पत्रकारों को कथित तौर पर पीटा गया और जबरन बसों में बैठाया गया। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन, कैमरे और रिपोर्टिंग के दूसरे उपकरण भी जब्त कर लिए।

DUJ के मुताबिक, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि किसी भी तरह की अनधिकृत जब्ती नहीं होनी चाहिए। अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

40 से ज्यादा पत्रकारों को हिरासत में लेने का आरोप

DUJ ने अपनी याचिका में कहा है कि 10 और 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे 40 से अधिक पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। संगठन का आरोप है कि पत्रकारों ने अपने प्रेस कार्ड दिखाए थे और पुलिस को बताया था कि वे पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के लिए मौके पर मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।

वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। DUJ के अनुसार, कई पत्रकारों ने शिकायत की कि पुलिस ने उनके रिपोर्टिंग उपकरण जब्त कर लिए और कुछ मामलों में वीडियो भी मिटा दिए गए। इससे वे समाचार भेजने, अपने दफ्तरों से संपर्क करने और परिवार के सदस्यों से बात करने में असमर्थ हो गए।

‘पत्रकारों के कामकाज के लिए जरूरी हैं उपकरण’

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने दलील दी कि मोबाइल फोन, कैमरे और अन्य डिजिटल उपकरण पत्रकारों की आजीविका और पेशेवर काम का जरूरी हिस्सा हैं। पुलिस द्वारा इन उपकरणों को जब्त किए जाने से पत्रकारों की रिपोर्टिंग प्रभावित हुई है।

उन्होंने अदालत को बताया कि पत्रकारों के डिजिटल उपकरणों की तलाशी और जब्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही दिशानिर्देश दे चुका है। DUJ का आरोप है कि पत्रकारों के उपकरणों की कथित मनमानी जब्ती इन दिशानिर्देशों और प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ है।

संगठन ने मांग की है कि जब्त किए गए सभी उपकरण तत्काल लौटाए जाएं, ताकि पत्रकार अपना काम फिर से कर सकें।

स्वतंत्र डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को भी रिपोर्टिंग का अधिकार

DUJ ने अपनी याचिका में कहा है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। संगठन के मुताबिक, प्रदर्शनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों की कवरेज करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसी कार्रवाई से स्वतंत्र पत्रकारिता और प्रेस की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।

संगठन ने यह भी कहा कि प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की मान्यता को स्वतंत्र डिजिटल मीडिया के पत्रकारों की फील्ड रिपोर्टिंग रोकने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी पत्रकार के पास PIB मान्यता न होने भर से उसे सार्वजनिक कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग से रोकना उचित नहीं है।

DUJ ने महिला पत्रकारों समेत सार्वजनिक कार्यक्रमों की कवरेज करने वाले सभी पत्रकारों के लिए स्पष्ट सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग भी की है।

DUJ ने की स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग

दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट से कई राहत देने की मांग की है। इनमें जब्त किए गए सभी उपकरणों की तत्काल वापसी, पत्रकारों पर कथित हमलों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखना शामिल है।

संगठन ने कथित रूप से जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई और हिरासत के दौरान घायल हुए पत्रकारों तथा उनके पेशेवर उपकरणों को नुकसान पहुंचने के मामलों में मुआवजा देने की मांग भी की है।

DUJ ने वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह, अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड शशांक सिंह और अपनी कानूनी टीम का आभार जताया। संगठन का कहना है कि पत्रकारों को बिना किसी अनुचित बाधा के अपना काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया जाना इस मामले में न्यायिक सुनवाई की शुरुआत है। अदालत ने अभी याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। अब दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी।

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