
मनीष दुबे-
बाँदा- उत्तर प्रदेश के जनपद बाँदा में पत्रकारों के नवगठित संगठन प्रेस ट्रस्ट ऑफ बुंदेलखंड के तत्वाधान में संवाद, सम्मान एवं शपथग्रहण समारोह का सफल आयोजन किया गया। 21 दिसंबर के इस आयोजन में दिल्ली से लेकर यूपी के वरिष्ठ पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा मुंबई से कुछ फिल्मी कलाकारों ने भी शिरकत की।
आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार और भड़ास4मीडिया के फाउंडर एडिटर यशवंत सिंह जी, एनडीटीवी इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता रवीश रंजन, बीबीसी हिंदी के पूर्व यूपी हेड और यूट्यूबर समीरात्मज मिश्रा, दैनिक भास्कर के विशेष संवाददाता अजय प्रकाश, के न्यूज़ इंडिया के प्रधान संपादक दुर्गेंद्र चौहान, वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पीयूष बबेले, खबर लहरिया की मुख्य संपादक कविता बुंदेलखंडी, वरिष्ठ पत्रकार रशीद सिद्दीकी हमजा, इक़बाल खान के अलावा मुंबई से आए एक्टर-एक्ट्रेस अन्नपूर्णा सोनी, शिवा कुदेंर, अभिषेक खरे डम्पी, सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर समेत संगठन के सभी पधाधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम में चार चांद लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
दोपहर दो बजे लंच के बाद शुरू हुए कार्यक्रम में सैंकड़ों की तादाद में आए श्रोताओं से बाँदा का रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज सभागार भरा हुआ था। इससे पहले “द पीटीबी” के देवनगर स्थित कार्यालय का उद्घाटन फीता काटकर किया गया।


कार्यक्रम की शुरूआत, “खंडहर होती पत्रकारिता में हाशिए पर खड़े पत्रकार” विषय पर बोलते हुए यशवंत सिंह ने अपने संबोधन से की। उन्होंने सरकार से लेकर टीवी के उन तमाम चेहरों को कटघरे में खड़ा किया जो सत्ता के सुर में सुर मिलाकर पत्रकारिता के मूल उद्देश्य और उसकी धार कुंद करने का ठेका ले चुके हैं। मौजूदा समय की तमाम घटनाओं को याद करते हुए अपने कई मिनट लंबे वक्तव्य में भड़ास एडिटर ने नोएडा फिल्म सिटी के स्टूडियो के भीतर बैठकर चीखने चिल्लाने वालों की अपेक्षा छोटे जिलों में बैठकर पत्रकारिता कर रहे लोगों की दुश्वारियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बाँदा की भौगेलिक परिस्थितियों और माफियाओं पर भी प्रहार किया। संबोधन के अंत में उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक एक्टिविस्ट और पत्रकार आशीष सागर दीक्षित के संघर्षों को याद करते हुए उनकी प्रशंसा की।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश रंजन, समीरात्मज मिश्रा, अजय प्रकाश, दुर्गेंद्र चौहान और पीयूष बबेले जी ने अपने-अपने अनुभवों को याद करते हुए बुंदेलखंड की तमाम मूलभूत जरूरतों और जनता के मुश्किल हालातों का मुद्दा उठाया। कैसे बाँदा व आसपास के जिलों को सरकारी योजनाओं में भागीदार बनाया गया, कैसे अखबारों ने बड़ी-बड़ी हेडलाइनों में इन याजनाओं के पुलिंदे बांधे। बावजूद इसके बुंदेलखंड में आज कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी दुश्वारियां ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। यहां की नदियों को खनन माफियाओं ने छलनी कर रखा है। इन तमाम बातों को विस्तार से रखा गया।
कार्यक्रम के आयोजक आशीष सागर दीक्षित ने मंच से अपने संबोधन में कहा कि जिले में सक्रिय कुछ माफियाओं ने उनके आयोजन को असफल बनाने के लिए खूब दांव-पेंच चले। इतना ही नहीं उन्होंने पैसा भी खर्च किया ताकि इस आयोजन को ठंडा किया जा सके। इसका दर्द आशीष के चेहरे पर साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि इन माफियाओं और उनकी काली दौलत का ही असर है जो अब तक इस आयोजन को लेकर किसी भी अखबार या पोर्टल ने एक लाइन तक नहीं छापी लिखी। उन्होंने बताया कि इस संगठन की शुरूआत ही भ्रष्टाचार से दो चार होकर हुई है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा- द पीटीबी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जहां एक हजार रुपया लगना था वहां उनको आठ हजार रुपये देने पड़े। इतना ही नहीं संगठन में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे अनवर रजा को मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया लेकिन उन सबकी सक्रियताओं की वजह से विरोधी अपने मंसूबे में विफल हो गए।



आयोजन के तीसरे सत्र में सभी विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इसके बाद संगठन के सभी पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण संपन्न कराया गया। सभी पदाधिकारियों ने संविधान की शपथ दिलाकर भविष्य में किसी तरह के अनैतिक कार्यों में लिप्त पाए जाने पर संगठन से निष्कासित करने और कठोर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। अंत में सभी अतिथियों और श्रोताओं के लिए भोजन की व्यवस्था भी रखी गई थी।



