पहले ये बताओ शराब वितरण प्रणाली के विशेषज्ञ सेमवाल जी, ये ऋषिकेश जैसी तपो भूमि में शराब के ठेके खोलते शर्म नहीं आई या घर की खूँटी पर टांग कर आते हो शर्म? …

उमेश कुमार-
खुला पत्र-3 शराब वितरण प्रणाली के विशेषज्ञ अधिकारी एचसीएस सेमवाल के नाम।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा आप जैसे महान व्यक्तित्व के लोगों ने ही उत्तराखंड राज्य के साथ छल किया है, धोखा किया, अगर आप जैसे चंद अधिकारी पहाड़ और पहाड़ी का दर्द समझ लेते तो शायद ना तो पलायन होता और ना पहाड़ सिसकता।
सारी जिंदगी लखनऊ में नौकरी करने वाले और राज्य बनते ही देहरादून में आकर बस जाने वाले पत्रकार आपको या अन्य पहाड़ विरोधी अधिकारियों से सवाल करते तो शायद आज हम पहाड़ की अस्मिता को बचा लेते।
खैर, भैंस के आगे बीन बजाने वाली बात करने से क्या फायदा, अभी कह दोगे उमेश कुमार तो प्लेन का है और पहाड़ के अधिकारी का विरोध करता है, काश आपने पहाड़ का दर्द समझा होता तो मुझे विरोध करने की जरूरत नहीं पड़ती। बाबा बद्री-केदार मेरी आने वाली नस्लें खराब कर दें, अगर मैंने कभी पहाड़ के प्रति अपने मन एक बार भी ग़लत सोचा हो, इस राज्य से धोखा करने का सोचा हो।
एक बार वो लोग भी जो, मेरा विरोध करते हैं, बाबा बद्री केदार की कसम खाकर कह दें कि कुंठित मानसिकता और जलन के कारण नहीं करते तो मैं मान जाऊँगा।
खैर, ये बताओ शराब वितरण प्रणाली के विशेषज्ञ सेमवाल जी, ये ऋषिकेश जैसी तपो भूमि में शराब के ठेके खोलते शर्म नहीं आई या घर की खूँटी पर टांग कर आते हो शर्म?
ये ऋषिकेश की शराब की दुकान “ग्लासी जंक्शन” किसके बाप की है जिसके आगे आप नतमस्तक हो और ये टीचर की बॉटल के हाफ जिस पर MRP 760 प्रिंटेड है उसका बिल 860 का काट रहा है और सीधा 100 की ओवररेटिंग वसूल कर रहा है।
अब ये मत कहना कि शराब की बॉटल कहीं और की है, इस बॉटल पर साफ़ लिखा है कि “Only sale in Uttrakhand” अब बताओ ये किसका बाप है जो सरेआम पहाड़ के लोगो को लूट रहा है? इस दुकान का बाप कौन है?
मैं बता दूँ? इसके संरक्षक आप हो और इसमें हिस्सेदारी भी आपकी है क्योंकि जो विभाग का मुखिया होता है वही जिम्मेदार है होता है, अगर रेल दुर्घटना होती है तो रेल मंत्री का इस्तीफा मांगा जाता है और मैं उत्तराखंड नागरिक और विधायक होने के नाते आपका इस्तीफा मांगता हूं।
क्रमश:
विधायक उमेश कुमार का इससे पहले वाला पत्र भी पढ़ें…
शराब की ओवररेटिंग को लेकर MLA उमेश कुमार का एचसीएस सेमवाल को खुला पत्र



