नई दिल्ली। फिल्मकार विक्रम भट्ट के कथित 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में मीडिया ने एक बार फिर बिना तथ्य जांचे भ्रामक खबरें चला दीं। कानूनी वेबसाइट बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के बाद लगभग सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने यह दावा कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट — दोनों को अंतरिम जमानत दे दी है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेश के मुताबिक यह दावा पूरी तरह गलत है।
कोर्ट के रिकॉर्ड में साफ लिखा है कि केवल याचिकाकर्ता नंबर-1 श्वेतांबरी वी. भट्ट को ही अंतरिम जमानत दी गई है, जो इस समय उदयपुर की सेंट्रल जेल में बंद थीं। आदेश में विक्रम भट्ट को किसी भी तरह की अंतरिम राहत दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
13 फरवरी 2026 को पारित आदेश में कहा गया है:-
“याचिकाकर्ता संख्या 1 – श्वेतांबरी वी. भट्ट को अंतरिम जमानत पर तुरंत रिहा किया जाए, बशर्ते वह मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, उदयपुर की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड दाखिल करें।”
यानी कोर्ट ने सिर्फ पत्नी को ही अंतरिम राहत दी है, पति विक्रम भट्ट के संबंध में कोई जमानत आदेश नहीं दिया गया।
मीडिया की भेड़चाल
बार एंड बेंच की शुरुआती रिपोर्ट में की गई गलती को बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन के तमाम न्यूज वेबसाइट्स और चैनलों ने हूबहू कॉपी कर लिया। किसी ने भी सुप्रीम कोर्ट का वास्तविक आदेश पढ़ने या दस्तावेज देखने की जरूरत नहीं समझी।
नतीजा यह हुआ कि सोशल मीडिया से लेकर न्यूज पोर्टलों तक यह झूठी खबर फैल गई कि “विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है”, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
सवाल मीडिया की साख पर
यह मामला एक बार फिर भारतीय मीडिया की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जहां एक कानूनी रिपोर्टिंग की गलती को तथ्यों की जांच किए बिना पूरे देश में “सत्य” की तरह परोस दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद गलत खबरें चलना न सिर्फ गैर-पेशेवर रवैया है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को लेकर जनता को गुमराह करने का भी उदाहरण है।
देखें कोर्ट ऑर्डर…


खबर में मिस्टेक की शुरूआत हुई बार एंड बेंच की न्यूज से। उसके बाद किसी भी मीडिया दुकानदार ने फैक्ट तलाशने की जहमत नहीं की। आंख बंद की और बार एंड बेंच की खबर उठाकर चेप दी। देखें किसने किसने चलाई गलत खबर…





गिरफ्तारी की खबर यहां पढ़ें…


