अविनाश दास-
अलविदा इति। तुम एक बहादुर लड़की थी। एक अच्छी चित्रकार और एक बहुत अच्छी पत्रकार। छोटी सी नन्हीं बच्ची से एक इंडीपेंडेंट लड़की बनने की तुम्हारी यात्रा को हम सबने देखा, सराहा और तुम पर गर्व किया। मिलेंगे किसी और जहान में।
सत्यव्रत मिश्रा-
पहली बार इति से आईआईएमसी एम्नुलाई परिवार के कार्यक्रम में मिला था. दुबली-पतली सी हंसमुख लड़की. मुस्कुराते हुए अपना परिचय दिया था, ‘मेरा नाम इति है, लेकिन कुछ बदमाश दोस्त मुझे आईटीआई कहकर चिढ़ाते हैं. मुझे चित्रकारी करना और थिएटर बहुत पसंद है.’ मुलाकात छोटी सी थी. फिर गाहे-बगाहे यहां-वहां मिलना लगा रहा. जब गुड़गांव शिफ़्ट हुआ, तो कुछ दिनों के बाद पता चला कि इति भी साथ काम करने आ गई हैं. फिर लॉक-डाउन लग गया और WhatsApp पर आख़िरी चैट भी यही थी, “भैया मिलते रहिएगा.”
आज इति दुनिया को अलविदा कहकर चली गई. दोष किसका है, पता नहीं. हालांकि, दुख सबका है. मैं भी बहुत दुखी हूँ. इतनी ज़ल्दी नहीं जाना था, इति. अभी तो कई और रंग भरने थे. कई और नाटकों में हिस्सा लेना था. कई और पार्टियों में मिलना था. इतनी ज़ल्दी नहीं जाना था.
स्वर्ण कांत-
इति Iti के लिए एक और पोस्ट… मैंने पिछले तीन दिनों में तीन पोस्ट डाली… यकीन मानिए, दोस्तों साथियों ने भर-भर के दुआएं की और मदद भी. कुछ साथी व्यावहारिक कारणों से मदद करने में असमर्थ रहे.

ये पोस्ट उनके लिए… और जिन तक मेरी पिछली पोस्ट नहीं पहुंची…हमारी प्यारी, हंसमुख और बेहद टैलेंटेड इति शरण ज़िंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते लड़ते हार गई.
कुछ हफ़्ते पहले गॉलब्लैडर स्टोन की वजह से उनका ऑपरेशन हुआ था, लेकिन अफसोस वो काफी कॉम्प्लिकेटेड रहा. उसके बाद से इन्फेक्शन पूरे शरीर में फैल गया. तब से लगातार दो और बड़े ऑपरेशन हुए, और अब पिछले छह दिनों से वह ICU में वेंटिलेटर पर है…
हर दिन उन्हें प्लाज़्मा और ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न दिया जा रहा था. शरीर बहुत कमजोर पड़ चुका था. परिवार टूट चुका था, लेकिन उम्मीद ज़िंदा थी कि सही इलाज और हमारी मदद से इति फिर से खड़ी हो जाएगी. लेकिन अफसोस वह चली गई.



