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पत्रकार गौतम नवलखा को मिली बेल, नक्सली कनेक्शन का नहीं मिला कोई सबूत..

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानवाधिकार कार्यकर्ता सह पत्रकार गौतम नवलखा को जमानत दे दी। 73 साल के नवलखा को 14 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया था। गौतम नवलखा कथित नक्सलियों से संबंध रखने और भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद मामले के मुख्य आरोपियां में से एक थे।

बढ़ती उम्र और बिगड़ती स्वास्थ्य स्थितियां के बावजूद नवलखा को नवंबर 2022 से जेल में और घर में नजरबंद रखा गया था।

गौतम नवलखा पर नक्सलियों से संबंध रखने, प्रतिबंधित संगठन सीपीआई माओवादी के एजेंडे पर काम करने, कश्मीरी अलगाववादियों का समर्थन करने, नक्सली दस्तावेज रखने समेत कई आरोप लगाए गए थे।

नवलखा को सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोप में, पुणे के पास भीमा कोरेगांव स्मारक पर जातीय दंगे भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

नवलखा को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इनके खिलाफ कोई ऐसे सबूत नहीं मिले हैं जिससे लगता हो कि इन्होंने किसी भी तरह की आतंकी साजिश रची या वैसी किसी साजिश में हिस्सेदार रहे हो। हालांकि कोर्ट ने अपने ही फैसले पर तीन सप्ताह की रोक लगा दी है ताकी एनआईए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सके।

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