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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के विष्णु राज में डेढ़ सौ करोड़ रुपये की कॉलेज की जमीन रामा बिल्डर्स को मात्र 9 करोड़ में दे दिया, देखें पेपर

कुणाल शुक्ला-

त्तीसगढ़ में कुशासन वाले विष्णु देव के आईएएस अधिकारी राजधानी रायपुर में कॉलेज के लिए आरक्षित बेशकीमती जमीन बिल्डर राजेश अग्रवाल उर्फ बुतरू को बेच खाये और डकार तक नहीं लिए।

जिस 9 एकड़ बेशकीमती जमीन का सौदा मात्र 9 करोड़ में हुआ है उसके लिए कुछ जमीन दलालों का कहना है यह जमीन की बाज़ार कीमत 150 करोड़ है, वहीं कुछ कह रहे हैं जमीन की बाज़ार कीमत 200 से 300 करोड़ रुपए तक की है।

राजेश अग्रवाल उर्फ बुतरू ने छत्तीसगढ़ के कई आईएएस अधिकारियों को करोड़ों का बंगला दे रखा है। इसका खुलासा भी मैं जल्द ही इनके नामों के साथ नंगा करके करूँगा।

वैसे इस पूरे मामले की शिकायत मैंने पीएमओ, राज्यपाल, सीबीआई और ईडी को पहले ही कर रखी है।


कन्हैया शुक्ला-

मोहल्ला-मोहल्ला में मचा है हल्ला ..विष्णु राज में रायपुर कलेक्टर और BMW वाले बुड्ढे ने सरकारी कॉलेज की ज़मीन बिल्डर को दिला डाली. छत्तीसगढ़ की राजधानी में बीजेपी सरकार में ऐसा कृत्य हुआ है कि जिससे साफ़ हो जाता है कि सरकार के लिए प्राथिमकता क्या है? स्कूल-कॉलेज, शिक्षा या रामा बिल्डर?

ताजा मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अमलीडीह इलाके से है जहां सरकारी कॉलेज के लिए आवंटित 9 एकड़ ज़मीन को अग्रवाल जी (रामा बिल्डर) के हाथों कौड़ियों के भाव में दे दिया गया है. इस मामले में भी सिर्फ़ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव की छवि ख़राब हो रही बाकी बिल्डर, सरकारी अधिकारी, दलाल और पत्रकार सब मौज में हैं. नुकसान सिर्फ युवाओं का और नाम मुख्यमंत्री का ख़राब हो रहा है कि विष्णु राज में प्रथमिकता बिल्डर है ना कि युवाओं की शिक्षा!

वैसे ये रामा बिल्डकॉन कोई छोटा-मोटा बिल्डर नहीं है. सिस्टम में बड़े अधिकारियों से लेकर पत्रकारों तक की चाहत होती है इस बिल्डर के योजनाओं में ज़मीन और घर लेना. बहुतो के तो हैं भी.

रायपुर से लेकर बिलासपुर तक धंधा करने वाले रामा बिल्डकॉन के डायरेक्टर संजय अग्रवाल, राजेश अग्रवाल और सीमा अग्रवाल हैं. वैसे आदिवासी बाहुल्य राज्य में आदिवासियों के विकास के नाम पर हर चुनाव होता है पर चुनाव जीतने के बाद विकास की गंगा-यमुना सिर्फ इन्हीं के यहां बहती नज़र आती है.

रामा ग्रीन्स, रामा वर्ल्ड, रामा हाईस्ट्रीट, रामा ईको और स्वर्ण भूमि नाम के सारे प्रोजेक्ट इसी ग्रुप के हैं. राजधानी में स्वर्ण भूमि के बारे में तो सब जानते हैं और बहुतों के ज़मीन-मकान स्वर्ण भूमि में हैं तो सोच सकते हैं कि इस मामले में पावरफुल लोगों (मीडिया, अधिकारी और नेताओं) के मुंह पर चुप्पी क्यों छाई है?

इस मामले में रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह और बिल्डर के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल, नगर निगम महापौर ढेबर और RTI एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने इसकी शिकायत ईडी, CBI, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सब जगह कर दी है, पर क्या आपको लगता है कि छत्तीसगढ़ में लोगों को शिक्षा या शिक्षण संस्थानों की ज़रूरत है? क्योंकि अनपढ़ों के बीच में ही तो भ्रष्टाचार का संस्थान चलता है, सब पढ़-लिख लेंगे तो ये दलालों की मंडी कैसे चलेगी?


इस मामले में रायपुर कलेक्टर के यहां से जो पक्ष आया है वो पढ़िए-

पूर्व सरकार के कार्यकाल 2023 में ही रायपुर के रहे कलेक्टर के समय प्रपोज़ल बना था ..जब सरकार बदली तो सरकार ने इस पर नियमानुसार उचित कार्यवाही करने के लिए तत्कालीन कलेक्टर को आदेश जारी किया जिसके बाद रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह ने बिल्डर से नियमों के पालन करते हुए दस्तावेज़ मांगे और जो आज तक बिल्डर नहीं दे पाया है तो किसी भी तरह की कोई जमीन बिल्डर को नहीं दी गई है ..

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