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जस्टिस बेला त्रिवेदी की कलम सरकार के खिलाफ़ कभी नहीं चली!

प्रशांत टंडन-

सभी बिछुड़े बारी बारी: भगवान से हॉटलाइन में संपर्क में रहे डी वाई चंद्रचूड़ के बाद आज बेला त्रिवेदी भी सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गईं.

बेला त्रिवेदी गुजरात में उस वक्त लॉ सेक्रेटरी थीं जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे.

बेला त्रिवेदी की कलम सरकार के खिलाफ़ कभी नहीं चली.

जस्टिस खन्ना के सीजेआई बनने से पहले उन सारे केस जिसमें सरकार या बीजेपी का हित हो बेला त्रिवेदी की बेंच में लगा दिये जाते थे.

बेला जी की खासियत थी कि सुनवाई से पहले पता चल जाता था कि फैसला क्या आएगा.

उमर खालिद की जमानत का मामला भी इन्हें दिया जाता था जब तक उमर के वकीलों ने खुद ही केस वापिस नहीं ले लिया.

बेला त्रिवेदी के रिटायरमेंट पर सुप्रीम कोर्ट को बधाई.


प्रभाकर कुमार मिश्रा-

आइए, जस्टिस बेला त्रिवेदी के रिटायरमेंट के दिन से जुड़ी एक और रोचक बात बताता हूं।

सुप्रीम कोर्ट में एक परंपरा रही है कि जब भी कोई जज सेवानिवृत्त होता है, सभी साथी जज अपने अपने चैम्बर से निकलकर प्रोर्टिगो में इकट्ठा होते हैं। रिटायर होने वाले जज अपने चैंबर से निकल कर आते हैं और साथी जज उनको विदा करते हैं।

लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी के लिए CJI गवई ने उस परंपरा को तोड़कर खुद जस्टिस त्रिवेदी के चैंबर तक गए, साथी जज भी साथ गए। उनको साथ लेकर आए और फिर प्रथा के अनुसार उनको गॉर्ड ऑफ हॉनर दिया गया। जस्टिस बेला त्रिवेदी कार में बैठीं और साथी जजों ने प्रतीकात्मक रूप से उस कार को धक्का लगाकर जस्टिस बेला त्रिवेदी को विदा किया।

CJI जस्टिस के सम्मान में शनिवार को आयोजित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में जस्टिस केवी विश्वनाथन ने अगर ये बात नहीं बताई होती तो शायद ही किसी को पता चलता। #JusticeBelaTrivedi #CJI #justicegavai

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