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आज के अखबार : सरकार को जवाब तैयार करने में बीस दिन लग गए, लेकिन क्यों? इसकी खबर क्यों नहीं है!

Aerial view of a large crowd marching along a road toward the Jharkhand Assembly in Ranchi, with the building visible in the distance.

संजय कुमार सिंह

मुद्दों से भागते, सरकार को बचाते

आज झारखंड में छात्र आंदोलन के खिलाफ पुलिस लाठी चार्ज की खबर है और आज ही यह खबर है कि अमित शाह संसद में बोलेंगे (आएंगे)। मीडिया, सरकार, राजनीति और गोदी पत्रकारिता ने झारखंड छात्र आंदोलन को कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन जैसा बना दिया था। उसमें छात्रों और बच्चों पर की लगी लाठी, करंट मारने वाली लाठी, पेलेट गन, बिहार में एक47 आदि चलना तथा छात्रों के साथ पुलिसिया बर्बरता तथा बिना वर्दी वाले लठैतों की पहचान मुद्दा होना चाहिए था लेकिन साजिशन झारखंड आंदोलन को मुद्दा बना दिया गया और आज उसकी खबर के साथ केंद्रीय संसदीय मंत्री का यह कहना छपा है, ‘अमित शाह बोलेंगे, भागना मत’ (नवोदय टाइम्स)। इसी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के हवाले से खबर है, जंतर मंतर पर नहीं चली थी गोली। मुद्दा जंतर मंतर पर गोली चलना है ही नहीं। मुद्दा दिल्ली में छात्रों और बच्चों पर पेलेट गन चलना है, दिल्ली के अस्पतालों में छर्रों से घायल मरीजों का होना है और अगर पुलिस ने पेलेट गन नहीं चलाए तो ये घायल कैसे हुए इसकी चिन्ता करना और जवाब देना भी सरकार का ही काम है। जो मीडिया सरकार से जवाब नहीं मांगता है, सवाल नहीं करता है वह आज सरकार के बे-सिर-पैर के दावों के साथ मैदान में है। भाजपा के रक्षा मंत्री ऑपरेशन सिन्दूर में सैनिकों की शहादत पर झूठ बोल चुके हैं और बाद में सच स्वीकार किया है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री का यह दवा कितना महत्वपूर्ण है कि उसे पहले पन्ने पर टॉप में तीन कॉलम जगह दी जाए। अगर यह सब झारखंड में पुलिस की हिंसा के बाद या बदौलत है तो आज ही अखबारों में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान छपा है, मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे ….. कुछ लोगों ने माहौल खराब करने और राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर इस आशय की कई खबरें हैं लेकिन अखबारों में सोशल मीडिया की वही खबरें नहीं हैं। आप समझ सकते हैं क्यों? अमर उजाला ने सोशल मीजिया एक्स पर हेमंत सोरन के इस बयान को दो कॉलम में छापा है। इसके साथ राहुल गांधी का भी बयान है, बल प्रयोग गलत, बात सुने सरकार। लेकिन छात्रों को कौन बहका रहा है उसपर कुछ नहीं दिखा। एक खबर जरूर है, भाजपा ने आज झारखंड बंद का एलान किया

मुझे लगता है इस आंदोलन और सरकारी कार्रवाई तथा उसकी टाइमिंग के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि कांग्रेस-भाजपा एक जैसी पार्टियां हैं और हिन्दुओं की पार्टी को हिन्दुओं का समर्थन मिलना चाहिए। भले वह चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी पर संतोषजनक जवाब न दे या कहे कि आपने चंदा नहीं दिया तो आपको क्या मतलब या कोई भक्त यह कह दे कि चढ़ावा उसी का चुराया गया जिसकी श्रद्धा नहीं थी। कुल मिलाकर न सिर्फ राजनीति, स्थिति भी बहुत खराब है और कांग्रेस पर झूठे आरोप लगाने वाली भाजपा को अभी भी आम लोगों का समर्थन है। ऊपर द हिन्दू में पहले पन्ने पर प्रकाशित रांची में छात्रों का प्रदर्शन की तस्वीर है। पीटीआई की इस फोटो का कैप्शन भी लिखा है। हिन्दी में इसका मतलब हुआ – एक स्टैंड लेना (या अपनी बात रखना)। सोमवार को रांची में झारखंड असेम्बली की ओर मार्च करते प्रदर्शनकारी। दैनिक भास्कर ने आठ कॉलम की एक फोटो पर लाल रिवर्स में बड़े फौन्ट में लिखा है, पहली बार विधान सभा की चौखट तक पहुंचे आंदोलनकारी। मुझे याद है, जब संसद पर हमला हुआ था तब आतंकी परिसर में पहुंच गए थे लेकिन संसद भवन के अंदर जाने से पहले उन्हें रोक दिया गया था। इसमें कई जवान शहीद हुए थे और इसलिए जनसत्ता में हमलोग संसद पर हमला लिखने के पक्ष में नहीं थे। हमलोगों ने संसद की चौखट तक पहुंचे आतंकी से लेकर ऐसे कई शीर्षक सोचे थे। शायद जो छपा वह कुछ ऐसा था, “लोकतंत्र के मंदिर पर सीधा हमला”। मकसद सच छिपाना नहीं, सच ही बताना था और हमने उसे संसद पर हमला नहीं कहकर लोकतंत्र के मंदिर पर सीधा हमला कहा था। संसद पर हमले दूसरे तरीकों से हुए या नहीं वह अलग चर्चा का मुद्दा हो सकता है। इस तरह, मैं यह कहना चाहता हूं कि झारखंड में जो हुआ वह दिल्ली में जो हुआ था उसके जैसा नहीं है। लेकिन अखबारों की प्रस्तुति वैसी ही बता रही है। कहने की जरूरत नहीं है कि दैनिक अखबार की लीड किसी एक खबर से तय नहीं होती है और लीड बनाने का कोई पैमाना नहीं हो सकता है जिसपर फिट होने वाली किसी खबर को लीड बना दिया जाए। लीड उस दिन की दूसरी खबरों से भी तय ऐसी होती है। ऐसी खबर जो उस दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो या उस दिन सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली हो।

इस लिहाज से आज देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, जनता भी चाहती है शाह से जवाब। उपशीर्षक है, राहुल और खरगे ने कहा, शाह बताएं, छात्रों पेलेट गन चलाने का आदेश किसका था। पांच कॉलम की इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, छात्रों के साथ हुई बर्बरता पर राहुल गांधी ने फिर सरकार को घेरा। इसके साथ छपी खबर का शीर्षक है, गृहमंत्री शाह जवाब देने को तैयार रिजिजू। खबर इस प्रकार है, राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार नीट को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। गृहमंत्री अमित शाह संसद में इसका पूरा जवाब देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और तैयार हैं। रिजिजू ने कहा, अब राहुल गांधी चर्चा और गृहमंत्री के जवाब की मांग कर रहे हैं। हम तैयार हैं। अब देखेंगे कि कौन चर्चा से भागता है। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि तैयार होने में 20 दिन क्यों लगे और जब सरकार कह रहे हैं कि गोली चली ही नहीं, पहले भी सदन में गलत जानकारी दी गई है तो कोई इस जवाब को क्यों सुने और नहीं सुनना भागना नहीं हो सकता है। फिर भी यह भाषा ऐसी है कि पूरा मामला किसी लोकतांत्रिक सरकार का जवाब कम और हारे हुए किसी तानाशाह के प्रतिनिधि का जवाब ज्यादा लगता है। खबर में सरकार और सत्ता के पलटवार का क्या मतलब? सत्ता की ताकत वार करने के लिए नहीं है और सवाल का जवाब पलटवार नहीं हो सकता है। देशबन्धु के अपवाद के साथ आज मेरे सभी अखबारों में झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन या अमित शाह जवाब देंगे लीड है। राहुल गांधी ने झारखंड में बल प्रयोग की निन्दा की इस खबर को प्रमुखता नहीं मिली है। अमित शाह को जवाब देने में इतना समय क्यों लगा – यह भी नहीं है। सभी अखबारों में हिंसा की खबर इसी अंदाज में है जैसे कांग्रेस समर्थित सरकार ने भी हिंसा की। यह नहीं बताया है कि घायलों की संख्या कुल पांच है (द हिन्दू)। आप जानते हैं कि दिल्ली में घायलों की संख्या (पुलिस वाले भी) कहीं ज्यादा है और अधिकृत तौर पर घायलों की संख्या अभी तक नहीं बताई गई है और घायल पुलिस वालों के परिवार ने पुलिस वालों के घायल होने पर ऐसा प्रचार किया जैसे पहले कभी हुआ ही नहीं था, उन्हें पता ही नहीं था कि वे घायल हो सकते हैं या घायल होना उनकी नौकरी का हिस्सा है, इलाज कराना और समुचित भरपाई सरकार की जिम्मेदारी है, पुलिसकर्मी का अधिकार तो है ही। फिर भी वे महिलाओं से बदतमीजी कर चुके थे और लाठी से अश्लील हरकत करने वालों के खिलाफ भी किसी कार्रवाई की खबर नहीं है। तमाचा मारने वाले के बारे में जरूर कार्रवाई की खबर थी। (जारी)

आज के अखबार (दो) : 10 अखबारों की लीड और सेकेंड लीड दो ही खबरें; खबर जो होनी चाहिए थी कहीं नहीं है

लिंक यह रहा –  https://www.bhadas4media.com/dus-akhbaaron-kee-lead-aur-second-lead/

लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] के जरिए संपर्क हो सकता है।

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