अलास्का, दक्षिण-पूर्व अलास्का। मेटा के सीईओ और अरबपति मार्क ज़ुकरबर्ग की लगभग 300 मिलियन डॉलर की 387 फुट लंबी सुपरयाच ‘लॉन्चपैड’ पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते एक छोटी स्किफ (21 फुट की नाव) ईंधन खत्म होने के कारण फंस गई थी, लेकिन ज़ुकरबर्ग की याच, जो घटनास्थल के सबसे करीब थी, मदद के लिए आगे नहीं आई।
अलास्का बीकन और गार्डियन सहित कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 अगस्त की रात लगभग 9:30 बजे पीटर्सबर्ग और जूनो के बीच एक छोटी स्किफ ने अमेरिकी कोस्ट गार्ड से मदद मांगी। कोस्ट गार्ड ने जाँच के बाद कहा कि नाव संकट में नहीं थी, लेकिन मदद का अनुरोध प्रसारित कर दिया।
पास में मौजूद छोटी क्रूज शिप ‘वाइल्डरनेस लेगेसी’ (अनक्रूज एडवेंचर्स की) ने मदद की। उसने स्किफ को टो करके फारागट बे पहुँचाया और ईंधन उपलब्ध कराया। जबकि ज़ुकरबर्ग की याच घटनास्थल के और करीब थी।
क्रूज शिप के एक यात्री माइकल लव ने ब्लूस्काई पर पोस्ट किया: “हमारी नाव ने फंसी हुई नाव को बचाया। कोस्ट गार्ड ने मार्क ज़ुकरबर्ग की याच को रेडियो किया था, जो करीब थी, लेकिन उन्होंने बार-बार जवाब देने से इनकार कर दिया। कैप्टन के इस ऐलान पर यात्रियों ने लगभग सर्वसम्मति से हूटिंग की।”
ज़ुकरबर्ग का जवाब
ज़ुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चैन के प्रवक्ता ब्रायन बेकर ने फोर्ब्स और अन्य मीडिया को बताया कि ज़ुकरबर्ग और उनका परिवार उस समय याच पर नहीं थे। क्रू ने अलग रेडियो चैनल पर काम कर रहा था, इसलिए शुरुआती कॉल नहीं सुनी। जब उन्होंने कोस्ट गार्ड का मैसेज देखा, तब तक मदद शुरू हो चुकी थी।प्रवक्ता ने कहा, “कोस्ट गार्ड ने नोट किया कि नाव संकट में नहीं थी। जब क्रू ने अलग चैनल पर संपर्क की समीक्षा की, तब तक सहायता पहले से चल रही थी। हम सभी पक्षों के सुरक्षित होने के लिए आभारी हैं।”
यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोगों ने याच के क्रू की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं, जबकि आधिकारिक पक्ष का कहना है कि कोई जानबूझकर इनकार नहीं किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के अलास्का में एक छोटे नाव का ईंधन ख़त्म हो गया था और वह मदद माँग रहा था. एक नाव में सवार बाप-बेटे ने उस नाव की मदद की, जबकि 300 मिलियन डॉलर के मार्क ज़करबर्ग के सुपर यॉट ने नज़दीक होते हुए भी मदद नहीं की.
ज़करबर्ग की ओर से सफ़ाई दी गई है कि उस यॉट में मालिक या उनकी पत्नी नहीं थे और स्टाफ़ दूसरी रेडियो फ़्रीक्वेंसी पर था.
समुद्र में फँसे लोगों की मदद करना अंतरराष्ट्रीय क़ानून है, भले ही वो दुश्मन हों, लेकिन इस मामले में तो आम अमेरिकी ही फँसे हुए थे.
-प्रकाश के रे


