सिद्धार्थ ताबिश-
अमेरिकी राष्टपति बुश को सद्दाम हुसैन से पर्सनल खुन्नस थी, क्यूंकि उसने सीनियर बुश को गाली दे दी थी.. ये बात सब जानते हैं.. उस खुन्नस में इराक़ पर परमाणु का इलज़ाम लगा कर सारा इराक तबाह कर दिया था अमेरिका ने.. पूरी तरह से पर्सनल खुन्नस पर एक पूरे देश को मटियामेट कर दिया, हजारों जानें गयीं।
ऐसे ही अमेरिका अब ईरान के साथ कर रहा है.. ईरान पर इसराइल का हमला दरअसल अमेरिका का हमला है.. इसराइल ज़िन्दगी में ईरान पर हमला न करता क्यूंकि कोई इतनी बड़ी वजह थी ही नहीं उस पर हमले की.. ये अमेरिका का प्रायोजित हमला है.. और वजह वही, पर्सनल खुन्नस.. खामेनेई भी वैसे ही बडबोले हैं जैसे सद्दाम थे.. लगातार भड़काऊ बयानबाज़ी और अमेरिका को उल्टा सीधा बोलना.. जबकि तुर्किये से लेकर सऊदी तक सब शांत हैं।
जिस किसी से भी अमेरिका को पर्सनल खुन्नस होती है वो उस पर परमाणु हथियार का इलज़ाम लगा देता है.. भारत भी ये जानता है.. मगर क्या किया जाए.. अमेरिका की दादागिरी है.. जबकि ईरान भारत का बहुत अच्छा दोस्त है और इसराइल भी.. क्या नार्थ कोरिया से बड़ा पागल कोई है? मगर अमेरिका उसे नहीं छुवेगा.. वहां मानवाधिकार नाम की चीज़ ही नहीं है मगर अमेरिका “नैतिकता” का टीचर सिर्फ़ वहीँ बनता है जहाँ उसकी पर्सनल खुन्नस हो.. अब जब वो खामेनेई को मार देगा तो फिर मानवाधिकार और विरोधी पार्टी को आगे करके उत्पीडन वगैरह दिखा देगा.. वैसे ही जैसे सद्दाम की फाँसी को “कुर्द” लोगों का बदला साबित कर दिया गया था।
मुझे बिलकुल इस बात से एतराज़ हैं कि अपनी पर्सनल खुन्नस में आप देश के देश बर्बाद कर दें.. हजारों को मार डालें, लोगों को बेघर कर दें.. और फिर अपने कर्मों को आप “नैतिकता” का चोला पहना दें.. अमेरिका न तो खामेनेई शासन में पीड़ित महिलाओं के लिए हमला कर रहा है और न ही किसी आतंकवाद के लिए.. ये उसकी एकदम निजी खुन्नस है खामेनेई के साथ.. इन्होंने कोई डिमांड की, वो आदमी माना नहीं.. उल्टा वो धमकाता रहा.. अब वो उसे मार डालेंगे ये बता कर कि वो मानवाधिकार का उल्लंघन कर रहा था.. ये बहुत बड़ी मक्कारी वाली रणनीति है।
ईरान के लोग बहुत अच्छे हैं.. भारत से बहुत प्यार करते हैं वो लोग.. भारत उनके लिए सपनों का देश है.. और आज वो सब सिर्फ़ अमेरिका की पर्सनल खुन्नस की वजह से घर परिवार छोड़ कर भाग रहे हैं और अब हजारों मारे भी जायेंगे।
इस युद्ध को रुकना ही चाहिए.. किसी भी तरह से.. ये नैतिकता का युद्ध नहीं है.. ये बस पर्सनल खुन्नस से उपजा युद्ध है.. इस युद्ध की वजह बिलकुल निराधार है।
नितिन त्रिपाठी-
ईरान के साथ क्लासिकल केस हुआ. कल तक न्यूक्लियर वेपन, ताकतवर आर्मी वाले देश का आज हाल यह है कि ट्रम्प अंकिल सुबह से सोशल मीडिया पर मैसेज पर मैसेज डाल रहे हैं कि अमेरिका को पता है ईरान के ख़ामेनेई साहब कहाँ छिपे हैं एक सेकंड में खत्म कर सकते हैं लेकिन फिलहाल मौका दे रहा हूँ. और मौके की शर्त रखी है अनकंडीशनल सरेंडर.
इजरायल के हमलों से ईरान की दो न्यूक्लियर फ़ैसिलिटीज पूरी तरह से तबाह हो गईं. मुख्य प्लांट natanz में सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ. IAEA के ऑब्जरवेशन के अनुसार ईरान के पास लगभग 15,000 centrifuge थे – इसराइल ने सौ प्रतिशत तबाह कर दिए हैं.
ईरान की एकमात्र न्यूक्लियर फैसिलिटी जिसे विशेष नुक़सान नहीं पहुँचा है वह है fordow में पहाड़ की तलहटी में बनाई गई लैब. यद्यपि इजरायल ने इस पर भी इतने बम बरसाये कि छोटा भूकंप भी आ गया, पर आकाश से बम डाल पूरा पहाड़ उड़ा तलहटी को उड़ाने लायक क्षमता वर्तमान विश्व में अमेरिका के पास ही है. इसे उड़ाने के लिए लगभग तीस हज़ार पाउंड का बॉम चाहिए. यह हथियार जिसका नाम जीबीयू 57 एमओपी अमेरिका के पास है जो पहाड़ में 63 मीटर तक घुस कर तबाही मचा सकता है. इस हथियार को अमेरिकन युद्धक जहाज b2 से ले जाया जा सकता है जो एक समय में ऐसे दो हथियार ले जा सकता है. अमेरिका ने अपना नवल शिप तैनात कर दिया है जहाँ से उड़े बी 2 की रेंज में ईरान है.
यद्यपि इससे पूर्व अमेरिका का स्टैंड था कि इस युद्ध में इजरायल अकेले लड़ रहा है पर आज सुबह से ट्रम्प लगातार We कह कर मैसेज डाल रहे हैं अर्थात् इसराइल और अमेरिका साथ हैं. ट्रम्प ये भी कह रहे हैं कि ईरान के एयर स्पेस में हमारा सौ प्रतिशत कब्जा है.
ट्रम्प ने जो यह अपील की कि तेहरान निवासी तेहरान खाली कर दें माना जा रहा है भूमिका बनाई जा रही है ख़ामेनेई पर हमला करने की. अब सीधे बोला रहे हैं कि या तो अनकंडीशनल सरेंडर करो नहीं तो पहाड़ के नीचे वाली लैब भी इडा देंगे और साथ ही ख़ामेनेई पर भी हमला कर सकते हैं.
ईरान के लिए यह काफ़ी अपमानजनक परिस्थितियां बन गई हैं. देखना होगा ईरान इसका मुक़ाबला कैसे करता है.
प्रकाश के रे-
हार्टलैंड अपडेट्स: ग़ाज़ा में आज इसराइल ने लगभग सौ लोगों की हत्या की है. कई दिन से इसराइल ने एक नया तरीक़ा अपनाया है. इसराइल और अमेरिका खाना बाँटने के लिए लोगों को बुलाते हैं और फिर उनका क़त्लेआम होता है.
ईरान में इसराइल ने रिफ़ाइनरियों पर हमला शुरू कर दिया है ताकि ईरानी अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया जा सके.
ईरान ने इसराइल के कुछ अहम जासूसी ठिकानों को निशाना बनाया है. इसराइल में मिलिटरी सेंसरशिप के कारण नुक़सान की ख़बरें सामने नहीं आ रही हैं. कल हाइफ़ा में विदेशी पत्रकारों के साजो-सामान ज़ब्त हुए हैं, ताकि वे ख़बर न दे सकें. चोरी-छुपे कुछ इसराइली वीडियो बना रहे हैं.
इसराइल की ओर से संकेत दिया गया है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हुए पेजर हमले जैसा, पर ज़्यादा गंभीर हमला गुरुवार और शुक्रवार को हो सकता है. साइबर अटैक भी हो रहे हैं.
अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान पर “मदर ऑफ़ ऑल बम” गिरा सकता है, जो ट्रम्प के पहले कार्यकाल में अफ़ग़ानिस्तान में गिराया गया था.
रिजीम चेंज अमेरिका और इज़रायल के एजेंडे में बना हुआ है, पर शायद अरब देश, तुर्की और यूरोपीय देश ऐसा नहीं चाहते- पर यह केवल अनुमान है.
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