नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 8 अगस्त को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। समारोह में 3,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं और प्रधानमंत्री ने नौ छात्रों को स्वर्ण पदक दिए। हालांकि, समारोह से पहले IIT दिल्ली परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठे। अब ‘द टेलीग्राफ’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों को प्रधानमंत्री के सामने किस तरह और कितना सिर झुकाना है, इसकी भी हिदायत दी गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों को यह भी निर्देश दिया गया था कि वैदिक मंत्रों के जाप के दौरान उन्हें खड़ा रहना होगा। समारोह के प्रोटोकॉल को लेकर छात्रों को पहले से निर्देश दिए गए थे। प्रधानमंत्री के हाथों मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए मंच पर जाने और सम्मान ग्रहण करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया।
मोदी की Gen Z से पहली आमने-सामने की बातचीत
यह कार्यक्रम हाल में हुए जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी संख्या में युवाओं के साथ पहली प्रत्यक्ष बातचीत के तौर पर देखा गया। ‘टेलीग्राफ’ ने अपनी रिपोर्ट में एक IIT दिल्ली के फैकल्टी सदस्य के हवाले से कहा कि सरकार शायद हालिया छात्र प्रदर्शनों के बाद युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है और IIT दिल्ली का निमंत्रण इसके लिए एक मंच बना।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय ने IIT दिल्ली के निमंत्रण पर एक महीने से अधिक समय तक फैसला नहीं किया था। बाद में छात्र प्रदर्शनों के दौरान ही प्रधानमंत्री की कार्यक्रम में मौजूदगी की पुष्टि हुई।
कैंपस में भारी सुरक्षा, छात्रों की बार-बार जांच
प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए IIT दिल्ली परिसर में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ कई स्थानों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए और सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई।

छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार आईडी दिखाने और मेटल डिटेक्टर से गुजरने के लिए कहा जा रहा था। कुछ छात्रों के मुताबिक, हॉस्टल से बाहर निकलने या वापस आने के दौरान भी उनके बैग की जांच की गई।
एक छात्र ने ‘टेलीग्राफ’ से कहा कि कैंपस से बाहर नहीं जाने के बावजूद सुरक्षाकर्मी उनके बैग की बारीकी से तलाशी लेते थे। एक अन्य छात्र ने दावा किया कि रात में कैंपस लौट रहे छात्रों से आईडी के साथ-साथ उनके बाहर जाने और देर से लौटने की वजह भी पूछी गई।
बैग और पानी की बोतल तक पर पाबंदी
समारोह में आने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को लेकर भी कई प्रतिबंध लगाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर बैग और पानी की बोतल ले जाने की अनुमति नहीं थी।
छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि अगर अभिभावकों को पानी या छाता तक साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी तो वे समारोह के दौरान कहां और कैसे इंतजार करेंगे।
एक छात्रा ने आरोप लगाया कि दीक्षांत समारोह का पूरा कार्यक्रम प्रधानमंत्री की मौजूदगी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। उनका कहना था कि छात्रों के अभिभावकों को लेकर भी प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा था।
कई सुविधाएं और इमारतें बंद रहीं
सुरक्षा व्यवस्था के तहत IIT दिल्ली प्रशासन ने परिसर में कई प्रतिबंध लगाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, मदर डेयरी और सफल आउटलेट सहित कुछ दुकानें तथा गेट नंबर-2 के पास स्थित नीलकंठ मार्केट समारोह वाले दिन शाम 4 बजे तक बंद रहे।
MSB कंप्यूटर सेंटर, सेंट्रल लाइब्रेरी और प्रयोगशालाओं को भी शुक्रवार शाम से समारोह समाप्त होने तक बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।
मुख्य कार्यक्रम स्थल डोगरा हॉल और मुख्य भवन में मोबाइल फोन, बैग, रिमोट कंट्रोल उपकरण या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इसके लिए कुछ स्थानों पर क्लोकरूम की व्यवस्था की गई थी।
अभिभावकों को लेकर भी छात्रों की नाराजगी
एक छात्रा ने ‘टेलीग्राफ’ से कहा कि पहले चरण में डिग्री वितरण की उम्मीद कर रहे कई छात्रों के अभिभावकों ने अपनी वापसी की टिकटें पहले से बुक कर रखी थीं। लेकिन कार्यक्रम की व्यवस्था में बदलाव के कारण उन्हें अपने बच्चों को डिग्री लेते हुए देखने का अवसर नहीं मिल सका।
छात्रों का आरोप था कि कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण के समय अभिभावकों के प्रवेश को लेकर भी पाबंदियां थीं।
‘राजनीतिक कार्यक्रम जैसा लग रहा था’
कुछ छात्रों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जाहिर की। एक छात्र ने इसे केंद्र सरकार की छवि सुधारने की कोशिश बताया। वहीं, एक अन्य छात्र के मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि दीक्षांत समारोह छात्रों के बजाय एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में बदल गया है।
हालांकि, इन आरोपों पर IIT दिल्ली प्रशासन की ओर से तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ‘टेलीग्राफ’ ने संस्थान के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की शिकायतों पर प्रतिक्रिया मांगी थी।
समारोह में क्या हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह के मुख्य अतिथि थे। 3,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं और नौ छात्रों को प्रधानमंत्री ने स्वर्ण पदक दिए। समारोह में वैदिक मंत्रों का भी जाप हुआ।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों से बदलती तकनीक के दौर में लगातार सीखते रहने, जिज्ञासा बनाए रखने और अपने शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों के योगदान को याद रखने की अपील की। उन्होंने तकनीकी बदलावों के बीच युवाओं को खुद को लगातार अपडेट करते रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।
सबसे बड़ा सवाल
IIT दिल्ली जैसा प्रतिष्ठित संस्थान जहां दीक्षांत समारोह छात्रों की वर्षों की मेहनत और उपलब्धियों का उत्सव होता है, वहां प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर किए गए इंतजामों और छात्रों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने बहस जरूर खड़ी कर दी है।
खास तौर पर मेडल लेने वाले छात्रों को प्रधानमंत्री के सामने कितना सिर झुकाना है और वैदिक मंत्रों के दौरान खड़े रहने जैसे निर्देशों का सामने आना इस बहस को और तेज करता है।
हालांकि, इन निर्देशों को लेकर ‘टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट में छात्रों के हवाले से जानकारी दी गई है और इसे IIT दिल्ली की ओर से किसी आधिकारिक बयान के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को उसी संदर्भ में देखना जरूरी है।


