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OpenAI की डेटा डील: TOI और इंडियन एक्सप्रेस ही क्यों?

OpenAI and The Indian Express logos displayed side by side on a white background.

अभिषेक पाराशर-

ChatGPT बनाने वाली इस कंपनी ने भारत के दो सबसे बड़े मीडिया समूहों इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ग्रुप के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस डील को देखकर एक सवाल यह भी आ सकता है कि आखिर OpenAI ने इन्हीं दो संस्थानों को क्यों चुना?

इसकी सबसे बड़ी वजह है, इनकी विश्वसनीयता, पत्रकारिता का लंबा इतिहास और एक बेहद डायवर्सिफाइड कंटेंट पाइपलाइन। खास बात यह है कि एक्सप्रेस और टाइम्स, दोनों ही समूहों के पास सामान्य खबरों वाले मजबूत अखबारों के साथ-साथ देश के टॉप ‘बिजनेस डेली’ भी हैं और भाषाई विविधता भी है। अगर हम अन्य विकल्पों की बात करें, तो अंग्रेजी बिजनेस जर्नलिज्म के लिए ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ एक बेहतरीन नाम हो सकता था। लेकिन, वह अपेक्षाकृत नया अखबार है, जिसकी आर्काइव कैपेसिटी सीमित है और वह इन दोनों समूहों के मुकाबले कम डायवर्सिफाइड है। इसी तरह, ‘इंडिया टुडे’ समूह भी ब्रांड वैल्यू के लिहाज से इसमें फिट बैठता, लेकिन उनके पास एक मजबूत ‘डेली पब्लिकेशन’ (रोजाना अखबार) की वह ताकत नहीं है जो AI को लगातार रियल-टाइम न्यूज दे सके।

भविष्य में अन्य भारतीय मीडिया संस्थान भी ऐसी पार्टनरशिप कर सकते हैं, लेकिन स्केल और अहमियत के मामले में वे इन दोनों ऐतिहासिक साझेदारियों की बराबरी शायद ही कर पाएं।

इस करार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि AI के दौर में यूजर्स को भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी। आमतौर पर चैटबॉट्स यह साफ तौर पर नहीं बताते कि वे जानकारी कहां से ले रहे हैं, लेकिन इस तरह की पार्टनरशिप से यूजर्स को ओरिजिनल सोर्स का पता रहेगा, जिससे फेक न्यूज या आधी-अधूरी जानकारी पर रोक लगेगी।

ये तो हुई आम बात, जो हम सभी को समझ में आई। लेकिन यह साझेदारी बस इतने तक सीमित नहीं है।

AEO का नया दौर

अब तक डिजिटल मीडिया और वेबसाइट्स एसईओ (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) पर काम करती थीं, जिसका मकसद गूगल जैसे सर्च इंजन में अपनी वेबसाइट के लिंक्स को सबसे ऊपर (रैंक) लाना होता था।

लेकिन अब दुनिया AEO (आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन) की तरफ बढ़ रही है। AEO का मतलब है अपने कंटेंट को इस तरह तैयार करना (या AI कंपनियों के साथ ऐसे समझौते करना) कि जब यूजर किसी AI चैटबॉट (जैसे ChatGPT, Perplexity या Google Gemini) से कोई सवाल पूछे, तो वह बॉट जवाब बनाते समय आपके ही कंटेंट को मुख्य सोर्स के तौर पर इस्तेमाल करे और आपका लिंक दे।

अब यूजर्स गूगल पर सर्च करके 10 नीले लिंक्स पर क्लिक करने के बजाय, AI से सीधे सटीक जवाब मांगते हैं। इस करार से इंडियन एक्सप्रेस का कंटेंट सीधे उन ‘जवाबों’ का हिस्सा बनेगा। हैलूसिनेशन यानी गलत जानकारी देने की आदत एआई मॉडल्स की समस्या है और इससे बचने के लिए प्रामाणिक डेटा की जरूरत होती है। न्यू कंपनियों के साथ सीधे करार करके AI अपनी विश्वसनीयता बढ़ा रहा है।

ट्रैफिक का नया जरिया

जब ChatGPT इंडियन एक्सप्रेस की खबर का सोर्स और लिंक देगा, तो जो पाठक उस खबर को विस्तार से पढ़ना चाहेंगे, वे लिंक पर क्लिक करके वेबसाइट पर जाएंगे। यह SEO से मिलने वाले ट्रैफिक का एक मजबूत विकल्प बनेगा। बल्कि एआई सर्च की वजह से जो नुकसान हुआ है, उसे एक हद तक भरने में मदद मिलेगी।

सिर्फ विज्ञापनों पर निर्भर रहने के बजाय, पब्लिशर्स अब अपना डेटा (आर्काइव और लाइव न्यूज) AI कंपनियों को ट्रेनिंग के लिए देकर सीधे तौर पर कमाई कर रहे हैं। इससे पहले द टाइम्स ग्रुप, जिसे बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) के नाम से भी जाना जाता है, उसने भी ओपन एआई के साथ साझेदारी की है।

तो क्या अब Gemini इन खबरों के लिंक नहीं देगा?

जेमिनाई के पास गूगल सर्च की ताकत है। जब आप जेमिनाई से कोई ताजा खबर पूछते हैं, तो वह गूगल सर्च इंजन के जरिए इंटरनेट को खंगालता है, इंडियन एक्सप्रेस या टाइम्स ऑफ इंडिया की पब्लिक वेबसाइट्स को पढ़ता है और अपने जवाब के अंत में या बीच में उनका लिंक दे देता है।

जब तक मीडिया हाउस गूगल के क्रॉलर को ब्लॉक नहीं करते (जो वे कभी नहीं करेंगे, क्योंकि उनकी वेबसाइट का सबसे ज्यादा ट्रैफिक आज भी गूगल सर्च से ही आता है), तब तक जेमिनाई उनके लिंक्स देता रहेगा। फिर ओपन एआई के करार में क्या अलग है?

जवाब है, डेटा लाइसेंसिंग

ओपन एआई ने जो करार किया है, वह मुख्य रूप से डेटा लाइसेंसिंग और मॉडल ट्रेनिंग के लिए है। इसके दो बड़े मतलब हैं।

ओपन एआई अब इन अखबारों के दशकों पुराने डेटा, आर्काइव और प्रीमियम कंटेंट का इस्तेमाल अपने अगले मॉडल्स (जैसे GPT-5) को ट्रेन करने के लिए कानूनी रूप से कर सकेगा। जेमिनाई बिना समझौते के उनके आर्काइव का इस तरह ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता (कॉपीराइट कानूनों के कारण)।

चैट जीपीटी के जवाबों में इन अखबारों का एक खास, स्ट्रक्चर्ड और अधिक प्रमुखता वाला विजेट/लिंक दिखेगा, जो सीधे उनके एपीआई या डेटाबेस से जुड़ा होगा।

Gemini के सर्च आंसर यानी AI Overviews पर इसका क्या असर होगा?

हालांकि जेमिनाई लिंक देना बंद नहीं करेगा, लेकिन ओपन एआई के इस कदम से गूगल और जेमिनाई पर कुछ बड़े असर जरूर पड़ेंगे। मीडिया हाउस सालों से गूगल से शिकायत कर रहे हैं कि गूगल अपने AI (जेमिनाई और AI Overviews) में उनकी खबरें दिखाकर यूजर्स को वहीं जवाब दे देता है, जिससे उनका ट्रैफिक गिरता है और गूगल उन्हें इसके पैसे भी नहीं देता।

अब चूंकि ओपन एआई (मेरी समझ के मुताबिक) ने पैसे देकर करार किया है, तो पब्लिशर्स गूगल पर दबाव बनाएंगे कि अगर ओपन एआई हमें डेटा के पैसे दे सकता है, तो गूगल क्यों नहीं?

अब तक न्यूज सर्च करने का मतलब सिर्फ गूगल होता था। लेकिन अब ओपनएआई अपने सर्च जीपीटी फीचर को मज़बूत कर रहा है। जब चैट जीपीटी के पास भारत की प्रामाणिक खबरों का सीधा और कानूनी एक्सेस होगा, तो जेमिनाई को न्यू और करेंट अफेयर्स के मामलों में कड़ी टक्कर मिलेगी।

चूंकि चैटजीडीपी को इन अखबारों का सीधा, स्ट्रक्चर्ड डेटा फीड किया जाएगा, इसलिए हो सकता है कि भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था या खबरों पर ChatGPT के जवाब जेमिनाई के मुकाबले अधिक सटीक हों और वह गलतियां (हैलूसिनेशन) कम करे।

जेमिनाई आपको खबरें और लिंक्स देना जारी रखेगा, लेकिन ओपन एआई ने इन मीडिया घरानों के साथ सीधे हाथ मिलाकर गूगल के एकाधिकार को एक बहुत बड़ी चुनौती दे दी है। अब गूगल को भी अपने AI को बेहतर बनाने और कानूनी विवादों से बचने के लिए भविष्य में भारतीय पब्लिशर्स के साथ ऐसे पेड एग्रीमेंट करने पड़ सकते हैं।

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