रश्मि त्रिपाठी-
जब Shark tank शुरू हुआ था तो मुझे बहुत interesting लगा था। धीरे धीरे मुझे अशनीर ग्रोवर बाकी जजों से ज्यादा पसंद आने लगे और प्रोग्राम भी।
तो मैं हमेशा यह प्रोग्राम देखती थी। अशनीर के पसंद आने के कारण यह थे कि वे कम बोलते थे और व्यंग्यात्मक में बोलते थे। खरी-खरी बोलते थे। उन पर उन दिनों बहुत मीम बनते थे।
“भाई क्या कर रहा है तू” तो बहुत वायरल हुआ था। जैसे कोई फिल्मी डायलॉग हो।
बाद के सीजन में जब वे शार्क टैंक से हटा दिए गए (Bharatpay से भी) तो मेरा भी ये प्रोग्राम देखना बंद हो गया।
हालांकि पिछले महीने वे समय रैना के कार्यक्रम में बैठे थे लेकिन कम्फ़र्टेबल नहीं दिख रहे थे।
बहरहाल अशनीर ने 40 की उम्र में फिर से 0 से शुरू किया। क्यों कि उनका कहना था कि कंपनी छीन सकते हो, टाइटल छीन सकते हो, पर स्किल और हिम्मत नहीं छीन सकते।
और आजकल वे अपनी कंपनी Third Unicorn पर फोकस कर रहे हैं। उनकी कंपनी दो फिनटेक प्रोडक्ट्स चला रही है – फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप CrickPe और मेडिकल लेंडिंग ऐप ZeroPe।
वे Third Unicorn के फाउंडर हैं। (इसके पहले वे BharatPe और Grofers में थे)
को-फाउंडर, अशनीर की पत्नी माधुरी पहले BharatPe में Head of Controls थीं। एक और को फाउंडर असीम घावरी अशनीर के कॉलेज फ्रेंड हैं।
कंपनी 6 जुलाई 2022 को रजिस्टर हुई थी। अशनीर ने इसे खुद की पूंजी से बनाया है। अर्थात VC से दूर वाला स्टार्टअप बताया था। VC मतलब Venture Capitalist समझ लीजिए साहूकार का मॉडर्न वर्जन होता है।
जैसे साहूकार पैसा देता है फिर या तो ब्याज लेता है या और मुनाफे में हिस्सा लेता है, वैसे ही VC स्टार्टअप्स को करोड़ों रुपये देते हैं और बदले में कंपनी में हिस्सेदारी ले लेते हैं।
BharatPe को भी Sequoia, Coatue जैसे बड़े VC ने पैसा दिया था। लेकिन बाद में उन्हीं VC से अशनीर की लड़ाई हो गई।
इसीलिए अशनीर ने अपनी नई कंपनी Third Unicorn के लिए कहा था कि मुझे VC का पैसा नहीं चाहिए, मैं खुद की कमाई से कंपनी बनाऊंगा।
चूंकि अशनीर मीठा बोलना नहीं जानते हैं। इसलिए ही Shark Tank पर किसी का आइडिया बकवास लगता था तो मुंह पर बोल देते थे, “ये तो बिल्कुल बकवास है।”
इसी तरह जब BharatPe वालों से लड़ाई हुई तो चुप नहीं बैठ कर सीधे कोर्ट चले गए कि मेरी कंपनी है, मैं लड़ूंगा। और अब जबकि सरकार ने UPI पर चार्ज की बात छेड़ी तो फिर खरी-खरी – कि “ये सब टैक्स वसूलने का नया तरीका है।”
और अशनीर इसलिए भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। क्यों कि कल जब उनसे UPI को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कह दिया।
“अगर सुभाष चंद्रा के 22,000 करोड़ रुपये माफ नहीं किए जाते, तो भारत में UPI अगले 20 साल तक फ्री चलता।” आज जब खुलकर सच बोलने वाले बहुत कम बचे हैं, तो निश्चित ही अशनीर बिल्कुल अलग दिख रहे हैं।


