
बाराबंकी। फतेहपुर तहसील क्षेत्र में करीब 17 वर्षों से संचालित प्रेस क्लब फतेहपुर के नाम और पहचान को लेकर विवाद सामने आया है। पुराने संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कुछ लोगों पर संस्था के नाम का कथित रूप से इस्तेमाल कर नया संगठन संचालित करने तथा दस्तावेजों के माध्यम से पुराने संगठन के नाम और टाइटल का उपयोग करने का आरोप लगाया है।
आरोप है दैनिक जागरण के पत्रकार नलिन कुमार निगम संगठन के अध्यक्ष व दैनिक भास्कर के पत्रकार सचिन रावत संगठन महामंत्री, सर्वेश श्रीवास्तव उपाध्यक्ष के द्वारा दस्तावेजों के सहारे पुराने संगठन फतेहपुर प्रेस क्लब के टाइटल का प्रयोग करके नया संगठन बनाया। इसके बाद 17 वर्षों से संचालित फतेहपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष विजय कुमार जैन, के के जैन, राजेश जायसवाल, मनजीत निगम, राजीव नयन तिवारी, गणेश शंकर मिश्रा, प्रियंक शर्मा, यादवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य सभी पदाधिकारी सदस्यों ने उप जिलाधिकारी फतेहपुर कार्तिकेय सिंह को प्रार्थना पत्र देकर कार्यवाही की माँग किया है।


दूसरा पक्ष-
इस पूरे प्रकरण पर दूसरे पक्ष का कहना है कि जो पुरानी संस्था है उसमें किसी तरह का कोई दुरुपयोग नहीं किया गया है। उसका नाम फतेहपुर प्रेस क्लब है जबकि अब गठित हुई संस्था प्रेस क्लब फतेहपुर-जनपद बाराबंकी है।
दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार नलिन कुमार निगम ने भड़ास4मीडिया से हुई बातचीत में कहा कि, “मैं पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं। दैनिक जागरण में मेरी सैकड़ों खबरें बायलाइन प्रकाशित हुई हैं, मेरे बैंक अकाउंट में प्रत्येक माह मानदेय आ रहा है। आप गूगल, चैट GPT में जाकर प्रेस क्लब फतेहपुर सर्च करें वास्तविकता आपको पता चल जाएगी।”
दैनिक भास्कर के जर्नलिस्ट सचिन रावत ने भड़ास को बताया कि, “नाम को लेकर जो उहापोह की स्थिति बनी हुई वह बिना सिर पैर की है। वह लोग सिर्फ एक पक्ष की बात भेजकर उल्टी सीधी खबरें छपवाकर हमारी प्रतिष्ठा धुमिल करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने भड़ास से अपील की है कि प्रकरण में एक पक्ष ही नहीं बल्कि दोनों पक्षों की बातों को स्थान दिया जाए।”
बहरहाल, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



Sachin Kumar
September 19, 2026 at 5:27 pm
यशवंत जी,
मैं भड़ास4मीडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित खबरों को हमेशा गंभीरता से पढ़ता रहा हूं और यह विश्वास करता था कि वहां प्रकाशित खबरें तथ्यपरक, सत्य एवं निष्पक्ष होती हैं। लेकिन हाल ही में प्रकाशित इस खबर को पढ़कर मुझे बेहद दुख और मानसिक पीड़ा हुई।
मेरा कहना है कि खबर प्रकाशित करने से पहले केवल एक पक्ष को आधार बनाकर सम्मानित पत्रकारों के संबंध में इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। खबर में मेरे संबंध में यह लिखा गया है कि मैं दैनिक भास्कर का पत्रकार नहीं हूं। इस कथन से मेरी सामाजिक एवं व्यावसायिक छवि प्रभावित हुई है और मैं इससे काफी आहत हूं।
मैं पिछले 24 महीनों से दैनिक भास्कर संस्थान के साथ जुड़कर पत्रकारिता का कार्य कर रहा हूं। संस्थान द्वारा जारी मेरा परिचय पत्र तथा मुझे प्रतिमाह प्राप्त होने वाले मानदेय से संबंधित प्रमाण मेरे पास उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर मैं ये दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता हूं।
आपसे विनम्र आग्रह है कि इस मामले में मेरा पक्ष भी प्रकाशित किया जाए और खबर में मेरे संबंध में प्रकाशित उक्त तथ्य का उचित खंडन प्रकाशित करते हुए स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि मेरी प्रतिष्ठा को हुई क्षति की भरपाई हो सके।
आशा है कि आप निष्पक्षता और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए मेरे पक्ष को उचित स्थान देंगे।