
लंदन। भारत के चर्चित क्रिमिनल लॉयर विजय अग्रवाल को लेकर ब्रिटेन से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक अग्रवाल को लंदन के बेहद पॉश इलाके Mayfair में ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों ने कथित तौर पर हिरासत में लिया है। उनके खिलाफ ब्रिटेन में जरूरी वर्क परमिट के बिना पेशेवर गतिविधियां करने और अन्य कथित इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन की जांच की बात कही जा रही है।
मामला उस समय और गंभीर सवाल खड़े करता है जब उसी Mayfair प्रॉपर्टी में कथित निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि नकदी कितनी थी, किसकी थी और उसका स्रोत क्या था—इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से भी फिलहाल ऐसा कोई सार्वजनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जिससे विजय अग्रवाल की गिरफ्तारी या हिरासत की स्वतंत्र पुष्टि हो सके।
तीन दिन से हिरासत में होने का दावा

WIC News और LawBeat की 18 अगस्त 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, विजय अग्रवाल पिछले करीब तीन दिनों से ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों की हिरासत में बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि मामला London के Mayfair स्थित उस प्रॉपर्टी से जुड़ा है, जहां अग्रवाल कथित तौर पर रह रहे या पेशेवर गतिविधियां कर रहे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक आरोप यह है कि अग्रवाल ब्रिटेन में आवश्यक वर्क परमिट के बिना पेशेवर काम कर रहे थे। इसके अलावा कुछ अन्य इमिग्रेशन नियमों के संभावित उल्लंघन की भी जांच किए जाने की बात कही गई है।
बताया गया है कि यह मामला Mayfair की संबंधित प्रॉपर्टी के मकान मालिक की ओर से मई में की गई कथित शिकायत के बाद ब्रिटिश अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद अधिकारियों ने अग्रवाल की ब्रिटेन में गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।
Mayfair की प्रॉपर्टी में भारी नकदी मिलने का दावा
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर बरामद हुई बड़ी मात्रा में नकदी है।
रिपोर्टों के मुताबिक जब संबंधित प्रॉपर्टी में निरीक्षण किया गया, तब वहां विजय अग्रवाल के साथ तीन से चार जूनियर वकील भी मौजूद थे। इसी दौरान बड़ी मात्रा में कैश मिलने की बात कही गई है।
हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि नकदी की वास्तविक मात्रा कितनी थी, उसका मालिक कौन था और वह रकम वहां क्यों रखी गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इन सवालों का कोई प्रमाणित जवाब नहीं दिया गया है।
कौन हैं विजय अग्रवाल?
विजय अग्रवाल भारत के चर्चित क्रिमिनल लॉयर्स में गिने जाते हैं और कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक तथा आर्थिक अपराध मामलों में पैरवी कर चुके हैं।
उनका नाम विशेष रूप से भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी की कानूनी पैरवी से जुड़ा रहा है। Bombay High Court के उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी विजय अग्रवाल को मेहुल चोकसी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता के रूप में दर्ज किया गया है। 21 सितंबर 2023 के Bombay High Court के एक आदेश में स्पष्ट रूप से “Mr. Vijay Aggarwal, Advocate” को मेहुल चोकसी की ओर से पेश वकीलों में दर्ज किया गया है।
चोकसी से जुड़े मामलों में अग्रवाल की पैरवी भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में चोकसी की कानूनी स्थिति से जुड़े घटनाक्रमों के दौरान भी चर्चा में रही है। WIC News और LawBeat के मुताबिक अप्रैल 2025 में बेल्जियम में चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भी अग्रवाल ने उसके मामले में कानूनी प्रतिनिधित्व किया था।
चोकसी और नीरव मोदी का PNB घोटाला कनेक्शन
मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर भारतीय एजेंसियों ने Punjab National Bank से जुड़े करीब 1.8 अरब डॉलर के घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप लगाए हैं। दोनों इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
चोकसी से जुड़े मामलों में विजय अग्रवाल लंबे समय से उसकी कानूनी टीम का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि लंदन में उनके खिलाफ सामने आई कथित इमिग्रेशन कार्रवाई और नकदी मिलने की खबर ने भारतीय कानूनी तथा कारोबारी हलकों में भी सवाल खड़े किए हैं।
क्या कैश का चोकसी से कोई संबंध है?
कुछ रिपोर्टों में विजय अग्रवाल की कथित तौर पर मेहुल चोकसी की “undisclosed” या कथित “black money” से जुड़ी भूमिका के बारे में सवाल उठाए गए हैं। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच एजेंसी का बयान सामने नहीं आया है जो इस आरोप को प्रमाणित करता हो। LawBeat ने भी इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं माना है।
इसलिए अभी यह कहना कि Mayfair में मिली कथित नकदी मेहुल चोकसी की थी, या विजय अग्रवाल उसका प्रबंधन कर रहे थे, तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि कहां है?
WIC News और LawBeat दोनों ने अपनी रिपोर्टों में स्पष्ट किया है कि फिलहाल UK Home Office, Border Force, Metropolitan Police या किसी ब्रिटिश अदालत का कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है, जिससे विजय अग्रवाल की पहचान, गिरफ्तारी अथवा हिरासत की स्वतंत्र पुष्टि हो सके।
कई सवाल अब भी अनुत्तरित
इस घटनाक्रम में कई सवाल हैं जिनके जवाब आधिकारिक जांच या दस्तावेज सामने आने के बाद ही मिलेंगे—
क्या विजय अग्रवाल के पास ब्रिटेन में पेशेवर काम करने की वैध अनुमति थी?
अगर नहीं थी तो वह कितने समय से वहां पेशेवर गतिविधियां कर रहे थे?
Mayfair की प्रॉपर्टी के मकान मालिक ने वास्तव में किस आधार पर शिकायत की थी?
वहां मौजूद तीन-चार जूनियर वकील कौन थे?
कथित तौर पर बरामद नकदी कितनी थी?
नकदी किसकी थी और उसका स्रोत क्या था?
क्या ब्रिटिश अधिकारियों की कार्रवाई केवल इमिग्रेशन उल्लंघन तक सीमित है या वित्तीय जांच भी चल रही है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस मामले का मेहुल चोकसी या उसके वित्तीय मामलों से कोई संबंध है?
इनमें से किसी भी सवाल का आधिकारिक उत्तर अभी उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट यही
विजय अग्रवाल की पेशेवर पहचान, मेहुल चोकसी जैसे हाई-प्रोफाइल आरोपी की पैरवी और London के Mayfair जैसे बेहद महंगे इलाके में कथित हिरासत—इन तीनों चीजों ने इस घटनाक्रम को असाधारण रूप से चर्चित बना दिया है।
भड़ास4मीडिया इस मामले में ब्रिटिश अधिकारियों, अदालत अथवा विजय अग्रवाल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।


