मुंबई: एचडीएफसी बैंक ने मीडिया स्टेटमेंट जारी कर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के उस फैसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है, जो श्री सुभाष चंद्रा की ऋण चुकौती योजना (रेजोल्यूशन प्लान) से संबंधित है। बैंक ने कहा कि उक्त एनसीएलटी मामले में एचडीएफसी बैंक का स्वीकृत (अडमिटेड) दावा कुल बताए गए दावे की राशि का मात्र 3.2 प्रतिशत ही था। बैंक ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा पहले एचडीएफसी लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी, जिसे बाद में एचडीएफसी बैंक को विरासत में मिला।
स्टेटमेंट में आगे कहा गया कि एचडीएफसी बैंक ने इस रेजोल्यूशन का विरोध किया था और उसके खिलाफ वोट भी डाला था। हालांकि, यह योजना बहुमत से मंजूर हो गई। बैंक अब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में अपील दायर करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। एचडीएफसी बैंक का यह बयान एनसीएलटी के फैसले के बाद आया है, जिसमें सुभाष चंद्रा से जुड़े ऋण मामले में रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी गई थी। बैंक ने अपने सीमित दावे और विरोध को रेखांकित करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है।
मिथिलेश धर-
NCLT के फैसले के खिलाफ एचडीएफसी बैंक NCLT में ही अपील दायर करने की तैयारी में है। बैंक ने शुरू से ही वोटिंग प्रक्रिया और उनमें शामिल कंपनियों का विरोध किया था। HDFC का 688.56 करोड़ रुपए का मामला है और उन्हें 19.83 लाख देकर किनारे कर दिया गया।
बीजेपी समर्थित सोशल मीडिया के धुरंधर सुभाष चंद्रा के पक्ष में समर्थन दे रहे हैं कि उन्होंने लोन थोड़ी ना लिया था, वे तो बस गारंटर थे। देखिए बात तो सही है, मामला 170 करोड़ रुपए की देनदारी से शुरू हुआ था। लेकिन चंद्रा साहब ने इतना महीन खेला है कि ये बात तो आपको न मीडिया बताएगी, न तो ये पब्लिकली होगा। ये सब वेल प्लैंड था।
आपको थोड़ा डीप में ले चलते हैं। दरअसल जब मामले की सुनवाई NCLT के तहत हो रही थी तो तब Creditors ने अपना बहुमत सुभाष चंद्रा को दिया जो Insolvency process की लागत के पक्ष में था, मतलब 6 करोड़ 25 लाख रुपए चुकाने वाली बात। यानी Creditors को हर ₹100 के दावे पर करीब 3 पैसे मिलेंगे। इसका मतलब लगभग 99.97% Haircut। Haircut का मतलब है कि कर्जदाता अपनी मूल रकम का बड़ा हिस्सा छोड़ देता है और जितना मिल सकता है, उतना लेकर मामला खत्म करता है। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है। LIC Housing Finance ने इसका विरोध किया जिनका 1322 करोड़ रुपए फंस रहा था। लेकिन उनके ऑब्जेक्शन को दरकिनार कर दिया क्योंकि कर्ज वाली ज्यादातर कंपनियां चंद्रा के पक्ष में थीं। अब मजेदार बात देखिए और उन कंपनियों के बारे में जानिए जो करोड़ों रुपए का नुकसान सहने को तैयारी हो गईं। सोचिए सुनवाई के दौरान NCLT के सदस्य भी इस पक्ष में नहीं थे।
World Crest Advisors, Lemonade Capital Advisors, Corpcall Capital Advisors, Veena Investments और Direct Media Distribution Ventures जैसे Creditors ने सुभाष चंद्रा का साथ दिया। इन पांचों के claims मिलाकर करीब ₹13,406.57 करोड़ थे।
इन पांचों को लेकर कुछ बैंकों ने NCLT में गंभीर आपत्तियां उठाई थीं। उनका आरोप था कि ये कंपनियां सुभाष चंद्र से जुड़ी/associate entities हैं और इन्हें Creditor बनाकर वोटिंग में शामिल किया गया, जिससे Repayment plan को मंजूरी दिलाने में मदद मिली। इन पांचों के पास मिलाकर लगभग 61.78% वोटिंग शेयर था। एलआईसी हाउंसिंग के अलावा HDFC, RBL और IndusInd Bank ने इसका विरोध तो किया। लेकिन हुआ कुछ नहीं।
बसंत शर्मा कभी Veena Investments के डायरेक्टर थे जो पहले सुभाष चंद्रा कंपनी Essel Group entities की कंपनियों जैसे Direct Media Distribution और Pricomm Media Distribution के भी निदेशक थे। ऐसे में वे भला सुभाष चंद्रा के पक्ष में वोट क्यों नहीं देंगे। यही नहीं, अभी और देखिए, यही बसंत शर्मा World Crest Advisors LLP के पार्टनर भी थे। इसके दूसरे पार्टनर अभिषेक बंसल भी सुभाष चंद्र की कंपनी से जुड़े रहे हैं। 2018 में तो World Crest Advisors कंपनी Essel Group का हिस्सा थी।
Lemonade Capital Advisors और Corpcall Capital Advisors के भी संबंध Essel Group से रहे हैं। कैपिटल के पार्टनर रविंद्र और Corpcall के विजय भुजभल भी सुभाष चंद्रा की कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। सुभाष चंद्रा ने खुद से जुड़ी ही कंपनियों को कर्ज दिलाया, वे चुका नहीं पाईं, कंपनियाँ डिफॉल्ट हुईं। कर्ज देने वाली कंपनियों ने गारंटर को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन सत्ता की गोदी के लाडले सुभाष चंद्रा ने बड़ी चालाकी से ऐसा चक्रव्यूह बुना कि 22 हजार करोड़ रुपए घूमते-घूमते 6 करोड़ 25 लाख हो गया।


