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आईआईएमसी अमरावती में जब पत्रकारिता छात्र ही नहीं हैं तो सरकार कैंपस बनाने के लिए करोड़ों रुपये क्यों स्वाहा कर रही है?

Headline about Amravati IIMC getting Rs 82 crore for campus with photo of a construction site and boundary wall at Badnera, Amravati
Newspaper page with a large headline about Amravati IIMC receiving Rs 82 crore, followed by a three-column article layout.

आईआईएमसी अमरावती में हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई पर लगा ब्रेक! मुश्किल से चार रोज पहले ही यह खबर भड़ास में प्रकाशित हुई थी। कई अन्य मीडिया संस्थानों ने भी छापा था, जिसका हवाला हमने अपनी खबर में दिया था। अब ताजा जानकारी है कि अमरावती के नए कैंपस के लिए सरकार करोड़ों रुपये आवंटित कर रही है।

जानकारी के अनुसार, अमरावती- केंद्र सरकार के अधीन भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) अमरावती के बड़नेरा में गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता शिक्षा के लिए नया कैंपस बना रहा है। यह 82 करोड़ रुपये की परियोजना 15 एकड़ क्षेत्र में बन रही है।

हालांकि, मेगा कैंपस का निर्माण चल रहा है, लेकिन संस्थान में गिरती छात्र संख्या, बंद किए गए भाषा पत्रकारिता पाठ्यक्रमों, शिक्षण गुणवत्ता और स्टाफिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। बेहद कम नामांकन के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना ‘सफेद हाथी’ बनने का खतरा पैदा कर रही है।

वर्तमान में आईआईएमसी अमरावती संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय (एसजीबीएयू) के कैंपस से संचालित हो रहा है। इस साल हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम में शून्य प्रवेश मिले और इसे बंद कर दिया गया।

वहीं, अंग्रेजी पत्रकारिता पाठ्यक्रम में 30 सीटों के मुकाबले सिर्फ 8 छात्र हैं, जबकि मराठी पत्रकारिता पाठ्यक्रम में 30 सीटों के मुकाबले 10 छात्र हैं।

कुल मिलाकर पूर्ण क्षमता 90 के मुकाबले सिर्फ 18 छात्र हैं। इतनी कम संख्या के साथ सवाल उठता है कि नए भवन, कक्षाएं, स्टूडियो और हॉस्टल कभी पूर्ण क्षमता से उपयोग में आ पाएंगे या नहीं।

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