2873 कथित अपराधियों के खिलाफ एफआईआर लिखकर कार्रवाई करने के लिए सरकार तैयार है क्योंकि इन लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लिया। दूसरी ओर सोफिया कुरैशी के खिलाफ बोलने वाले मंत्री हों या लोकसभा अध्यक्ष उनकी पैरवी एसजी कर रहे हैं। राहुल गांधी के कहने पर भी कथित दोषियों के खिलाफ एफआईआर नहीं लिखी गई लेकिन उनके खिलाफ हो गई।
संजय कुमार सिंह
छुआछूत मामले में राहुल गांधी की शिकायत, सरकार की भूमिका पर आज मेरे 10 में से आठ अखबारों में पहले पन्ने पर कोई खबर नहीं है। देशबन्धु में यह खबर लीड है। फ्लैग शीर्षक है, भाजपा के लिए मुसीबत बना हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण कांड’। मुख्य शीर्षक है, दलितों के अपमान पर आर-पार के मूड में कांग्रेस। उपशीर्षक है, दोषियों पर कार्रवाई व राहुल के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग। द हिन्दू में यह सिंगल कॉलम की खबर है। कांग्रेस ने कहा है कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर से भाजपा की जातिवादी मनःस्थिति का पता चलता है। दि एशियन एज में यह खबर राष्ट्रीय खबरों के पन्ने पर अंदर पेज 3 पर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। पेज 3 की खबर का शीर्षक है, राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर को लेकर कांग्रेस ने भाजपा को निशाना बनाया : (कहा) आवाज दबाने की कोशिश। भाजपा ने विपक्ष के नेता के खिलाफ मामले का समर्थन किया, कहा इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। कहने की जरूरत नहीं है कि विपक्ष के नेता की भूमिका तय करना सरकार या सत्तारूढ़ दल का काम नहीं है। समस्या यह है कि मीडिया घटनाओं (पुलिस की निष्क्रियता) रिपोर्ट नहीं करता है और सिर्फ सरकारी पक्ष की रिपोर्ट हो रही है। आज देशबन्धु अपवाद है।
मणिपुर भी महत्वपूर्ण
आज की खबरों में मणिपुर भी महत्वपूर्ण लग रहा है। द हिन्दू में तीन कॉलम की खबर का शीर्षक है, उपमुख्यमंत्री, 8 विधायकों ने सरकार (भाजपा) छोड़ने की धमकी दी। इसके साथ छपी एक छोटी सी खबर का शीर्षक है, अनजाने बंदूकधारियों ने तीन कुकी ग्रामीणों की हत्या की। दि एशियन एज की खबर है, गृहमंत्री अमित शाह के समीक्षा बैठक की अध्यक्षता के बाद मणिपुर में जनगणना का काम टला। यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में भी दो कॉलम में है। अंदर और खबर होने की भी सूचना है। कुल मिलाकर, सरकार ने ‘एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) पहले‘ की मांग मान ली है। इसके साथ छपी सिंगल कॉलम की एक खबर के अनुसार, जनगणना से पहले एनआरसी को अद्यतन करने की मांग के समर्थन में चल रही टॉर्च लाइट विजिल हिसंक हो गई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर पत्थर चलाए। जवाब में इन लोगों ने आंसू गैस के गोले दागे। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, एक गांव में संदिग्ध उग्रवादियों की गोलीबारी में दो महिलाओं समेत तीन नागरिकों की मौत हो गई। उग्रवादियों ने कई घरों में आग भी लगा दी। यह खबर देशबन्धु में भी है। जाहिर है, मणिपुर का मामला बड़ा लगता है लेकिन खबरें छोटी-छोटी और अलग-अलग छपी हैं।
आज की तीसरी बड़ी खबर दिल्ली में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जाना है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार इसमें दिल्ली सबसे आगे है, 33 प्रतिशत नाम निकाले गए हैं। देशबन्धु में यह खबर टॉप पर है। इसके अनुसार, दिल्ली में 47 लाख और महाराष्ट्र में दो करोड़ से ज्यादा नाम कटे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, पुरुषों के नाम ज्यादा कटे हैं और महिलाओं के कम। इससे दोनों की संख्या में जो अंतर था वह कम हो गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, एक तिहाई मतदाता ड्राफ्ट रॉल से बाहर कर दिए गए हैं, शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। द हिन्दू में यह सेकेंड लीड है। एसआईआर के तीसरे चरण में अभी तक छह करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। द टेलीग्राफ में यह खबर नहीं है लेकिन दि एशियन एज में चार कॉलम की इस खबर में बताया गया है कि एसआईआर के बाद ड्राफ्ट सूची में 47.7 लाख वोटर बाहर छोड़ दिए गए हैं।
नवोदय टाइम्स ने इसका विवरण देने की कोशिश की है लेकिन 47 लाख नाम कटे ही बताया है। खबर के अनुसार, 2.82 लाख वोटर की मौत हो चुकी है और 1.41 लाख नाम दो जगह होने से कटे हैं। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, दिल्ली में हर तीसरा और महाराष्ट्र में हर पांचवां वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। अमर उजाला में ड्राफ्ट मतदाता सूची की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अमर उजाला में पीएनबी (पंजाब नेशनल बैंक) की एक खबर है जो दूसरे अखबारों में नहीं है। इस खबर के अनुसार, बैंक में 17 करोड़ रुपए के नकली नोट जमा करवाकर असली नोट ले लिए गए। पहले बैंक वाले एक नकली नोट नहीं लेते थे और असली-नकली नोट की असली पहचान यहीं होती थी। अब नकली नोट लेने में तीन अधिकारी निलंबित किए गए हैं, जांच चल रही है। खबर है कि कई बैंक मैनेजर रडार पर हैं।
नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश के आर्थिक विकास को जो ग्रहण लगा है और हालात जैसे खराब हुए हैं उसपर नियंत्रण के कोई संकेत नहीं हैं। रही-सही कसर कोविड से निकल गई। फिर भी जीडीपी बढ़ने और बेहतर होने की खबर आज बड़े सरकारी प्रचार में है। प्रधानमंत्री ने कहा है तो खबर है ही लेकिन भारत जैसे बड़े और भारी आबादी वाले देश में जीडीपी ज्यादा होना, अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर का हो जाना या जापान से आगे निकल जाना समृद्धि का सही पैमाना नहीं है। प्रति व्यक्ति आय वास्तविक विकास का प्रतीक है। लेकिन उसके बारे में सरकार बात नहीं करते हैं। बेरोजगारी की इस स्थिति में सरकारी पद भरने का सामान्य कार्य भी ना राष्ट्रीय स्तर पर ना डबल इंजन वाले राज्यों में कायदे से किया गया है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


