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आईटी सेक्टर आज गहरे दबाव में है!

गिरीश मालवीय-

आईटी सेक्टर आज गहरे दबाव में है, कुछ सालों पहले तक यह सेक्टर भारत में करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया कराने वाला सबसे बड़ा नियोजक था आज भी है लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।

कल माइक्रोसॉफ्ट ने 60 हजार कर्मचारियों की छटनी की घोषणा की है, ये दरअसल छटनी ही है बस उसे थोड़े अच्छे रैपर में लपेट कर पेश किया गया है। भारत में माइक्रोसॉफ्ट के 23 हजार कर्मचारी काम करते है कितने की नौकरी जाएगी !.. पता नहीं?

इससे पहले भारत की टीसीएस ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करते हुए बताया था कि उसने अपने वर्कफोर्स का एक प्रतिशत यानी 6,000 लोगों को नौकरी से हटाया है।

टीसीएस के अलावा देश की टॉप 5 आईटी कंपनियों (Infosys, HCLTech, Wipro, Tech Mahindra और LTIMindtree) ने पिछले एक साल के भीतर कुल 18,422 कर्मचारी कम किए हैं।

पूरी दुनिया में यही हो रहा है.. इंटेल ने करीब 15,000 नौकरियां कम करने की घोषणा की है। गूगल ने भी अपने अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है। सिस्को ने 4,000 से ज्यादा नौकरियां कम की हैं। ओरेकल ने पहले ही कन्फर्म कर दिया है कि फिस्कल ईयर 2026 के दौरान उसके ग्लोबल वर्कफोर्स में लगभग 21,000 एम्प्लॉई कम हो गए, जिससे उसके हेडकाउंट लगभग 162,000 से घटकर 141,000 हो गए उसने भारत में 10% कर्मचारियों को निकाला है।

TrueUp के ट्रैकर के अनुसार, वर्ष 2026 में अक्टूबर के अंत तक दुनिया भर की टेक कंपनियों में लगभग 1.96 लाख से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं।

ऐसा नहीं है कि पहले आईटी सेक्टर में छटनी नहीं होती थीं लेकिन तब स्थिति कुछ समय बाद सुधरने लगती थी, जल्द ही नई भर्ती फिर से चालू हो जाती थी लेकिन इस बार AI की वजह से ऐसा नहीं होने वाला।

आईटी इंडस्ट्री का यह डरावना परिदृश्य भारत की अर्थव्यवस्था के लिये खास तौर पर घातक है, क्योंकि हमारे देश में ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों का आधा हिस्सा आईटी से आता है। सही मायनों में देखा जाए तो इंडियन IT सेक्टर ने ही इस देश में मिडिल क्लास को जन्म दिया है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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