- नौटंकी करने में महारत हासिल है विधायक उमेश को
- ऋतु खंडूड़ी चार साल में भी फैसला नहीं कर पाई सदस्यता का
गुणानंद जखमोला-
उमेश कुमार: चल गया तो तीर नहीं तो तुक्का
खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने आज गैरसैंण में एक नया शिगूफा मीडिया के सामने डाल दिया है कि कल वो विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। यह पूरी तरह से नौटंकी है और एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश है। किसानों की फसल बर्बाद और विपक्ष पर साथ नहीं देने का आरोप भी हास्यापद है।
भई, आप चार साल तक तो सत्ता की गोद में बैठे रहे। पीछे से सत्ता का समर्थन करते रहे ताकि स्पीकर ऋतु खंडूड़ी दल-बदल के तहत सदस्यता न रद्द कर दें। पेंशन चार साल में पक्की हो जाती है तो 60 दिन पहले इस्तीफा देने का ऐलान नौटंकी ही कहा जाएगा। कुछ देर पहले ही उमेश ने सीएम से मिलकर खानपुर के लिए 130 करोड की विकास योजनाओं की बात की है। तो सीधे समझा जा सकता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। यह ठीक वैसे ही होगा जैसे उमेश ने कहा था कि गैरसैंण को राजधानी बनाने के लिए वहां धरना देंगे।
इस ड्रामे के बावजूद उमेश यदि इस्तीफा दे भी दें तो क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन वो खानपुर के लोगों के बीच फिर हीरो बन जाएंगे। दल-बदल कानून का झंझट खत्म होगा। साथ ही एक तीर से कुंवर चैंपियन और हरदा के बेटे वीरेंद्र रावत को भी साधा जा सकेगा। दोनों ही उमेश के कट्टर प्रतिद्वंदी हैं।
शैलेजा से मुलाकात भी इस नाटक का एक बिंदु हो सकती है कि उमेश कांग्रेस के साथ भी संभल कर चले और भाजपा को भी चेतावनी दे कि कुंवर को टिकट दिया तो कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं।
उधर, सदस्यता का संकट, महिला का वायरल वीडियो और अन्य कानूनी पचड़ों से बचने के लिए भाजपा के साथ भी लाइजनिंग की जा सकती है। ऐन विधानसभा चुनाव के समय अपनी पत्नी की पार्टी को चर्चा में लाना भी एक मकसद है।
कुल मिलाकर उमेश की यह नौटंकी है, क्या पता परवान चढ़े या नहीं। इस्तीफा देना शिगूफा भी हो सकता है यानी चल गया तो तीर, नहीं तो तुक्का।



