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सर्बिया के टीवी चैनल ने एकतरफा रिपोर्टिंग के लिए मांगी माफी, भारत का गोदी मीडिया कब करेगा आत्ममंथन?

‘वर्षों तक चुप रहे, एकतरफा खबरें दिखाईं, जरूरी सवाल नहीं पूछे’—सर्बिया के सरकारी प्रसारक RTV ने कबूली अपनी गलती, भारत के टीवी चैनलों से भी उठ रहे सवाल…

नई दिल्ली: सर्बिया के सरकारी प्रसारक रेडियो टेलीविजन ऑफ वॉयवोडिना (RTV) ने वर्षों तक एकतरफा और गैर-पेशेवर पत्रकारिता करने के लिए अपने दर्शकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। चैनल के न्यूज एंकर गोरान एरर ने लाइव प्रसारण के दौरान स्वीकार किया कि प्रसारक ने लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, कई मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी और जरूरी सवाल पूछने से परहेज किया। इस माफी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब 2 मिनट 34 सेकंड के इस वीडियो के साथ भारत के टीवी मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं—जब दूसरे देशों के न्यूज चैनल अपनी गलतियां स्वीकार कर सकते हैं, तो भारत के टीवी चैनल एकतरफा रिपोर्टिंग के लिए माफी कब मांगेंगे?

चुनाव में हार के बाद बदली न्यूज कवरेज की तस्वीर

सर्बिया में 25 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन से निकली स्टूडेंट लिस्ट ने अलेक्जेंडर वुचिच से जुड़े सत्तारूढ़ राजनीतिक गठबंधन को शिकस्त दी। इसके अगले दिन RTV ने अपने न्यूज बुलेटिन की शुरुआत चुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते लोगों के दृश्यों से की। ये वही दृश्य थे, जिन्हें चैनल ने पिछली शाम अपने प्रसारण में जगह नहीं दी थी।

इन दृश्यों को दिखाने के बाद एंकर गोरान एरर ने दर्शकों के सामने चैनल की पत्रकारिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रसारक के रूप में चैनल वर्षों तक अपनी भूमिका निभाने में नाकाम रहा। कई बातों को दबाया गया, कुछ मुद्दों पर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं, एकतरफा सूचनाएं दी गईं और बिना आलोचनात्मक पड़ताल के खबरें दिखाई गईं। जरूरी सवाल नहीं पूछे गए और कई बार सवाल पूछे ही नहीं गए।

एंकर ने कहा, ”इसके लिए हम अपने दर्शकों से माफी मांगते हैं।”

इस घटनाक्रम के बाद RTV के पहले टेलीविजन चैनल के कार्यवाहक प्रधान संपादक नेनाद चाचिच ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव के बाद जश्न के दृश्यों को प्रसारित नहीं करने का फैसला उन्हीं का था या नहीं।

सर्बिया से हंगरी तक, सरकारी मीडिया की पत्रकारिता पर सवाल

सर्बिया की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हंगरी में भी सरकारी टेलीविजन ने पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की सत्ता के दौरान प्रसारित खबरों को लेकर माफी मांगी थी। अप्रैल 2026 में ओरबान की चुनावी हार के बाद हंगरी के सरकारी मीडिया में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई। जुलाई में सरकारी टीवी के प्रसारण पर संदेश दिखाया गया कि सार्वजनिक मीडिया को झूठ नहीं बोलना चाहिए और ऐसा वर्षों तक करने के लिए माफी मांगी गई।

दोनों घटनाएं एक बुनियादी सवाल सामने रखती हैं—क्या जनता के पैसे से चलने वाले सार्वजनिक प्रसारकों का काम सरकार की छवि चमकाना है या जनता को सत्ता के फैसलों, नीतियों और कमियों की निष्पक्ष जानकारी देना?

भारत के टीवी चैनलों से भी पूछे जा रहे सवाल

सर्बिया के RTV की माफी ने भारत के उस टीवी मीडिया पर सवाल उठाने का अवसर दिया है, जिस पर अक्सर सरकार के पक्ष में खबरें दिखाने, विपक्ष से तीखे सवाल पूछने लेकिन सत्ता से जवाब मांगने में नरमी बरतने और जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं देने के आरोप लगते रहे हैं।

भारत में टीवी पत्रकारिता की आलोचना करने वाले लोग ऐसे चैनलों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर संबोधित करते हैं। उनका आरोप है कि कई चैनलों पर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, सरकारी जवाबदेही और नागरिक अधिकारों जैसे मुद्दों की तुलना में राजनीतिक प्रचार, सत्ता के पक्ष में विमर्श और विरोधियों पर हमले को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, भारतीय मीडिया के सभी संस्थानों और पत्रकारों को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।

सवाल यह है कि जो चैनल खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हैं, क्या वे अपनी पत्रकारिता की कभी सार्वजनिक समीक्षा करते हैं? क्या वे दर्शकों को बताते हैं कि किन मुद्दों पर उन्होंने सवाल नहीं पूछे, किन घटनाओं को पर्याप्त जगह नहीं दी और कहां खबरों का प्रस्तुतीकरण एकतरफा रहा?

सर्बिया के RTV ने कम से कम सार्वजनिक रूप से अपनी कमियों को स्वीकार किया है। उसके एंकर ने यह नहीं कहा कि दर्शकों को खबरें समझने में गलती हुई, बल्कि प्रसारक की अपनी भूमिका पर सवाल उठाए।

भारत में भी मीडिया की विश्वसनीयता पर बहस के बीच ऐसा आत्ममंथन जरूरी है। आखिरकार, पत्रकारिता का काम सरकार की प्रशंसा करना या विपक्ष की आलोचना करना भर नहीं है। उसका दायित्व तथ्यों को सामने रखना, सभी पक्षों से सवाल पूछना और जनता को सत्ता के कामकाज का हिसाब देना है।

सर्बिया के टीवी चैनल ने अपनी एकतरफा पत्रकारिता के लिए दर्शकों से माफी मांग ली। अब सवाल भारत के टीवी चैनलों से है—क्या वे भी कभी स्वीकार करेंगे कि उनसे कहां और कितनी गलतियां हुईं? या फिर दर्शक उनके जवाब का इंतजार ही करते रहेंगे?

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