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रामायण की रिलीज से पहले महाभारत: ‘भारत समाचार’ पर भड़के संगीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला!

Screenshot of a tweet about a wedding song, with a couple in ornate royal wedding costumes posing together

रामायण फिल्म एक बार फिर बड़े पर्दे पर रिलीज होने जा रही है। लेकिन रामायण की रिलीज से पहले ही इस पर महाभारत छिड़ चुकी है। बताया जा रहा है कि रामायण फिल्म में कव्वाली करवा दी गई है। इससे साधु संतों में नाराजगी पसर गई है। दूसरी तरफ भारत समाचार ने अपने एक ट्वीट में इस वाली रामायण को आदिपुरुष से जोड़कर मनोज मुंतशिर शुक्ला वाला कारनामा दोहराने जैसी बात लिख दी है। जिससे मनोज भारत समाचार पर खफा हो गए हैं। नीचे पढ़ें…


पहले भारत समाचार का ट्वीट पढ़िए-

“रामायण में कव्वाली? ‘मंगल रंग’ पर बवाल!” रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के विवाह गीत पर सोशल मीडिया में हंगामा; त्रेतायुग में कव्वाली-सूफी संगीत का सवाल। मनोज मुंतशिर वाला कारनामा दोहराया जा रहा है? त्रेतायुग में कव्वाली कब से? फिल्मकारों ने सनातन का अपमान किया? साधु संतों ने कहा ये फिल्म देखना पाप के समान है। बहिष्कार का ऐलान।

आज बड़ी खबर फिल्म ‘रामायण’ को लेकर। रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर इस फिल्म का गाना ‘मंगल रंग’ रिलीज होते ही विवाद में आ गया है। आरोप है कि भगवान राम और सीता के विवाह पर फिल्माए गए इस गाने में कव्वाली और सूफी संगीत के तत्व हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं त्रेतायुग की कहानी में कव्वाली कहां से आई? आइए पूरा मामला समझते हैं।

फिल्म ‘रामायण’ के निर्देशक हैं नितेश तिवारी। गाना ‘मंगल रंग’ को ए.आर. रहमान ने कंपोज़ किया है और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल ने गाया है। गाने में भगवान राम और सीता के विवाह को दिखाया गया है।

विवाद की सबसे बड़ी वजह गाने का संगीत है। कई यूजर्स को इसमें कव्वाली और सूफी शैली के तत्व सुनाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि वाल्मीकि रामायण पर आधारित फिल्म में पारंपरिक संस्कृत गीत और भारतीय वाद्यों की जगह कव्वाली क्यों चुनी गई। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।

कुछ लोगों ने गाने की तुलना ए.आर. रहमान के पुराने गीत ‘कुन फाया कुन’ और तमिल गाने ‘एन्ना सोल्ला पोगिराई’ से भी की है।

एक और आपत्ति गाने के एक दृश्य पर जताई गई है, जिसमें सीता को राम की कथित ‘हल्दी’ रस्म को देखते हुए दिखाया गया है। मेकर्स का कहना है कि यह हल्दी नहीं, बल्कि पूर्वी भारत और मिथिला की पारंपरिक ‘चुमावन’ रस्म है, जिसे गलती से हल्दी समझा गया।

अब अयोध्या के साधु संतों में। नाराजगी है वो कह रहे हैं ऐसी फिल्म देखना पाप है ये भगवान राम और सीता की मर्यादा से खिलवाड़ है। फिल्म के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।


अब भारत समाचार के ट्वीट को रिट्वीट कर मनोज मुंतशिर शुक्ला ने क्या लिखा है पढ़ें-

मनोज मुंतशिर वाला कारनामा? बड़ी जाहिलों जैसी बात की है देश के स्वघोषित सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ चैनल ने.

मेरे भाई काश रामायण के गीतों में मेरा वाला कारनामा दोहराया जाता.

आदिपुरुष बहुत ख़राब फ़िल्म थी, संवाद और भी ख़राब थे, लेकिन गीत तो देश का बच्चा-बच्चा गाता है. कभी जाइए श्री अयोध्या पूरी, गली-गली में आदिपुरुष के ही गीत बज रहे होते हैं.

जो ग़लती मुझसे हुई, मैंने उसके लिए अनगिनत बार रामभक्तों से क्षमा माँगी और क्षमा मिली भी, लेकिन गीतों को चैलेंज मत करिए.

उनमें श्रद्धा, समर्पण और कवित्त की कोइ कमी नहीं थी. न मैंने राम के लिए नर्सरी राइम्स लिखी न कव्वालियाँ. आगे लोग समझदार हैं, जानते हैं कौन कितने पानी के है. जय श्री राम.

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