सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लोग मोदी सरकार के सूचना सलाहकार दिलीप मंडल को खरी खोटी सुना रहे हैं। मंडल ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सपोर्ट में पत्रकारों के पाले में ऐसी बॉलिंग की है जो किसी के समझ में नहीं आ रही है। कुछ लोग मंडल को गरिया भी रहे हैं। नीचे पढ़िए…
दिल्ली पुलिस और तमाम लोग देख लीजिए।
केंद्र सरकार के सीनियर सलाहकार और सूचना मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने पब्लिक प्लेटफार्म पर बता दिया है कि सभी पत्रकार हैं। इनमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सरकार के सलाहकार के इस बयान के बाद लग रहा है अब पीआईबी कार्ड भी नहीं होगा। सब एक हैं।
-नरेंद्र नाथ मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार
राजकुमार भाटी-
आप बहुत महान व्यक्ति हैं। बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी करते हैं। वैसे आप शुरू से महान नहीं थे। अभी पिछले कुछ वर्षों में महानता प्राप्त की है जब से केंद्र सरकार ने आपको मासिक अनुदान देना शुरू किया है।
अब आप एक यह भविष्यवाणी भी कर ही दीजिए कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा लोग बीमार रहते हैं। एक अस्पताल में कितने लोग आ सकते हैं। इसलिए सरकार को सभी अस्पताल बंद कर देने चाहिए। क्योंकि अस्पतालों की इतनी क्षमता नहीं है कि वे सारे बीमारों को भर्ती कर सकें। आपकी महानता को प्रणाम।
दिलीप मंडल
पीएम या सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस संभव नहीं हैं. देश में लगभग 30 से 40 करोड़ पत्रकार हैं, जो यूट्यूब से लेकर, इंस्टा और फेसबुक पर कंटेंट डाल रहे हैं. सबके अपने आईडी कार्ड हैं. माइक है, मोबाइल है, चैनल है.
इनको छोटा पत्रकार बोलना सही नहीं है. इनमें से कई ने अखबारों और चैनलों के पत्रकारों से भी अच्छी पत्रकारिता की है. मैं उनको नमन करता हूं.
कई यूट्यूबर के नेशनल चैनलों से ज्यादा व्यूअर हैं.
पीएम प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और इन करोड़ों यूट्यूबर को न बुलाएं तो भेदभाव होगा.
दिल्ली में वे प्रेस कॉन्फ्रेंस का खुला निमंत्रण दें तो रामलीला मैदान छोटा पड़ जाएगा. 50 हजार पत्रकार तो आएंगे ही. फिर सवाल कौन पूछे, ये कौन तय करेगा.
भेदभाव का आरोप लग जाएगा.
इसलिए पीएम अब 140 करोड़ लोगों से सीधे बात करते हैं. ज्यादातर देशों में अब यही होता है.
सवाल ये है ही नहीं कि पत्रकार कौन है. सवाल ये है कि पत्रकारिता कौन कर रहा है.
जो भी पत्रकारिता कर रहा है, वह पत्रकार है.
करोड़ों यूट्यूबर पत्रकार ही हैं. मैंने इस बारे में 16 साल पहले ही लिख दिया था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के युग का अंत हो रहा है.

धोखेबाज, बहुत बड़े फ्रॉड! Prof dilip mandal
तुम (मां-बहन की गालियों के साथ) क्या भारत सरकार के खर्चे पर हर महीने 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा वेतन/भुगतान पाने वाले व्यक्ति नहीं हो, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार के पद पर हैं?
और तुम पत्रकारों को सलाह दे रहे हो कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को कब और कैसे इंटरव्यू देना चाहिए! क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता कि अमेरिका के राष्ट्रपति रोज मीडिया को संबोधित करते हैं?
दिलीप मंडल, तुम्हारे लिए गालियों का इस्तेमाल करते हुए, फिलहाल यहीं बात खत्म करते हैं।
बस एक सवाल है—दिलीप मंडल, तुमने किस विश्वविद्यालय से प्रोफेसर का दर्जा हासिल किया? किस विश्वविद्यालय में तुम्हारी प्रोफेसर की नियुक्ति हुई? क्या यह भी कोई धोखाधड़ी है?
-जे गोपीकृष्णन



