भारत में सरकारी सेवाओं के तेजी से डिजिटल होने के बीच देश के डिजिटल ढांचे की सुरक्षा और उस पर सरकार के नियंत्रण को लेकर सवाल उठे हैं। वरिष्ठ पत्रकार पंकज पचौरी ने दावा किया है कि भारत सरकार के करीब 1,700 आधिकारिक ऐप हैं, लेकिन इनमें से किसी एक पर भी सरकार का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने हाल ही में डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी कंपनी eMudhra के मामले को इस बड़े संकट की सिर्फ एक झलक बताया है।
पचौरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की पूरी डिजिटल शासन व्यवस्था ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां मनोरंजन के लिए बनाया गया कोई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल भी इसे अस्त-व्यस्त कर सकता है। उन्होंने इसे डर फैलाने की कोशिश बताने के बजाय शासन व्यवस्था को आउटसोर्स करने का परिणाम बताया। हालांकि, सरकारी ऐप की संख्या और उन पर सरकार के नियंत्रण से जुड़े उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या है eMudhra का मामला?
पंकज पचौरी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारतीय कंपनी eMudhra के डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्रों में गंभीर खामी सामने आई है। यह मामला केवल किसी ऐप के काम नहीं करने या डेटा लीक होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट पर वेबसाइटों की पहचान और उनके साथ सुरक्षित कनेक्शन स्थापित करने की व्यवस्था से जुड़ा है।
eMudhra वेबसाइटों की पहचान प्रमाणित करने वाले डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने वाली कंपनियों में शामिल है। ये प्रमाणपत्र ब्राउजर को यह भरोसा करने में मदद करते हैं कि उपयोगकर्ता जिस वेबसाइट से जुड़ रहा है, उसकी पहचान सही है और कनेक्शन सुरक्षित है।
अक्टूबर 2026 में सामने आए मामले में कंपनी के आठ इंटरमीडिएट डिजिटल प्रमाणपत्रों से जुड़ी निजी क्रिप्टोग्राफिक कुंजियां कमजोर पाई गईं। ये कुंजियां अप्रैल 2025 में तैयार की गई थीं। सुरक्षा शोधकर्ता ने 17 अक्टूबर 2026 को इस खामी की जानकारी प्रमुख ब्राउजर कंपनियों को दी। इसके बाद प्रभावित प्रमाणपत्रों को रद्द करने और उन्हें भरोसेमंद प्रमाणपत्रों की सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इस खामी का इस्तेमाल किया जाता तो हमलावर फर्जी डिजिटल प्रमाणपत्र बनाकर वैध वेबसाइटों की नकल करने की कोशिश कर सकते थे। इससे कुछ परिस्थितियों में उपयोगकर्ताओं के सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन को निशाना बनाने का जोखिम पैदा हो सकता था। हालांकि, कंपनी ने कहा कि प्रभावित प्रमाणपत्रों से कोई ग्राहक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया था और उसके बुनियादी ढांचे में सेंध लगने या ग्राहक डेटा चोरी होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
सरकार ने जांच के लिए बनाई विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने भी इस मामले में सुरक्षा संबंधी परामर्श जारी किया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि eMudhra की डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) और ई-साइन सेवाएं इस घटना से प्रभावित नहीं हुई हैं। ये सेवाएं भारत में संबंधित नियामकीय व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं। कंपनी का वैश्विक वेबसाइट सुरक्षा प्रमाणपत्र कारोबार अलग व्यवस्था के तहत काम करता है और सुरक्षा संबंधी खामी उसी हिस्से में सामने आई।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय वेबसाइटों और ऐप पर इस घटना का प्रभाव सीमित और थोड़े समय के लिए रहा। इसलिए इस घटना को भारत की सभी सरकारी डिजिटल सेवाओं के हैक होने या उनके नियंत्रण से बाहर होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
डिजिटल शासन में निजी कंपनियों की भूमिका पर सवाल
पंकज पचौरी की टिप्पणी का मूल सवाल डिजिटल शासन के उस मॉडल से जुड़ा है, जिसमें सरकारी सेवाओं के संचालन, तकनीकी ढांचे, प्रमाणीकरण और सुरक्षा के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
सरकारी ऐप और डिजिटल सेवाएं नागरिकों को सुविधाएं देती हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा केवल ऐप बनाने या उसे सरकारी नाम से जारी करने से सुनिश्चित नहीं होती। यह भी जरूरी है कि सरकार के पास उनके तकनीकी ढांचे, डेटा, पहुंच संबंधी अधिकारों और सुरक्षा प्रणालियों पर प्रभावी निगरानी हो। किसी निजी कंपनी की तकनीकी चूक का असर कितना व्यापक हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस कंपनी की सेवाएं किन प्रणालियों से जुड़ी हैं और वैकल्पिक व्यवस्था कितनी मजबूत है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है। यदि किसी डिजिटल प्रणाली में कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, अपर्याप्त निगरानी या जरूरत से ज्यादा अधिकार वाली स्वचालित प्रणाली मौजूद है, तो उसका दुरुपयोग नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन किसी AI मॉडल के लिए भारत सरकार के पूरे डिजिटल शासन तंत्र को अस्त-व्यस्त कर देना संभव है या नहीं, यह दावा संबंधित तकनीकी प्रमाणों के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
eMudhra प्रकरण ने डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी खामियों, निजी कंपनियों की जवाबदेही और नियामकीय निगरानी की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। पंकज पचौरी का सवाल इससे आगे जाता है—क्या भारत ने अपनी शासन व्यवस्था को डिजिटल तो बना दिया है, लेकिन उस पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी उतनी ही मजबूत की है?


