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पंजाब केसरी से मजीठिया संबंधी जानकारी के लिए गिड़गिड़ा रही महिला श्रम निरीक्षक

पालमपुर (हिमाचल) : मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने के मामले में श्रम विभाग के इंस्पेक्टर किस तरह अखबार वालों से खौफजदा होकर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं, इसका उदाहरण पंजाब केसरी की परौर स्थित हिमाचल यूनिट है। मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की आरटीआई पर यहां के श्रम निरीक्षक को भी पंजाब केसरी में वेज बोर्ड लागू किए जाने संबंधी रिपोर्ट देनी थी। अखबार के कथित दबाव में श्रम निरीक्षक ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। पत्रकार अब इस संबंध में श्रमायुक्त से शिकायत का मन बना रहे हैं। 

पालमपुर (हिमाचल) : मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने के मामले में श्रम विभाग के इंस्पेक्टर किस तरह अखबार वालों से खौफजदा होकर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं, इसका उदाहरण पंजाब केसरी की परौर स्थित हिमाचल यूनिट है। मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की आरटीआई पर यहां के श्रम निरीक्षक को भी पंजाब केसरी में वेज बोर्ड लागू किए जाने संबंधी रिपोर्ट देनी थी। अखबार के कथित दबाव में श्रम निरीक्षक ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। पत्रकार अब इस संबंध में श्रमायुक्त से शिकायत का मन बना रहे हैं। 

 

यहां तैनात महिला श्रम निरीक्षक की हालत ऐसी है कि लगता है मानो वह अपनी शक्तियां ही भूल बैठी हैं। पहले तो उन्होंने पंजाब केसरी के कार्यालय में जाकर जानकारी लेनी चाही तो उन्हें जानकारी नहीं दी गई और धमका कर जालंधर से जानकारी मांगने को कहा गया। इस पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय श्रय निरीक्षक ने पंजाब केसरी के जालंधर कार्यालय को पत्र लिखकर जानकारी देने की गुहार लगाई। इसमें यह भी लिख दिया गया कि वह यह जानकारी केवल रविंद्र अग्रवाल की आरटीआई की जानकारी देने के लिए मांग रही हैं। इस पर भी पंजाब केसरी ने उनको जानकारी देना जरूरी नहीं समझा। 

एक तरह से पंजाब केसरी ने न केवल माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को सरेआम ताक पर रख रखा है, बल्कि श्रम नियमों की भी परवाह नहीं है। यह अखबार किसकी शह पर यह सब कर रहा है, इस पर चरचा की जरूरत नहीं है, मगर यहां श्रम विभाग की दयनीय हालत पर चरचा जरूरी है। धर्मशाला के श्रम निरीक्षक से भी ऐसी ही जानकारी मांगी गई थी। उन्होंने तो जैसे-तैसे अमर उजाला, दैनिक जागरण, दिव्य हिमाचल व अन्य अखबारों की जानकारी मुहैया करवा दी। हालांकि इससे साफ है कि हिमाचल के सभी अखबार मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं दे रहे हैं और श्रम निरीक्षक खुद कुछ कार्रवाई करने के बजाय अखबार वालों से जुगाड़ के जरिये जानकारी मुहैया करवाकर अपनी नौकरी बचा रहे हैं। हैरानी की बात है कि श्रम निरीक्षकों को वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की जानकारी तक नहीं है और न ही वेज बोर्ड के तहत सेलरी कैल्कुलेशन की जानकारी है।

फिलहाल, पालमपुर की श्रम निरीक्षक पंजाब केसरी के दफ्तर से जानकारी लेने के लिए गिड़गिड़ाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रही हैं। पहले भी इस श्रम निरीक्षक ने जानकारी न दिए जाने की बात कहकर आरटीआई की जानकारी मुहैया नहीं कराई थी। उधर, पत्रकार रविंद्र अग्रवाल ने कहा है कि जानकारी न मुहैया कराने पर श्रम निरीक्षक के खिलाफ श्रमायुक्त के पास अपील फाइल की जाएगी। 

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