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बिजनेस शो को एंकर करने लगे खोजी पत्रकार दीपक शर्मा!

-दीपक शर्मा-

नौकरी और एंटरप्राइज में बुनियादी फर्क ये है कि नौकरी में सब कुछ मन से नहीं होता और एंटरप्राइज बिना मन के आगे नहीं बढ़ता। यानि नौकरी में आपको वो सबकुछ करना है जो परिस्थितयां चाहती हैं।…तो इस नियम को समझिये, इस कड़वे सच का सामना करिये। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो ये पोस्ट थोड़ा पॉज़िटिव होकर पढ़िए … आप मायूस नहीं होंगे, ये गारंटी है। ज़्यादा दूर क्यूँ जाएँ, मैं अपनी ही मिसाल देता हूँ…भले ही बात छोटी सी है, पर अगर आप समझ पाए, तो आपको अच्छा लगेगा.. और मुझे भी ।

हमारे दफ्तर में एक अरसे से ‘बिज़नेस’ पर शो की डिमांड हो रही थी। आईएएनएस (न्यूज़ एजेंसी) में बिज़नेस का बड़ा ब्यूरो है और बड़े ही प्रतिभावान रिपोर्टर हैं जो देश के बजट से लेकर बॉम्बे के स्टॉक बाजार को बड़ी बारीकी से समझते हैं। लेकिन ये रिपोर्टर प्रिंट में दक्ष हैं और टीवी इनके मिज़ाज़ में ढलता नहीं है।इसलिए दिक्कत ये थी कि बिज़नेस के शो को एंकर कौन करे ? एंकर न मिलने के कारण शो काफी वक़्त से हाशिये पर ठहरा हुआ था।

आईएएनएस में, मैं सम्पादक ज़रूर हूँ और टीवी में 16 -17 साल का अनुभव भी है पर अपने करियर में, मैंने स्टॉक मार्किट, बैंकिंग या कॉरपोरेट को कभी रिपोर्टर के तौर पर कवर नहीं किया। मैं कामर्स का विद्यार्थी भी नहीं रहा जिसे पहले से बिज़नेस का अंदाज़ा हो और वो किसी स्टॉक शो को एंकर करने के लिए तैयार हो जाए। पर मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं था। मैं जानता था स्टॉक मार्केट शो को मुझे ही एंकर करना होगा। एक ऐसे व्यक्ति को, जिसके पास अपना डीमैट खाता भी नहीं है।

जीवन में पढ़ने की आदतें अचानक आपको किसी मोड़ पर लाभ पहुंचा देती हैं। एक अरसे से इकनोमिक टाइम्स के पाठक के तौर पर मैं शेयर बाजार और कॉरपोरेट की ख़बरें पढ़ता आ रहा था लेकिन फिर भी बाजार और स्टॉक की बारीकियां मुझसे अभी कोसों दूर थीं। लिहाजा मैंने दफ्तर से लौटकर, हर रात स्टॉक मार्किट, निवेश और ट्रेडिंग पर किताबें पढ़नी शुरू की। इस सिलसिले में यूट्यूब पर भी बहुत से वीडियो उपलब्ध थे जिससे मैं बहुत कुछ सीखता रहा। बाजार में कुछ बड़े निवेशक जैसे राकेश झुनझुनवाला, विजय केडिया, रामदेव अग्रवाल, सौरभ मुखर्जी, राधाकिशन दमानी, नीमेश शाह या चंद्रकांत जी के ढेरों इंटरव्यू ने भी मुझे एक राह दिखाई। और इस दौर में मुझे जो कुछ समझ नहीं आ रहा था उस पर मेरे कुछ चार्टेड अकाउटेंट मित्र मुझे समझाने में मदद करते रहे। मैंने कॉपी कलम उठाया और नोट्स बनाने शुरू कर दिए। हर रात स्टॉक मार्किट पर कुछ न कुछ रोचक जानकारी मिलती रही।

कुछ महीनो बाद मुझे लगा कि स्टॉक मार्किट पर मैं शो कर सकता हूँ।वैसे भी एंकर को सवाल ही पूछने होते हैं , जवाब तो हमेशा एक्सपर्ट ही देते हैं। आप चाहे तो यूट्यूब पर अंग्रेजी में IANS TV टाइप करके आईएएनएस के यूट्यूब चैनल पर जाकर मेरा शो, शेर बाजार देख सकते हैं।हो सकता है आपको लगे अभी भी मुझे बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है। अगर ऐसा लगता है तो आपके कमेंट का मुझे इंतज़ार रहेगा।

दोस्तों, जहाँ चाह वहां राह पर तो लोग चलते ही हैं लेकिन इस विचार को बदलने की ज़रुरत है। Where there is a will, there is a way से अब आगे बढ़ने होगा। आज के दौर में होना ये चाहिये कि जहाँ राह दिखे वहीँ चाह पैदा करिये। जिधर भी रास्ता ले जाए वहीँ मन बनाकर, आगे बढ़िए।तैयारी करिये, रुकावटों का हल निकालिये, फोकस को ओझल मत होने दीजिये। बस तय करिये कि आगे चलना है, उस राह पर जो शायद आपने पहले से तय नहीं की है।

इसलिए नया विचार होना चाहिए :
“जहाँ राह वहीँ चाह “
ऐसा संकल्प लीजिये। आपदा में अवसर मिल ही जायेगा।

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