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द टेलीग्राफ के पहले पन्ने का यह कार्टून क्या कहता है!

संजय कुमार सिंह-

घातक कार्टून और व्यंग्य का आत्मघाती कौशल… द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर आज एक कार्टून से संबंधित खबर छपी है। शीर्षक है, कार्टून बनाने की घातक कला। और देककर ही पता चल रहा है कि कार्टून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर है और मलयालमय में जो लिखा है उसे मैं पढ़ नहीं सकता तो मैंने समझा कि यह कुछ लिखा होने का प्रतीक है और कार्टून यह है कि ट्रम्प उसका अर्थ अपनी समझ से लगा रहे हैं। पर असल में यह सलाह है। यह सलाह उन्हें कोई दे रहा है। वह कौन है यह कार्टूनिस्ट ने नहीं बताया है और अखबार ने भी इस बारे में चुप्पी साध ली है।

पता नहीं क्यों, खबर के शीर्षक में घातक को मैंने आत्मघाती समझा और एक सांस में पूरी खबर पढ़ गया। असल में कल देर रात मैंने न्यूजलॉन्ड्री का एक पुराना प्रोग्राम देखा था जो व्यंग और उससे संबंधित जोखिमों पर था। शायद उसका डर रहा हो या फिर आज ही ट्वीटर पर एनडीटीवी की खबर देखी कि व्यापम प्रदेश में गिरफ्तार कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को जमानत नहीं मिली और उसे अभी जेल में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट हर कोई कहां जा पाता है।

कुल मिलाकर, अंग्रेजी की खबर थोड़ी देर में समझ में आई। यह कार्टून आत्मघाती नहीं है। एक डॉक्टर का बनाया हुआ है और जिसके लिए है उसके लिए वाकई घातक है। इससे आप समझ जाएंगे कि भारत में क्यों लोग ट्रम्प का समर्थन करने पर आमादा हैं। न्यूजलौन्ड्री वाले वीडियो में अमित शाह पर व्यंग करने वाले ने संबंधित जोखिम और ऐसा जोखिम लेने का कारण बताया है। आप भी देखिए और व्यंग का मजा लीजिए। खुलकर। इसलिए पेश है, मलयालम के इस कार्टून में ट्रम्प को दी गई सलाह का हिन्दी अनुवाद (अंग्रेजी से)।

“मित्र, तुम चार साल से क्या कर रहे थे? तुम संविधान बदल सकते थे। काले कानून बना लेना चाहिए था; उन्हें संसद में पास करा लेना था। जरूरत पड़ती तो सांसद खरीद लेते। जजों को धमका कर अपनी तरफ कर सकते थे। अदालतों को नियंत्रण में कर लेना चाहिए था। सेना और पुलिस में पार्टी के लोगों को भर सकते थे। पुराने दस्तावेज जला कर इतिहास को मिटा सकते थे। नया व्हाइट हाउस बना सकते थे पर बेवकूफ मित्र, तुमने अभी-अभी जो किया है वह तो बस गैर कानूनी है।”

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