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एनडीटीवी बिक्री का संदेश : पैसे में बहुत ताकत होती है!

विकास ऋषि-

ताकि सनद रहे! NDTV बिका नहीं है बल्कि पीछे के दरवाज़े से खरीदा गया है। क्योंकि अगर उसने बिकना ही होता तो इतनी खींचा तान न देखने को मिलती।

दरअसल पहले के ज़माने में जब किसी समृद्ध व्यक्ति को किसी का घर, खेत, गाय घोड़े या कोई परिंदा आदि पसंद आ जाता था तो वो उसे पहले स्पष्ट रूप से अच्छी कीमत देकर खरीदना चाहते थे।

लेकिन जब उन्हें सामने से न सुनने को मिलती तो उनके भीतर का अहम जाग जाता और फिर उसके बाद साम दाम दंड भेद, येनकेन प्रकारेण वो उसे खरीदना नहीं जीतना चाहता, अपने अहम को शांत करने के लिए।

दुनियाभर में ये संदेश देने के लिए कि पैसे में बहुत ताकत होती है। और जब सत्ता भी थैलीशाहों का साथ देने लग जाये तो अपनी चीज़ को बेचना या नहीं बेचना उसके मालिक के हाथों में भी नहीं होता है। इसलिए चुपचाप समर्पण करना ही पहला और अंतिम विकल्प होता है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Kartiken Iyer

    December 1, 2022 at 7:49 am

    एक कंपनी का मालिक अपने ईच्छा से आज के मूल्य के अनुसार 1000 करोड़ रुपये से अधिक मे अपने कंपनी का एक तिहाई से भी कम का हिस्सा किसी दूसरे कंपनी को बेचता है। 1000 करोड़ रुपए और अभी भी कंपनी मे हिस्सेदारी। इसमे संताप वाली कौन सी बात है? ये पत्र ऐसा लिखा है जैसे उनसे मुफ्त मे कंपनी ले लिया गया हो या छिन लिया हो। मालिक का कभी भी नुकसान है नहीं, 1000 करोड़ रुपए और कंपनी मे हिस्सेदारी। मैनेजमेंट बदलने से कुछ लाभ या नुकसान होगा भी तो केवल कर्मचारियो का होगा। मीडिया सेटटिंग ऐसा है की 1000 करोड़ रुपए और कंपनी मे हिस्सेदारी के साथ के एक बिसनेस डील मे भी त्याग की बात कर रहे है। वामपथी का नया स्वरूप जो पूंजीवादी को भी त्याग के रूप दिखाता है।

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