Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

अमिताभ ठाकुर को जमानत मिलने के तुरंत बाद ‘बी’ वारंट जारी करने पर विवाद!

लखनऊ। आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को न्यायालय से राहत मिलने के तुरंत बाद उनके खिलाफ बी-वारंट जारी किए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आज़ाद अधिकार सेना ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।

संगठन द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि यह मामला उत्तर प्रदेश लोकायुक्त की रिपोर्ट संख्या 04/2015 की सिफारिशों पर आधारित है। इसी प्रकरण में वर्ष 2015 से 2018 के बीच सतर्कता विभाग/ईओडब्ल्यू द्वारा की गई विस्तृत और गहन जांच के बाद अमिताभ ठाकुर को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से पूरी तरह क्लीन चिट दी जा चुकी है। संबंधित फाइनल रिपोर्ट को न्यायालय द्वारा भी स्वीकार किया जा चुका है।

इसके बावजूद, आज़ाद अधिकार सेना का कहना है कि वर्षों पुराने, निराधार और निपट चुके मामले में पुनः बी-वारंट जारी किया जाना न केवल न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है, बल्कि यह कानून की आत्मा, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सीधा हमला है।

प्रेस नोट में यह भी उल्लेख किया गया है कि देवरिया औद्योगिक प्लॉट प्रकरण में 19 जनवरी 2026 को माननीय न्यायालय से अमिताभ ठाकुर को नियमित जमानत मिलने के ठीक अगले दिन थाना तालकटोरा, लखनऊ में दर्ज मुकदमा संख्या 204/2025 (FIR 0204/2025) में बी-वारंट तामील किए जाने की सूचना सामने आई, जिसे संगठन ने दबाव बनाने की मंशा से किया गया कदम बताया है।

आज़ाद अधिकार सेना का स्पष्ट आरोप है कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित, तथ्यहीन और आधारहीन है, जिसमें कोई नया साक्ष्य या परिस्थिति मौजूद नहीं है। संगठन ने कहा कि सत्य और न्याय की लड़ाई में वह पीछे हटने वाला नहीं है और इस कार्रवाई को उचित कानूनी मंच पर चुनौती दी जाएगी।

संगठन ने दोहराया कि न्यायपालिका में उसे पूर्ण विश्वास है और अंततः सत्य की ही विजय होगी।


अभिषेक उपाध्याय-

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को ज़मानत मिलने के तुरंत बाद उनके ख़िलाफ़ एक पुराने मामले में ‘बी’ वारंट तामील करा दिया गया।

अमिताभ ठाकुर की आज़ाद अधिकार सेना ने जारी किया प्रेस नोट। लगाए गंभीर आरोप। प्रेस नोट के मुताबिक़ इस मामले में विजिलेंस जाँच हो चुकी है।

अमिताभ ठाकुर को क्लीन चिट मिल चुकी है। कोर्ट इस रिपोर्ट को स्वीकार कर चुका है। मामला ख़त्म हो चुका है। उसके बावजूद ‘बी’ वारंट तामील करा दिया गया।

क्या उत्तर प्रदेश में नेटफ्लिक्स के लिए कोई पॉलिटिकल थ्रिलर वेब सीरीज़ बन रही है, जिसका शीर्षक है ‘बदला’?

इधर बदला? उधर बदला? चहुं तरफ बदला ही बदला? आप यूपी की सरकार चला रहे हैं, या फिर बदलापुर की?


बी-वारंट एक न्यायालय द्वारा जारी किया जाने वाला आदेश होता है, जिसका मकसद किसी व्यक्ति को जेल से अदालत में पेश कराना होता है।

सरल शब्दों में: जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे मामले में पहले से जेल में बंद होता है और अदालत उसे किसी अन्य केस में सुनवाई या पेशी के लिए बुलाना चाहती है, तो अदालत बी-वारंट जारी करती है।

बी-वारंट कब जारी होता है?

जब आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत (जेल) में हो और उसके खिलाफ कोई दूसरा मामला भी अदालत में लंबित हो उस दूसरे मामले में उसकी मौजूदगी जरूरी हो

बी-वारंट का मतलब क्या नहीं है?

  • यह नई गिरफ्तारी का वारंट नहीं होता
  • यह ये नहीं दर्शाता कि आरोपी फरार है
  • यह सीधे तौर पर दोषी ठहराने का आदेश नहीं है

प्रक्रिया कैसे होती है?

  • अदालत बी-वारंट जारी करती है
  • वारंट जेल प्रशासन को भेजा जाता है
  • जेल प्रशासन आरोपी को तय तारीख पर अदालत में पेश करता है
  • सुनवाई के बाद आरोपी को फिर जेल वापस भेज दिया जाता है

ए-वारंट और बी-वारंट में फर्क

  • ए-वारंट (A-Warrant): बाहर मौजूद व्यक्ति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के लिए
  • बी-वारंट (B-Warrant): पहले से जेल में बंद व्यक्ति को अदालत में पेश कराने के लिए
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन