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उत्तर प्रदेश

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की रिहाई का रास्ता साफ!

लखनऊ। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। वाराणसी और देवरिया, दोनों ही मामलों में जमानत मिलने के बाद उनके खिलाफ जारी किया गया वारंट-बी अब न्यायालय ने वापस ले लिया है।

अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ताओं ने वारंट-बी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद न्यायालय ने आदेश पारित करते हुए इसे निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब अभियुक्त को संबंधित मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो ऐसे में वारंट जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।

अमिताभ ठाकुर की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि वारंट-बी वापस होने के साथ ही उनकी रिहाई की सभी कानूनी अड़चनें समाप्त हो गई हैं और वे जल्द ही जेल से बाहर होंगे।

गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर लंबे समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर रहे हैं, जिस कारण उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। समर्थकों का आरोप रहा है कि ये सभी मामले राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज किए गए।

वारंट वापसी के बाद अमिताभ ठाकुर की पार्टी आजाद अधिकार सेना ने इसे “कानूनी जीत और लोकतंत्र की जीत” बताया है।


वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय का ट्वीट-

अमिताभ ठाकुर जल्द ही बाहर होंगे। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आवाज़ उठाने के चलते पुलिस-प्रशासन के निशाने पर आए पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

उन्हें वाराणसी और देवरिया दोनो ही न्यायालयों से ज़मानत मिल चुकी है। इसके बाद उनके खिलाफ वारंट बी जारी करा दिया गया था।

अमिताभ ठाकुर के वकीलों ने इसके खिलाफ न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश से ये वारंट वापिस हो गया है। अमिताभ ठाकुर की आजाद अधिकार सेना ने इस आशय की प्रेस रिलीज जारी की है।

कभी शंकराचार्य से भिड़ना, कभी बटुक ब्राह्राणों की चोटी खींचकर मारने वाली व्यवस्था को संरक्षण देना, तो कभी अपने खिलाफ आवाज़ उठाने वाले पूर्व आईपीएस को, 25 साल पुराने मामले में 25 साल बाद मुकदमा दर्ज कर जेल भिजवा देना, आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों पर धुआंधार मुकदमे दर्ज करना, विरोधियों पर बुलडोजर चलवा देना, और कोडीन के माफियाओं की आलीशान कोठियों पर अभयदान के पुष्पहार से माल्यार्पण करना, योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली व्यवस्था ने सत्ता के दुरुपयोग का नया इतिहास रच दिया है।

ये जानते हुए भी कि कभी इतिहास का ऐसा ही पन्ना अपनी खुद की प्रताड़ना व्यक्त करते हुए संसद में फूट फूटकर रोया था।

इतिहास की आदत है।
ये खुद को दोहराता ज़रूर है।
बीता हुआ वक्त नई शक्ल में,
एक रोज़ लौटकर आता ज़रूर है!!

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