अल्मोड़ा के चैरिटेबल स्कूल और अनाथालय को कब्जाने, आगजनी और साइबर अभियान चलाने के आरोप, फाउंडेशन ने कहा- संगठित आपराधिक गिरोह सक्रिय
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में संचालित चैरिटेबल संस्था ‘दि प्लेज़ेंट वैली फाउंडेशन’ ने नोएडा के कारोबारी अपूर्वा जोशी उर्फ भैय्याजी जोशी, उनकी पत्नी गीतिका क्वीरा, भाई अजय कुमार जोशी और अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज तीन अलग-अलग प्राथमिकी का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था ने पूरे मामले की स्वतंत्र CBI-SIT जांच कराने की मांग की है।
फाउंडेशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संस्था पिछले लगभग दो दशकों से अल्मोड़ा के ग्राम डांडा-कांडा में गरीब और वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रही है। संस्था का कहना है कि उसके विद्यालय और अनाथालय से सैकड़ों बच्चों का भविष्य जुड़ा हुआ है।
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि 6 अप्रैल 2026 को थाना गोविंदपुर, अल्मोड़ा में एफआईआर संख्या 17/2026 दर्ज की गई, जिसमें अपूर्वा जोशी, उनकी पत्नी गीतिका क्वीरा, अजय कुमार जोशी और अन्य लोगों पर आईटी एक्ट की धारा 67 और 66E समेत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।
फाउंडेशन ने आरोप लगाया कि अपूर्वा जोशी पहले से एक आपराधिक मामले में दोषसिद्ध हैं। संस्था के अनुसार, पिथौरागढ़ की अदालत ने वर्ष 2022 में उन्हें दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने भी बरकरार रखा। हालांकि मामला वर्तमान में उत्तराखंड हाईकोर्ट में लंबित है और वहां केवल अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है।
संस्था के मुताबिक, विवाद की जड़ चैरिटेबल स्कूल की जमीन और भवनों को कथित रूप से अवैध तरीके से बेचने की साजिश है। इसी मामले में जनवरी 2026 में अदालत के आदेश पर एफआईआर संख्या 5/2026 दर्ज की गई थी। इसके बाद फरवरी 2026 में विद्यालय परिसर में कथित आगजनी की घटना हुई, जिसमें पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में एफआईआर संख्या 14/2026 दर्ज होने की बात कही गई है।
फाउंडेशन ने यह भी आरोप लगाया कि उसके खिलाफ सोशल मीडिया, पोस्टर, पर्चों और कथित फर्जी यूट्यूब वीडियो के जरिए दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि “मारो-पीटो”, “स्कूल पर बुलडोजर चलाओ” जैसे उकसाऊ संदेश प्रसारित किए गए और “The Sunday Post, UK” नामक विदेशी मीडिया संस्था का कथित फर्जी इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित किया गया।
फाउंडेशन का कहना है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित संगठित षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य चैरिटेबल संस्था की संपत्ति पर अवैध कब्जा करना है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह उच्चतम न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाएगी।



