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थैंक्यू साथियों, कार्यक्रम में शिरकत कर इसे अदभुत बनाने के लिए… मेरे कैमरे से कुछ तस्वीरें

(मुख्य वक्ता चर्चित आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव)

10 सितंबर की रात बहुत नर्वस था. ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था. कैसे होगा. क्या होगा…?? लेकिन जब 11 सितंबर को रात आठ बजे कार्यक्रम खत्म हुआ तो मैं चमत्कृत था. ठीक एक बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम जब शाम सात बजे तक खत्म न हो पा रहा था तो मजबूरन छह हजार रुपये देकर कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल की बुकिंग एक घंटे के लिए बढ़वा दिया. एक बजे से लेकर रात आठ बजे तक चले कार्यक्रम में लगभग पांच सौ लोग शामिल हुए. करीब सवा सौ लोग दिल्ली के बाहर से आए थे. जस्टिस मार्कंडेय काटजू को बुखार था, इसलिए नहीं आए. पर बाद में मुझे लगा प्रकृति जो कराती करवाती है, बिलकुल सोच समझकर और एक रणनीति के तहत. सही हुआ बुखार आ गया वरना वे आते तो प्रोग्राम रात 11 बजे तक चलता जिसे झेलने के लिए हॉल में कोई जनता न बचती.

(मुख्य वक्ता चर्चित आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव)

10 सितंबर की रात बहुत नर्वस था. ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था. कैसे होगा. क्या होगा…?? लेकिन जब 11 सितंबर को रात आठ बजे कार्यक्रम खत्म हुआ तो मैं चमत्कृत था. ठीक एक बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम जब शाम सात बजे तक खत्म न हो पा रहा था तो मजबूरन छह हजार रुपये देकर कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल की बुकिंग एक घंटे के लिए बढ़वा दिया. एक बजे से लेकर रात आठ बजे तक चले कार्यक्रम में लगभग पांच सौ लोग शामिल हुए. करीब सवा सौ लोग दिल्ली के बाहर से आए थे. जस्टिस मार्कंडेय काटजू को बुखार था, इसलिए नहीं आए. पर बाद में मुझे लगा प्रकृति जो कराती करवाती है, बिलकुल सोच समझकर और एक रणनीति के तहत. सही हुआ बुखार आ गया वरना वे आते तो प्रोग्राम रात 11 बजे तक चलता जिसे झेलने के लिए हॉल में कोई जनता न बचती.

कार्यक्रम के हीरो आईआरएस अफसर एसके श्रीवास्तव रहे. उन्होंने सिस्टम से लड़ने भिड़ने की अपनी कहानी, चिदंबरम – प्रणय राय के काले धन के खेल और मीडिया की नपुंसकता को जब विस्तार से उजागर किया गया तो स्पीकर हाल में बैठे श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो गए. ओम थानवी, एनके सिंह और आनंद स्वरूप वर्मा ने मीडिया को लेकर अपना अपना पर्सपेक्टिव रखा. आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी को पसंद किया गया तो वह थे ओम थानवी और आनंद स्वरूप वर्मा. एनके सिंह ने मीडिया के चाल चरित्र चेहरे पर उठाए गए कई किस्म के सवालों का जवाब देने की कोशिश की. 

किसने क्या कहा, सबका पूरा भाषण जल्द ही यूट्यूब पर अपलोड किया जाएगा. फिलहाल यह पोस्ट इसलिए लिख रहा हूं कि मैं दिल से उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं जो कार्यक्रम में शरीक हुए. ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी का गीत-संगीत सबको पसंद आया. प्रत्यूष पुष्कर अंतिम वक्ता के बतौर सबका ध्यान खींच ले गए. कृष्ण कल्पित ने शराबी की सूक्तियां सुनाकर खूब तालियां बटोरी. कार्यक्रम का उदघाटन लखनऊ से आए डेली न्यूज एक्टिविस्ट अखबार के चेयरमैन और शकुतंला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर निशीथ राय ने दीप जलाकर किया. कार्यक्रम से संबंधित अन्य खबरें विवरण जल्द ही भड़ास पर अपलोड किया जाएगा. तब तक मैंने खुद अपने कैमर से जो तस्वीरें लीं, उसे यहां दे रहा हूं.

(मुख्य वक्ता एसके श्रीवास्तव और मंचासीन वरिष्ठ पत्रकार त्रयी एनके सिंह, आनंद स्वरूप वर्मा और ओम थानवी)

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