भड़ास के 8वें बर्थडे समारोह में दूर प्रदेश से आए एक पत्रकार साथी की चिट्ठी

प्रिय भाई,

यह एक बेहतरीन कार्यक्रम था। इसे आपने जो स्वरूप दिया उसके लिए जितना कुछ कहा जाना चाहिए कम है। आप जानते हैं कि हम पत्रकारों की आदतें किनने और क्यों बिगाड़ी हैं। या तो हम पीआर कंपनियों के जरिए फाइव स्टार होटलों में जाते हैं, थोड़े बड़े पत्रकार हुए तो सरकारी सुविधाओं में अपना स्वाभिमान खूंटी पर टांग देते हैं, या एनजीओ मार्का कार्यक्रमों में अपने सरोकारी होने का लबादा ओढ़े सुविधाओं की एक अलग दुुनिया में होते हैं।

इसके विपरीत आपका जो कार्यक्रम मुझे लगा इससे बहुत उम्मीद दिखाई देती है। जिसे आना हो अपने खर्च पर आए, अपने पैसों से भोजन करे, सरोकारों को दिखाना है तो वह अपने तौर तरीकों से दिखाए, इस प्रक्रिया में यकीन मानिए मुझे बहुत मजा भी आया और अच्छा भी लगा। इसलिए हमारा जो समूह वहां जमा हुआ, वह शायद एक बहुत अलग तरह का समूह था। मैं तो कहता हूं कि ऐसे कार्यक्रमों को और देशज और अनौपचारिक और समाज के और करीब हमें करना चाहिए, किसी गांव खेड़ों में, टोलों मजरों में, दाल बाटी या लिट्टी चोखा खाते हुए भी क्या हम ऐसे सार्थक विमर्श को आंदोलन की तरह खड़ा कर सकते हैं।

कार्यक्रम को सुनते हुए जब मैंने पोस्टर को ध्यान से देखा और वक्ताओं को सुनते हुए जब थोड़ा सोचा तो मुझे लगा कि एक काम तो हो गया है। यह जो भड़ास का घूसा पोस्टर फाड़कर लोगों के चेहरे पर पड़ता है, उन्हें बेनकाब करता है, तो संभवत: जो काम आपने आठ साल पहले सोचा होगा, शायद वह पूरा कर पाने में आप कामयाब हुए हैं। हम संभवत: इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी हैं जो मीडिया के अंदरूनी मामलों की इतनी खबर रखते हैं, विचार रखते हैं, आलोचना रखते हैं। इससे पहले मीडिया के आलोचना के इतने मुखर, तेज और सशक्त माध्यम इतिहास में कभी नहीं हुए हैं। हां, उनकी शैलियां रही हैं, लेकिन इतनी प्रभावी और लोकतांत्रिक तो कभी भी नहीं रही। इसकी शुरुआत में कहीं न कहीं भड़ास ही है।

तो यह जो घूसा है न इसको अब जरा थोड़ा उठाकर ऊपर करिए। यानी अब वह वक्त भी आया मानिए जब यह घूसा उपर उठकर एकता में, एक ताकत में, एक संघर्ष में परिणित हो जाए। भले ही हम कुछ सौ दो सौ लोग हों, लेकिन वह पत्रकारिता के मूल्यों को और सामाजिक परिवर्तन के प​वित्र उद्देश्यों को निभाने में थोड़े भी कामयाब हो पाएं। यह जानते हुए भी कि हां संकट इतने बड़े हैं कि हम सौ दो सौ लोग क्या कर लेंगे, लेकिन हौसला है, हौसला है कि हारेंगे नहीं। रुकेंगे नहीं और झुकेंगे भी नहीं।

दूसरा, आपका जो घूसा दिखाई देता है इसकी मुद्रा थोड़ी सी बदलकर इसमें एक ‘कलम’ और दे दीजिए। हमने निश्चित ही मीडिया के अंदरूनी हालातों पर बेहतर काम किया है, लेकिन समाज के व्यापक मसलों पर भी क्या भड़ास अब आगे का सफर तय करेगा। क्या हम एक ऐसा मीडिया खड़ा नहीं कर सकते जो आज के बाजारू मीडिया पर एक घूंसा हो। मुझे लगता है कि आठ सालों के बाद अब यही चुनौती है। छोटा भाई समझकर मन में जो आया लिख दिया।

आपका
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(पत्रकार साथी ने नाम और पहचान न उजागर करने का अनुरोध किया है.)

भड़ास के आठ साल के कार्यक्रम में क्या क्या हुआ, जानने के लिए क्लिक करें : B4m8Year

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आखिर चाहते क्या हैं एनके सिंह?

“सात साल से झेल रहे हैं भड़ास को, निगेटिव, निगेटिव और निगेटिव। कुछ पाँजटिव भी सोचिए।” यह कहना था वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह जी का। एनके ने यह बात कही भड़ास4मीडिया के आठवें स्थापना दिवस पर। इतना ही नहीं उन्होंने फसल बीमा योजना को बहुत लाभकारी बताते हुए कहा कि इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है, कितने लोग हैं जिन्होंने इसके बारे में कुछ लिखा हो। एनके ने कहा कि आप लोग कुछ सकारात्मक भी करिये। ठीक यही बात हमारे पीएम साहब भी कहते हैं। मीडिया नकारात्मक ही दिखाता है। कम से कम एक खबर रोज सकारात्मक दिखाये। अब मोदीजी से उस तरह की उम्मीद नहीं कर सकते लेकिन एनके भाई से ऐसी उम्मीद थी नहीं।

न मेरे पास पत्रकारिता की डिग्री है और न डिप्लोमा। मेरे वरिष्ठ अक्सर कहा करते थे नकारात्मक ही खबर है। वे उदाहरण देते थे कुत्ता आदमी को काट ले यह खबर नहीं। क्योंकि उसका काम काटना है। आदमी कुत्ते को काट ले यह खबर है। भड़ास के आठवें स्थापना वर्ष पर कार्यक्रम की सूचना मिली खुशी हुई, उससे ज्यादा खुशी हुई अच्छे लोगों को सुनने का अवसर मिलने का। आनंद स्वरूप वर्मा को तो देखने की भी इच्छा थी। एकबार फिर कहूंगा कि एनके सिंह ने बहुत निराश किया। उनके कहे को कोई नेता कहता, अखबार का मालिक कहता तो भी बात समझ में आती। एनके जैसे वरिष्ठ और सुलझे (टीवी पर डिबेट के दौरान दिखने के आधार पर) पत्रकार ऐसा कहे तो हंसी आती है।

बहरहाल, शुरुआत में ही उन्होंने भड़ास को सात साल से झेलते रहने की बात कही। लगता है कि वे घर से यह तय करके आये थे कि शुरुआत इसी से करनी है। मुझे लगता है कि उन्होंने भड़ास को ठीक से पढ़ा नहीं है, जाना नहीं है। कुछ अपवाद को छोड़ दें, छोड़ इसलिए दें कि अपवाद उदाहरण नहीं होता तो भड़ास ने शोषित/उत्पीडि़त पत्रकारों के हक की ही बात की है। एनके बता दें कि किस अखबार या चैनल ने माडियाकर्मियों पर हो रहे दमन/ उत्पीड़न की खबरें छापी या अपने यहां दिखायी हो। मजीठिया वेजबोर्ड पर कोर्ट के किसी फैसले की जानकारी अपने पाठकों व दर्शकों को दी हो।

एमसीडी के सफाईकर्मियों को तीन माह से वेतन नहीं मिला इसकी खबर हर चैनल पर थी। सहारा मीडिया के कर्मचारियों को एक साल से बराबर वेतन नहीं मिल रहा था, किसी अखबार (राष्ट्रीय सहारा/समय टीवी) ने भी खबर नहीं छापी और न ही किसी खबरिया चैनल ने दिखाया। पी7 की हड़ताल को किसी ने तवज्जो नहीं दी। भड़ास ने न सिर्फ खबर छापी बल्कि यशवंत जी ने हिस्सा भी लिया। ताजा उदाहरण पत्रकारों के लिए गठित मजीठिया वेजबोर्ड का है। किसी समाचार पत्र (जो मजीठिया की चपेट में आता हो ) ने एक संक्षिप्त खबर भी छापी हो, एनके जी दिखा दें तो मैं उनकी गुलामी करूंगा। अब अगर भड़ास उसे छापता है या मालिकानों की बधिया उधेड़ता है और आप उसे नकारात्मक कहकर उसे झेलना कहते हैं तो आपकी सोच पर तरस आता है।

प्रसंगवश, भड़ास ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वालों को सम्मानित किया। इसमें से वे लोग भी हैं जिन्होंने मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ी, पत्रकारों को गोलबंद किया। भड़ास ने ऐसे लोगों का सम्मान किया। पत्रकारों को गोलबंद करने के लिए जिन-जिन लोगों ने जो-जो लिखा भड़ास ने उसे छापा, अपने यहां स्थान दिया। अगर भड़ास न छापता तो …? कहने का मतलब यह कि भड़ास का योगदान हम सबसे ज्यादा है।  काश इसे एनके भाई भी समझ पाते।

अरुण श्रीवास्तव
arun.srivastava06@gmail.com


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कार्यक्रम में कल्बे कबीर जी काव्य पाठ एक स्प्रिचुअल प्लीजर दे गया

कृष्ण कल्पित उर्फ कल्बे कबीर का काव्य पाठ…

डॉ. अजित : कल भाई Yashwant Singh जी के कार्यक्रम में दिल्ली गया था। भड़ास4मीडिया डॉट कॉम का आठवां स्थापना दिवस था। एक बहुत बढ़िया कार्यक्रम उन्होंने आयोजित किया। गीत संगीत विचार विमर्श कविता सत्संग इन सब के अलग अलग सेशन थे। कल भाई डॉ. नवीन रमण से दूसरी मुलाकात भी हुई हमने अच्छा वक्त साथ बिताया और एक शाम सत्संग करने के वादे पर हम विदा हुए।

कार्यक्रम में कल्बे कबीर जी काव्य पाठ एक कमाल का अनुभव था उन्होंने अपनी बहुचर्चित काव्य कृति शराबी की सूक्तियां का काव्य पाठ किया। उनको सुनना एक स्प्रिचुअल प्लीजर दे गया। अच्छी बात यह भी रही कि उन्होंने मेरी शक्ल देखते ही पहचान लिया और कहा अरे ! डॉ अजित !! फेसबुक की यही खूबसूरती है। उन्होंने अपनी एक सूक्ति सुनाने से पहले मंच से मेरा नाम लिया ये उनका बड़प्पन है जो इस नाचीज़ को तवज्जों नसीब हुई। कुल मिलाकर एक यादगार दिन रहा। शाम इथोपियन सांस्कृतिक केंद्र में बिताई गई वहां एक अन्य मित्र राजन सोलंकी जी सानिध्य प्राप्त हुआ। यारबाशी अड्डेबाजी और आउटिंग को कल का दिन समर्पित रहा।  सन्डे का इससे बढ़िया सदुपयोग और क्या हो सकता था भला।

पत्रकार, शिक्षक और कवि डा. अजित की एफबी वॉल से.

दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद प्रो. निशीथ राय ने दो शब्द कहे.

एडवोकेट परमानंद पांडेय ने कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों के संघर्षों का जिक्र किया.

Vivek Dutt Mathuria : भड़ास अब आठ साल का एक समझदार बालक हो चुका है, जो किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है। मीडिया हाउसों के शोषणकारी चरित्र को अनावृत करने के मिशन में ईमानदार पत्रकारों में संघर्ष के जज्बे को शक्ति और भरोसा देने का काम कर रहा है और काफिला बढ़ता जा रहा है। यशवंत भाई का एकला चलो का यह सफर अब एक इंकलाबी मिशन बन चुका है। बस हम सब की यह जिम्मेदारी बनती है कि पत्रकारों के संघर्ष का यह मिशन अपने व्यापक रूप में लोकतंत्र की रक्षा का ही मिशन बना रहे।

पत्रकार विवेक दत्त मथूरिया की एफबी वॉल से.

कार्यक्रम में ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपने गायन से सबका मन मोहा…

Dhyanendra Tripathi : Such a great & auspicious audience. I was truly humbled by the compliments I received post my performance. Our great Guitarist Ripple Barua sizzles in the event whereas our Key board band leader Dipak Singh Dipu dazzled in the event. Viththal Bhai rocked on Naal and Parwez bhai popped up with stunning drum beats.

A 90 minutes without pause solo singing was a bouquet of Sufi, Bhojpuri Folk, Bollywood Oldies, Bollywood Modern & Contemporary songs by me. Thanks dear Bhargava Musicwala for arranging & managing sound for us during the event. Thanks Yashwant Singh brother for your kindness and trust in us. We’ll rock again..

एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पद पर आसीन ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी की एफबी वॉल से. ध्यानेंद्र ने भड़ास के कार्यक्रम में म्यूजिक बैंड को लीड किया और अपने गानों से सबका दिल जीत लिया.

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यकीन मानिए, इतना अदभुत कार्यक्रम मैंने अपने जीवन में पहले नहीं देखा…

Ashwini : मैं भी दिल्ली के काँस्टिट्यूशन क्लब में आयोजित भडास4मीडिया के आठवें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शरीक हुआ…यकीन मानिए इतना अदभुत कार्यक्रम मैंने अपने जीवन में पहले नहीं देखा..जिन कर्मयोगियों को हम जानते तक नहीं उन्हें भडास के यशवंत भाई ने देश के कोने-कोने से खोजकर सम्मानित किया..ये सच है कि जिसका नाम होता है उससे हर कोई नाता जोड़ता है लेकिन यशवंत भाई ने तमाम तकलीफों को झेलकर समाज के हित में काम करने वाले पत्रकारों को दिग्गजों के हाथों सम्मानित कराया..वाकई कमाल की बात है..

यही नहीं, ओम थानवी जी, एन के सिंह जी, आनंद स्वरुप वर्मा जी ने मीडिया के वर्तमान स्वरूप को लेकर जो बातें कही वो दिल की गहराई तक उतर गईं…मीडिया और काले धन को लेकर सीनियर आईआरएस अधिकारी और नोएडा के इनकम टैक्स कमिश्नर एस के श्रीवास्तव ने जो सवाल दागे वो भी सोचने पर मजबूर कर गया..मीडिया और अध्यात्म कैसे एक दूसरे के पूरक हैं इस पर युवा दार्शनिक प्रत्यूष पुष्कर ने भी अपने जवाब से मंत्रमुग्ध कर दिया तो कवि कृष्ण कल्पित ने शराबी की सूक्तियां और ध्यानेंद्र मणि के गीत संगीत को भी लंबे वक्त तक कार्यक्रम में मौजूद लोग भूल नहीं पाएंगे…

आखिर में यशवंत भाई, मेरी भी एन के सिंह सर की तरह ही आपसे गुजारिश है कि आप अपने पोर्टल पर पत्रकारिता में करियर बनाने के इच्छुक बच्चों के लिए ज्ञानवर्द्धक जानकारियां भी पोस्ट किया करें यही नहीं मीडिया हाउस के संपादकों की अच्छी बातों को भी सबके सामने लाएं…

टीवी जर्नलिस्ट अश्विनी की एफबी वॉल से.

कार्यक्रम में हुआ क्या क्या, कौन लोग आए, क्या बोले… विवरण और तस्वीरों के लिए नीचे के शीर्षकों पर क्लिक करें….

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भड़ास के कार्यक्रम में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा की बात ने

भड़ास मतलब, दिल की भड़ास, फिर उसके बाद कुछ नहीं

दीपक खोखर

नई दिल्ली । हर किसी के मन में कभी न कभी ऐसी भड़ास पैदा होती है, जो निकलनी जरूरी होती है। कम से एक पत्रकार के मन में तो यह भड़ास उठती ही रहती है। मेरे मन में भी उठी और बार-बार उठी और इस भड़ास को निकालने का जरिया बना भड़ास 4 मीडिया डॉट कॉम या फिर कहूं यशवंत भाई। यशवंत जिससे कभी कोई खास जान-पहचान या मुलाकात नहीं थी और आज भी उतनी नहीं है, लेकिन जो सम्मान वो मेरी भड़ास को देते हैं, उसको सलाम करता हूं। जो प्लेटफार्म यशवंत ने खड़ा किया, उससे दिल और दिमाग को काफी शांति मिली। अब ये तो याद नहीं कब शुरूआत हुई, लेकिन पिछले कुछ साल से यशवंत भाई का शुक्रगुजार हूं, जो उनकी बदौलत भड़ास निकालने का मौका मिला।

ये बात उस समय की है जब मैं रोहतक में दैनिक भास्कर में था। शुरूआत में यशवंत ने इसे ब्लॉग के रूप में शुरू किया और फिर पोर्टल। कब भड़ास से जुड़ाव पैदा हो गया, पता ही नहीं चला। जब भी कभी मन में मीडिया या मीडिया कर्मियों को लेकर कोई भड़ास पैदा हुई, तुरंत यशवंत भाई की ई मेल पर भेजी और प्रकाशित भी हो गई। इस बात के लिए यशवंत का शुक्रगुजार हूं, शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जब जो मैने लिखकर भेजा, वो हू ब हू प्रकाशित न हुआ हो। फिर तो लगातार ये सिलसिला जारी है। जब भी कोई भड़ास हुई, यशवंत भाई को मेल भेजी और तुरंत प्रकाशित हो गई।

यशवंत भाई से मेरी मुलाकात शायद दो साल पहले भड़ास के ही एक कार्यक्रम में हुई थी। एक दो बार हो सकता है इससे पहले मोबाइल पर बात हुई हो, लेकिन याद नहीं। भड़ास को कई बार आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा, मदद करनी भी चाही, लेकिन खुद की आर्थिक स्थिति कभी ऐसी नहीं रही, लेकिन फिर भी उम्मीद है किसी दिन इस स्थिति में आ जाऊंगा। भड़ास 4 मीडिया को आठ साल हो चुके हैं और इस दौरान अनेक चुनौतियों और दिक्कतों का सामना यशवंत भाई को करना पड़ा। बीच में जेल में दिन काट आए, बाहर आए और जानेमन जेल लिख डाली। गज़ब और कमाल का व्यक्ति है यशवंत।

11 सितंबर को भड़ास का आठवां जन्मदिन था। किसी को शायद, मैं गलत हो भी सकता हूं, व्यक्तिगत न्यौता नहीं रहा होगा। सबके लिए दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में कार्यक्रम रखा गया। जहां से भी हो सकता था पत्रकार और पत्रकारिता को जानने वाले लोग पहुंचे। रविवार का दिन था, मैं भी पूरा समय निकालकर ठीक समय से कार्यक्रम में पहुंच गया। यशवंत भाई से दुआ सलाम किया और फिर एक जगह पर आराम से बैठ गया।  गीत-संगीत और काव्य पाठ भी रखा गया।

इस दौरान पत्रकारिता से जुड़े गंभीर विषयों पर चर्चा भी हुई। वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा, ओम थानवी, एनके सिंह और आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव के विचारों से रूबरू होने का मौका मिला। श्रीवास्तव जी ने मीडिया और काला धन को लेकर जो खुद का अनुभव सांझा किया, उससे रोंगटे खड़े हो गए। जिस एनडीटीवी चैनल को हम सब अब तक साफ सुथरा मानते रहे हैं, उसकी बुनियाद व इमारत काला धन पर खड़ी है और इसमें देश के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का काला धन लगा हुआ है। इस पर पूरी बात श्रीवास्तव जी ने रखी। यही नहीं, श्रीवास्तव को अपनी बेबाकी के लिए 6 बार चार्जशीट तक किया गया और नौकरी से निकालने की तैयारी कर ली गई, लेकिन डटे रहे और सुप्रीम कोर्ट तक केस जीतकर आए। 

इसके अलावा एनके सिंह ने जहां नपी तुली बात कही, वहीं ओम थानवी ने अपने उसूलों के मुताबिक बात रखी। लेकिन जो सबसे ज्यादा मुझे प्रभावित किया, वो वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप वर्मा की बात ने किया। जिस तरीके से उन्होंने मीडिया में कमियों को उजागर किया और यहां तक कह दिया कि मौजूदा समय में कोई उम्मीद कम ही नज़र आती है, वह कहने की हिम्मत कम ही लोगों में नज़र आती है। कम से कम 11 सितंबर का दिन खास रहा और पूरी तरह भड़ास के नाम समर्पित रहा। कार्यक्रम में कुछ मित्रों से भी मुलाकात हुई, जिनसे काफी समय हो गया था, मुलाकात किए हुए। आखिर में यशवंत भाई की भड़ासी टीशर्ट ली व फिर वहीं पर पहन कर और यशवंत भाई को दुआ सलाम कर रोहतक के लिए निकल आया। अब के लिए इतना ही, बाकी किश्त बाद में, अगर मन हुआ और कुछ भड़ास हुई तो ही।

दीपक खोखर
09991680040
khokhar1976@gmail.com


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कार्यक्रम की कुछ अन्य तस्वीरें देखिए…..

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भड़ास के कार्यक्रम में जब ‘शेम शेम’ की आवाजें उठने लगीं….

(भड़ास की आठ साल की यात्रा पर 52 पृष्ठ की एक स्मारिका का विमोचन करते मंचासीन विशिष्ट जन. इस स्मारिका में भड़ास और यशवंत के सुख-दुख की चर्चा विस्तार से की गई. साथ ही यात्रा में आए उतार चढ़ावों के बारे में बताया गया है. इसमें यशवंत के लिखे कुछ पुराने आलेखों, इंटरव्यू आदि का संग्रह भी है)

कांस्टीट्यूटशन क्लब में भड़ास4मीडिया की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में मीडिया की मौजूदा भूमिका और उससे अपेक्षाओं पर अच्छी चर्चा हुई। शुरुआत ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी के म्यूजिक बैंड से हुई। श्री त्रिपाठी ने हिन्दी, भोजपुरी, फिल्मी गानों के साथ सूफी और लोक गीतों का शानदार समां बांधा। जलपान के बाद व्याख्यान और सम्मान खंड की शुरुआत हुई। भड़ास के संपादक यशवंत सिंह ने भिन्न क्षेत्रों में अलग तरह के काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया।

पत्रकारिता छोड़कर उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक काम करने वाले अखबार कर्मचारियों के वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने के लिए लड़ने वाले योद्धाओं या “वन मैन आर्मी” और समाज सेवा से लेकर आईटीआई आदि के क्षेत्र में देश भर में अकेले मिशन भाव से काम करने वाले कई लोगों को सम्मानित किया और दूर-दराज के आए इन लोगों को सम्मानित करते हुए यशवंत ने कहा वह इसे अपना सम्मान मानते हैं। इन लोगों और इनके काम के बारे में भड़ास पर पहले प्रकाशित किया जा चुका है। आज उसका ऑडियो विजुअल प्रेजेंटेशन भी किया जाना था जो समय कम होने के कारण नहीं हो सका लेकिन जल्द ही उसे भी भड़ास पर अपलोड किया जाएगा।

यशवंत की इन अनूठी विशेषताओं को देखते हुए मौजूद वक्ताओं में एक, पत्रकार एवं ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एनके सिंह ने प्रस्ताव किया कि यशवंत का भी सम्मान किया जाना चाहिए और एक गुलदस्ता देकर उन्हें भी सम्मानित किया गया। सबसे पहले मीडिया और काला धन पर भारतीय राजस्व सेवा के चर्चित अधिकारी एसके (संजय कुमार) श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे और अपना अनुभव बताया। इसमें उन्होंने बताया कि एक मीडिया संस्थान (उन्होंने नाम नहीं लिया पर यशवंत ने बाद में साफ कर दिया कि बात एनडीटीवी की हो रही थी) में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के कथित धन के निवेश और इससे संबंधित जांच के कारण उन्हें किन परेशानियों से जूझना पड़ा। इसमें तबादले के साथ-साथ छह बार मुअत्तल करना, नौकरी से बर्खास्त करने के प्रावधान का उपयोग किया जाना और अंत में पागल घोषित करके मानसिक अस्पताल में दाखिल करा दिया जाना शामिल है। उन्होंने बताया कि वे इन सबसे कैसे लड़े और कैसे मीडिया तथा सत्ता की ताकत का दुरुपयोग किया गया।

आयोजन के मुख्य वक्ता आईआरएस संजय कुमार श्रीवास्तव.

एसके श्रीवास्तव को तन्मय होकर सुनते लोग.

मीडिया के भड़ासी साथियों ने इसे गौर से सुना, ताली बजाई और चिदंबरम-प्रणय राय को शेम-शेम कहकर एसके श्रीवास्तव का हौसला बढ़ाया। एनडीटीवी में पी चिदंबरम के निवेश की चर्चा, काले धन और वित्तीय अनियमितताओं की चर्चा होती रहती है। एनडीटीवी ने इस पर स्पष्टीकरण भी दिए हैं। पर राजस्व सेवा के अधिकारी ने जो कहा और उनके साथ जो सलूक हुआ वह, गडबड़ी नहीं होती तो आमतौर पर नहीं किया जाता। श्री श्रीवास्तव ने इस पर कहा कि आमतौर पर कारोबारी सरकारी अफसर से झगड़ा नहीं करते और ले-दे कर निपटाने के अलावा ऊपर अपील आदि का सहारा लेते हैं लेकिन वे किसी से झगड़ा नहीं करते। नाक का सवाल नहीं बनाते। उन्होंने नाम नहीं लिया और कहा कि चूंकि यह मामला एक बड़े पत्रकार से जुड़ा था इसलिए उसने नाक का सवाल बना लिया और इसमें सरकार ने मीडिया संस्थान का भरपूर साथ दिया। श्रोताओं में ज्यादातर मीडिया के लोग थे इसलिए उनके नाम न लेने के बावजूद समझ रहे थे, जानते थे कि बात किसकी हो रही है।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने पत्रकारिता की आजादी पर अपने विचार रखे और कहा कि आजादी लगातार कम हो रही है और बहुत कम हो गई है। उन्होंने कुछ उदाहरण दिए और यह तय करना श्रोताओं पर छोड़ दिया कि आजादी कितनी कम हुई है या है ही नहीं। इस क्रम में उन्होंने कहा कि पहले अखबार मालिकों का दूसरा धंधा नहीं होता था और अब दूसरे धंधे वालों के ही अखबार हैं। किसी का नाम लिए बगैर कहा कि संपादक अगर संपादन नहीं कर रहे हैं और उनका नाम संपादक के रूप में जा रहा है तो वे अपने नाम का उपयोग करने दे रहे हैं। और यह भी गलत है। ओमथानवी ने कहा कि रिलायंस जियो के विज्ञापन में प्रधानमंत्री की फोटो का उपयोग किया जाना गलत है पर पत्रकार का नाम संपादक के रूप में जाए और वह संपादक के अलावा दूसरे काम भी करे तो यह भी गलत है।

पत्रकार एवं ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के महासचिव एनके सिंह ने मीडिया की स्थिति बताते हुए यह यकीन दिलाने की कोशिश की कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है जितनी हम समझते हैं या बना दी गई है। इस क्रम में उन्होंने कहा कि भड़ास 4 मीडिया सिर्फ नकारात्मक खबरें प्रकाशित करता है और उसे झेलते हुए आठ साल हो गए। पता नहीं कब तक झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भड़ास को सकारात्मक खबरें भी देना चाहिए। भावी पत्रकारों के लिए जानकारी देना चाहिए आदि। इस क्रम में उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन लगातार कई दिनों तक कवर किया गया था और वह सरकार के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि फिल्मी और दूसरी खबरें कम हुई हैं राजनीतिक खबरों का प्रसारण बढ़ा है आदि।

उन्होंने कहा कि समाज को जानकारी देने और राय बनाने में सहायता करने के लिए चर्चा वाले कार्यक्रम कराए जाते हैं। वह पूरी तरह सफल या अच्छा नहीं है पर उसका मकसद अच्छा है। उन्होंने यहा भी कहा कि टीवी समाज को काफी कुछ सकारात्मक दे रहा है जिसकी चर्चा नहीं होती है औऱ सिर्फ नकारात्मक बातें बताई जाती हैं। उन्होने यह भी बताया कि नए उम्मीदवार कैसे आते हैं और उन्हीं में से काम के लोगों को चुनना पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा खेती पर आश्रित है लेकिन उसपर खबरें नहीं होती हैं। इसपर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

समकालीन तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने श्री सिंह से असहमति जताई और कहा कि स्थिति निराशाजनक है। लगातार खराब हो रही है। मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है पर अपने उद्देश्य में बिल्कुल असफल है। उसका काम तीन अन्य स्तंभों पर नजर रखना है पर वह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि ठीक होने की संभावना नहीं लगती। उन्होंने बताया कि वे 50 वर्षों से सिर्फ पत्रकारिता कर रहे हैं और उनके सामने पत्रकारिता सीखने वाले अब कई गुना पैसे कमाने लगे हैं। उनके अपने खर्चे हैं। उन्हें किस्तें चुकानी हैं। इसलिए वे कमाएंगे, कमा रहे हैं।

अपनी पत्रिका के बारे में उन्होंने बताया कि कई बार उसका प्रकाशन धनाभाव के कारण रोकना पड़ा है। पर 2010 से नियमित प्रकाशित हो रहा है और अब पाठक ही उसका खर्च देते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया अपना काम ठीक नहीं कर रहा है तो उसपर नजर रखने के लिए एक पांचवां स्तंभ बनाना चाहिए। जो मीडिया को उसकी गलतियां बताए। एनके सिंह की बात काटते हुए उन्होंने कहा कि अन्ना आंदोलन को लगातार कवर किया जाना तय योजना का हिस्सा था।

व्याख्यान के बाद अंतिम सत्र में कृष्ण कल्पित ने शराबी की सूक्तियां शीर्षक के तहत कविता पाठ किया। लोगों ने इसका भी खूब आनंद लिया। आखिर में जेएनयू से पढ़े, कई किस्म के प्रयोग कर चुके प्रत्यूष पुष्कर ने मीडिया और आध्यात्म पर अपनी बात रखी औऱ जीवन को एक यात्रा कहा। आध्यात्म मतलब बताया कि वह जो आपको आजाद करे किसी भी बंधन में न रखे, उससे मुक्त करे को कहा। उन्हें बेहद मौलिक बातें रखीं और लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट. ANUVAAD COMMUNICATION के हेड Sanjaya Kumar Singh से संपर्क 9810143426 के जरिए किया जा सकता है.

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कार्यक्रम का संचालन करते यशवंत और यशवंत को पुरस्कृत करते मंचासीन विशिष्ट जन व दूसरे प्रदेशों से आए पत्रकार साथी.

 

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भड़ास मीडिया सरोकार सम्मान से सम्मानित होते साथियों की तस्वीरें देखें

भड़ास4मीडिया के आठवें स्थापना दिवस के मौके पर 11 सितंबर 2016 को कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में देश के कोने कोने से आए सैकड़ों पत्रकार साथियों के बीच चुनिंदा पत्रकार साथियों और कुछ अन्य विशिष्ट लोगों भड़ास मीडिया सरोकार एवार्ड से सम्मानित किया गया. इस मौके की कुछ तस्वीरें यहां प्रकाशित की जा रही हैं. जिन भी साथियों को ये तस्वीरें हाई पिक्सेल में चाहिए, वे yashwant@bhadas4media.com पर मेल कर सकते हैं.


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इन शीर्षकों पर क्लिक करके इस आयोजन और इसमें सम्मानित होने वालों की खासियत के बारे में जान सकते हैं….

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थैंक्यू साथियों, कार्यक्रम में शिरकत कर इसे अदभुत बनाने के लिए… मेरे कैमरे से कुछ तस्वीरें

(मुख्य वक्ता चर्चित आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव)

10 सितंबर की रात बहुत नर्वस था. ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था. कैसे होगा. क्या होगा…?? लेकिन जब 11 सितंबर को रात आठ बजे कार्यक्रम खत्म हुआ तो मैं चमत्कृत था. ठीक एक बजे से शुरू हुआ कार्यक्रम जब शाम सात बजे तक खत्म न हो पा रहा था तो मजबूरन छह हजार रुपये देकर कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल की बुकिंग एक घंटे के लिए बढ़वा दिया. एक बजे से लेकर रात आठ बजे तक चले कार्यक्रम में लगभग पांच सौ लोग शामिल हुए. करीब सवा सौ लोग दिल्ली के बाहर से आए थे. जस्टिस मार्कंडेय काटजू को बुखार था, इसलिए नहीं आए. पर बाद में मुझे लगा प्रकृति जो कराती करवाती है, बिलकुल सोच समझकर और एक रणनीति के तहत. सही हुआ बुखार आ गया वरना वे आते तो प्रोग्राम रात 11 बजे तक चलता जिसे झेलने के लिए हॉल में कोई जनता न बचती.

कार्यक्रम के हीरो आईआरएस अफसर एसके श्रीवास्तव रहे. उन्होंने सिस्टम से लड़ने भिड़ने की अपनी कहानी, चिदंबरम – प्रणय राय के काले धन के खेल और मीडिया की नपुंसकता को जब विस्तार से उजागर किया गया तो स्पीकर हाल में बैठे श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो गए. ओम थानवी, एनके सिंह और आनंद स्वरूप वर्मा ने मीडिया को लेकर अपना अपना पर्सपेक्टिव रखा. आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी को पसंद किया गया तो वह थे ओम थानवी और आनंद स्वरूप वर्मा. एनके सिंह ने मीडिया के चाल चरित्र चेहरे पर उठाए गए कई किस्म के सवालों का जवाब देने की कोशिश की. 

किसने क्या कहा, सबका पूरा भाषण जल्द ही यूट्यूब पर अपलोड किया जाएगा. फिलहाल यह पोस्ट इसलिए लिख रहा हूं कि मैं दिल से उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं जो कार्यक्रम में शरीक हुए. ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी का गीत-संगीत सबको पसंद आया. प्रत्यूष पुष्कर अंतिम वक्ता के बतौर सबका ध्यान खींच ले गए. कृष्ण कल्पित ने शराबी की सूक्तियां सुनाकर खूब तालियां बटोरी. कार्यक्रम का उदघाटन लखनऊ से आए डेली न्यूज एक्टिविस्ट अखबार के चेयरमैन और शकुतंला मिश्रा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर निशीथ राय ने दीप जलाकर किया. कार्यक्रम से संबंधित अन्य खबरें विवरण जल्द ही भड़ास पर अपलोड किया जाएगा. तब तक मैंने खुद अपने कैमर से जो तस्वीरें लीं, उसे यहां दे रहा हूं.

(मुख्य वक्ता एसके श्रीवास्तव और मंचासीन वरिष्ठ पत्रकार त्रयी एनके सिंह, आनंद स्वरूप वर्मा और ओम थानवी)

अगली तस्वीर देखने के लिए नीचे क्लिक करें>>

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आज है भड़ास का 8वां स्थापना दिवस समारोह, समय- 12 बजे, स्थान- कांस्टीट्यूशन क्लब

दबंग पत्रकारिता के आठ साल पूरे करने वाले भड़ास4मीडिया का स्थापना दिवस समारोह आज रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल में दिन में 12 बजे से शुरू होगा और छह बजे तक चलेगा. कार्यक्रम की शुरुआत संगीत और जलपान से होगा. सूफी, फोक और पुराने फिल्मी गाने पेश करेगा ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी के नेतृत्व वाला म्यूजिक बैंड. इस दौरान सबके लिए जलपान की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी. संगीत और जलपान दोनों का समापन ठीक डेढ़ बजे हो जाएगा.

इसके बाद कई सनसनीखेज जानकारियों भरा व्याख्यान सत्र शुरू होगा जिसमें शिरकत करेंगे चर्चित आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव, जस्टिस मार्कंडेय काटजू, ओम थानवी, एनके सिंह और आनंद स्वरूप वर्मा.

इसके ठीक बाद भड़ास स्थापना दिवस के लिए खास तौर पर तैयार विशेष स्मारिका और टी शर्ट का लोकार्पण व वितरण किया जाएगा.

आंतरिक ज्ञान और स्किल डेवलपमेंट पर केंद्रित दूसरे सत्र में जेएनयू से पढ़े-लिखे व कई किस्म के प्रयोग कर चुके एक अदभुत व्यक्तित्व प्रत्यूष पुष्कर मीडिया और अध्यात्म के जरिए आंतरिक जीवन यात्रा को लेकर बेहद मौलिक बात रखेंगे जो कइयों के लिए प्रेरणादाई साबित होगा.

इसके बाद यूट्यूब विशेषज्ञ और चर्चित सोशल मीडिया चेहरा अभिषेक मिश्रा यू्ट्यूब के माध्यम से लाखों रुपये कमाने के अपने खुद के अनुभव के बारे में विस्तार से बताएंगे. फिर भड़ास4मीडिया के टेक्निकल डायरेक्टर और वेब विशेषज्ञ दिवाकर सिंह एक प्रजेंटेशन के जरिए वेबसाइट संचालित करने वालों को एक खास वेब ज्ञान देंगे.

तीसरे और आखिरी सत्र में सम्मान होगा कई क्षेत्रों में नया काम करने वालों, लीक से हटकर राह चुनने वालों और नौकरी से नाता तोड़ उद्यमिता में सफलता हासिल करने वालों को ‘भड़ास मीडिया सरोकार सम्मान 2016’ से नवाजा जाएगा. कुछ सम्मानित साथी प्रोजक्टर पर अपने कामकाज और उसकी सफलता के बारे में बताएंगे. कार्यक्रम का समापन दूरदर्शन के वरिष्ठ अधिकारी कृष्ण कल्पित अपनी रचना ‘शराबी की सूक्तियां’ के पाठ से करेंगे.

इस कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क है. सीमित सीटों वाले स्पीकर हॉल में बैठने की व्यवस्था पहले आओ पहले पाओ के आधार पर है. कार्यक्रम समय से शुरू होगा और समय से खत्म हो जाएगा.

कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए शीर्षकों पर क्लिक करें :

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (7) : कुमार सौवीर, बृज भूषण दूबे और आशीष गुप्ता होंगे सम्मानित

11 सितंबर 2016 यानि इसी रविवार के दिन दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में कुमार सौवीर, बृज भूषण दूबे और आशीष गुप्ता का भी सम्मान किया जाएगा. ये तीन लोग अपनी तीन अलग-अलग किस्म की अदभुत प्रतिभाओं के लिए विख्यात हैं. ये तीनों अपने अपने धुन और लय के धनी हैं. ये तीनों भले ही यूपी के हैं लेकिन अलग-अलग कोनों के निवासी हैं और अलग-अलग फील्ड में सक्रिय हैं. पहले बात कुमार सौवीर की.

तपाक से सच सच बोल लिख देने का साहस उर्फ कुमार सौवीर

लखनऊ के रहने वाले कुमार सौवीर इन दिनों सबसे बेबाक पत्रकार माने जाते हैं. उन्होंने दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, महुआ न्यूज समेत कई अखबारों न्यूज चैनलों में नौकरी की लेकिन उन्होंने नौकरियां इसीलिए छोड़ दी या यूं कहिए कि इस्तीफा प्रबंधन के मुंह पर दे मारा क्योंकि उन्हें कंटेंट से समझौता पसंद नहीं, उन्हें दलाली पसंद नहीं, उन्हें लल्लो-चप्पो पसंद नहीं. सही मायने में कहा जाए तो कुमार सौवीर एक सच्चे कलम के सिपाही की तरह वही लिखते बोलते रहे जो उन्हें खुद सच लगता है. कई बार इस कारण वह अतियों की सीमा को छू देते हैं जिससे उनके इर्द-गिर्द के लोग भी उनसे नाराज हो जाते हैं लेकिन इन सबसे बेपरवाह कुमार सौवीर अपने अंदाज, अपनी जीवनशैली, अपने तरन्नुम को जारी रखते हैं, जीते रहते हैं.

पिछले कई बरस से भड़ास4मीडिया, फेसबुक, मेरी बिटिया डाट काम समेत कई पोर्टलों और कई अखबारों में अनवरत जमीनी सच्चाई को लिख रहे कुमार सौवीर भले ही स्वास्थ्यगत कारणों से परेशान रहते हों, आर्थिक मोर्चे पर दिक्कतें झेलते रहते हों लेकिन इससे कलम के तेवर पर कोई फरक नहीं पड़ता. मेरी बिटिया डाट काम खुद कुमार सौवीर की वेबसाइट है जिस पर वह ऐसी ऐसी बातें खबरें खुलासे करते रहते हैं जिसे आमतौर पर मीडिया के लोग जानबूझ कर इगनोर कर देते हैं. खुद्दार और सरोकारी कुमार सौवीर ने पिछले कुछ बरस में वेब जर्नलिज्म के माध्यम से सरोकारी व साहस की पत्रकारिता का जो मोर्चा लखनऊ में अकेले दम पर संभाले रखा है, उसका दूसरा उदाहरण वहां देखने को नहीं मिलता. कुमार सौवीर को सम्मान देकर भड़ास4मीडिया खुद सम्मानित करता है.

कुमार सौवीर की लेखनी के बारे में ज्यादा जानने के लिए आगे दिए लिंक पर क्लिक करें : KS on Bhadas

कुमार सौवीर से फेसबुक पर दोस्ती करने और उनका लिखा पढ़ने के लिए क्लिक करें : https://www.facebook.com/kumarsauvir


गरीबों का मसीहा : एक नेत्रहीन दंपति शौच के लिए खुले में किस तरह बाहर जाता है, उसकी समस्या जानने उसके घर पहुंचे बृज भूषण दुबे (दाहिने से दूसरे)

बृज भूषण दूबे पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के निवासी हैं. उनका रोज का एकमात्र कार्यक्रम होता है, समाज-देश हित में सोचना और उसकी जमीन पर रुपांतरण कर देना. बेहद गरीब लोगों की समस्याओं को मीडिया, प्रशासन और सरकार के संज्ञान में लाने का एक मुश्किल लेकिन जरूरी काम करने वाले बृज भूषण दुबे वैसे तो चुनाव भी लड़ते हैं लेकिन हार जीत से बेपरवाह वह समाजसेवा को अपना मिशन बनाए हुए लगातार सक्रिय हैं. गाजीपुर में पुलिस, प्रशासन और नेताओं के बीच जब बृजभूषण दुबे का नाम लिया जाता है तो लोग मानते हैं कि यह शख्स किसी दूसरी मिट्टी का बना है.

दर्जनों मामलों पर आरटीआई के जरिए बड़े खुलासे करने वाले बृजभूषण दुबे खुद एक अच्छे पत्रकार भी हैं. वह मीडिया के साथियों को लगातार इंस्पायर करते हैं कि उन्हें उन जरूरतमंदों के लिए जरूर लिखना लड़ना चाहिए जिनका कोई रिश्तेदार प्रभावशाली नहीं, जिनका कोई सोर्स सिफारिश सिस्टम में नहीं, जिनके साथ कोई लड़ने खड़ा होने वाला नहीं. बृजभूषण दुबे का नेटवर्क अब इतना बड़ा और मजबूत हो गया है कि किसी भी गांव में अगर कोई भुखमरी का शिकार है, कोई आंख से वंचित होने के बावजूद सरकारी लाभ नहीं पा रहा, किन्हीं को किसी भी किस्म की अर्जेंट टाइप भीषण समस्या समस्या है तो उसकी सूचना दुबे जी तक पहुंच जाती है. वे अपने साथियों की टीम लेकर मौके पर पहुंच जाते हैं. समस्याग्रस्त गरीब लोगों की तस्वीरें खींचते हैं, बाइट लेते हैं, वीडियो बनाते हैं, उनके दस्तावजे देखते हैं और यह सब करने के बाद उनकी लड़ाई जिला मुख्यालय जाकर लड़ने लगते हैं.

दूबे जी को देखते ही अफसर यह मान लेते हैं कि जरूर यह बेहद जरूरी काम होगा, इसीलिए वे अफसर तुरंत उस काम को कर जरूरतमंद को न्याय देने के लिए तत्पर हो जाते हैं. बृजभूषण दुबे जैसा सक्रिय और सरोकारी हर आदमी हो जाए तो इस देश में कोई समस्या ही न रहे. दुबे जी को 11 सितंबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सम्मानित कर संघर्ष करते रहने की पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपरा को प्रणाम करता है.

भड़ास पर छपी ये कुछ खबरें पढ़ सकते हैं…

बृजभूषण दुबे के बारे में ज्यादा जानकारी उनके फेसबुक एकाउंट के जरिए जान सकते हैं, क्लिक करें : https://www.facebook.com/brajbhushan.dubey.3


(आशीष गुप्ता, फाउंडर- मिक यू बिग)

आशीष गुप्ता साल भर पहले तक उन लाखों सामान्य से पत्रकारों में से एक थे जो अखबारी या चैनल की नौकरी कर किसी तरह अपना पेट पालते थे, साथ ही ढेर सारे अधूर सपने लिए दिन महीने साल गुजारे जा रहे थे. आशीष को साल भर पहले अचानक दिव्य ज्ञान मिला. ज्ञान ये कि बहुत हो गई नौकरी. अब अपना काम. सिर्फ अपना काम. उन्होंने दैनिक जागरण की नौकरी को नमस्ते किया. एक कंपनी बनाई ‘मेक यू बिग’. यानि कंपनी का नाम ऐसा जो दावा करे कि हम आपको बड़ा बनाएंगे. आशीष सच में ऐसा ही कर रहे हैं. उनके क्लाइंट नेता होते हैं. नेता कभी नहीं चाहते कि वे चुनाव हार जाएं. अगर वो चुनाव हार गए तो ‘बिग’ न बन पाएंगे, न रह पाएंगे. आशीष ने यूपी विधानसभा के आगमी चुनावों को ध्यान में रखकर वोटर्स के सर्वे के कुछ साफ्टवेयर बनवाए. सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया. वोटर आईडी कार्ड से वंचित लोगों को टारगेट किया. अपना इलाका छोड़कर दूर शहरों में नौकरी करने वालों का डाटाबेस बनाया. इस तरह उन्होंने एक पूरा पैकेज तैयार किया चुनाव लड़ने वाले नेताओं के लिए. आशीष की कंपनी इन दिनों दो दर्जन से ज्यादा वर्तमान या पूर्व विधायकों-सांसदों के लिए काम कर रही है.

इस कंपनी में अभी करीब छह दर्जन लोगों को रोजगार मिला हुआ है जिसमें दो दर्जन तो ऐसे हैं जो हाल-फिलहाल तक पत्रकार थे और अब आशीष की कंपनी के साथ कंधा से कंधा मिलाए हुए हैं. असल में आशीष उस प्रतिभा का नाम है जिसने तकनीक, समझ, पीआर, कंटेंट और टारगेट को एक साथ समझ कर समय से मिक्स कर दिया और एक नया प्रोडक्ट लांच कर दिया. विधायक या सांसद का चुनाव लड़ने वाला एक नेता अपने इलाके से कैसे कनेक्ट रह सकता है, कैसे फीडबैक पा सकता है, कैसे दूर शहरों में रह रहे लोगों के दिलों में बस सकता है, कैसे वोटर आईडी कार्ड से वंचित अपने वोटबैंक के लोगों को वोटर आईडी कार्ड दिला सकता है, कैसे अपने कम प्रभाव वाले इलाके के लोगों के मन में बसी नकारात्मकता को दूर कर सकता है, यह सब कुछ आशीष अच्छे से जानते हैं और उनकी कंपनी इसे बहुत अच्छे से टैकल करती है. टैब और स्मार्टफोन्स से लैस युवाओं की टीम अपने क्लाइंट्स के इलाके में ढेरों किस्म के काम करती है जिसका अपडेट संबंधित नेता के स्मार्टफोन पर हर पल अपडेट रहता है. इस काम के लिए लाखों रुपये फीस लेने वाले आशीष गुप्ता खुद मानते हैं कि उन्हें इतनी जल्दी और इतने बड़े पैमाने पर सफलता मिल जाएगी, उम्मीद न थी.

ऊर्जावान युवा आशीष गुप्ता विगत 15 वर्षों से समाचार माध्यमों, विशेषकर समाचार-पत्रों में सतत रूप से सक्रिय रहे हैं. राष्ट्रीय सहारा से पत्रकारीय कर्म की शुरुआत संवाददाता के रूप में करने वाले आशीष ने लगभग 6 सालों तक दैनिक जागरण में सेवा दी. इस दौरान वह विभिन्न ब्यूरो में कार्यरत रहे. इस कामकाज के दौरान उनका नामचीन शख्सियतों से पाला पड़ता रहा. राजनीति और ग्लैमर वर्ल्ड की हस्तियों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखने वाले युवा पत्रकार स्वप्नदृष्टा आशीष ने गत दिनों दैनिक जागरण नॉएडा से त्याग-पत्र देकर स्वयं की कंपनी मेक यू बिग का शुभारम्भ किया और आज बेहद सफल स्टार्टअप के मालिक हैं. बाल्यकाल में पिता की मौत के बाद आशीष ने पत्रकारिता और एमबीए दोनों की पढ़ाई की. उनका यह दो फील्ड्स का जमीनी और सैद्धांतिक ज्ञान आज जलवे दिखा रहा है.

आशीष गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने एक जोखिम भरा फैसला लिया. इसी जनवरी माह में पोलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट के तौर पर मेक यू बिग नाम से अपनी कंपनी बनाई. काम समय में ही कंपनी की साख बन गई. मेक यू बिग कंपनी पब्लिक रिलेशन, इवेंट मैनेजमेंट, ऑनलाइन ब्रांड मैनेजमेंट एंड प्रमोशन के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करती हैं. फिलवक्त कंपनी 2017 के चुनाव के दृष्टिगत कई दलों के प्रत्याशियों को ऑनलाइन व ऑफलाइन सेवाएं प्रदान कर रही है. 20 से अधिक प्रत्याशियों को कंपनी अपनी सेवा देती है. कंपनी ने कम समय में ही 65 से अधिक लोगों को रोजगार दिया.

बीजेपी ने जो मतदाता पंजीकरण अभियान सितम्बर माह में चलाया था, मेक यू बिग कंपनी उसे पांच महीने पहले चला चुकी है. करीब एक लाख नए मतदाताओं का पंजीकरण करा चुकी है. इसके अलावा कई विधानसभा क्षेत्रों में कंपनी सर्वे कर चुकी है. कंपनी के पास 5 लाख लोगों के मोबाइल नंबर सर्वे के माध्यम से एकत्रित हुए हैं. बीजेपी के यूपी प्रभारी ओम माथुर और कैबिनेट मंत्री कलराज मिश्रा ने भी कंपनी से सर्वे की रिपोर्ट मांगी है. कंपनी के पास मेक यू बिग एक्सपर्ट नाम से एक सॉफ्टवेर है. सर्वे करने के बाद विदेश में रहकर भी कोई प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभा का रिपोर्ट पासवर्ड डालकर देख सकता है. मेरठ, मुज़ुफरनगर, सहारनपुर, आगरा, बदायूं, हापुड, बिजनोर, ग़ाज़ियाबाद में कंपनी काम कर रही है. कंपनी को यूपी के दूसरे कई इलाकों में काम करने के लिए ढेरों तेजतर्रार मीडियाकर्मियों और प्रबंधकों की जरूरत है.

आशीष उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो भरी जवानी में बुड्ढे हो जाते हैं और नौकरी करते रहने को अपनी नियति मान जीते जी मुर्दा लाश में तब्दील हो जाते हैं. भड़ास4मीडिया आशीष को सम्मानित कर सपने देखने, जोखिम लेने और खुद का उद्यम शुरू करने की इच्छा रखने वाले नौजवानों को हौसला प्रदान करता है.

आशीष गुप्ता से संपर्क उनके फेसबुक एकाउंट के जरिए कर सकते हैं, क्लिक करें : https://www.facebook.com/aashish.gupta.54943

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (6) : इस ग्रह की जैव विविधता सुरक्षित रखने में लगे प्रगतिशील किसान डा. राजाराम त्रिपाठी को सलाम

डॉ. राजाराम त्रिपाठी का नाम देश के प्रगतिशील किसानों की प्रथम श्रेणी में है. उनके बारे में सही परिचय ये है कि यह पढ़ा लिखा किसान इस ग्रह की जैव विविधता सुरक्षित रखने के लिए न सिर्फ सक्रिय है बल्कि एक व्यक्ति कितना कुछ कर सकता है, इस पैमाने पर वे सफल भी हैं. बैंक की स्थायी नौकरी छोड़ कर खेती किसानी के रास्ते देश को गौरव देने वाले राजाराम त्रिपाठी एक कवि भी हैं, साहित्यकार भी हैं, संपादक भी हैं. उनका कई कविता संग्रह छप चुके हैं. वे एक मैग्जीन प्रकाशित करते हैं. वे कई किताबों के लेखक हैं. उनका लिखा कई जगहों पर छपता है. उनके अदभुत काम के कारण उन्हें दर्जनों अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. उन्होंने भारत की जैव विविधता और मिट्टी की ताकत को कोई अंतराराष्ट्रीय मंचों पर गर्व के साथ प्रदर्शित किया और पूरे देश को गौरवान्वित किया.

डा. राजाराम त्रिपाठी ने 17 सालों से छत्तीसगढ़ के बस्तर में हर्बल मेडिसन और एरोमैटिक प्लांटस की आर्गेनिक खेती कर रहे हैं और इसके जरिए अपने गांव, जिले, प्रदेश, देश को दुनिया भर में एक नाम पहचान दिया है. आर्गेनिक हर्बल फार्मर और हर्बल वैज्ञानिक राजाराम के प्रयासों से कोडागाँव में बनाए गए उनके चिखलपुटी के हर्बल फार्म को अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर प्रमाणित भारत का प्रथम हर्बल फार्म होने का गौरव प्राप्त हुआ. इस बाबत उन्हें सन् 2000 में प्रमाण पत्र भी मिला.

बस्तर जिले के दरभा विकास खंड के ककनार ग्राम में 12 जनवरी 1962 को पिता श्री जगदीश प्रसाद त्रिपाठी के घर पैदा हुए श्री राजाराम त्रिपाठी बी.एस.सी, एल.एल.बी, एम.ए अर्थशास्त्र, एम.ए हिन्दी, एम.ए. इतिहास की पढ़ाई के बाद पब्लिक सेक्टर बैंक में अफसर बन गए. नया करने की चाहत के कारण उन्होंने बैंक की स्थायी नौकरी और सुरक्षित भविष्य का मोह छोड़ पूरी तरह ऑर्गेनिक मेडिशनल हर्बल फार्मिंग में लग गए. राजाराम ने न केवल ऑर्गेनिक पद्धतियों को अपनाकर औषधीय पौधों की वृहद खेती के क्षेत्र में विशिष्टता हासिल की है वरन इस कार्य के लिए बस्तर और रायपुर जिलों में कृषि भूमि का विस्तार एक हजार से भी ज्यादा एकड़ तक कर दिया है.

जिस दौर में हरित क्रांति वाले इलाकों से बाहर के गिने़ चुने किसान ही अपनी खेती के कामकाज को फैलाने के प्रति सकारात्मक रवैया अपना रहे थे, उस दौर में राजाराम ने अकेले देश ही नहीं बल्कि विदेश तक के बाजारों में भारतीय औषधीय पौधों के प्रचार प्रसार हेतु संभावनाएं तलाशी और इसके जरिए एक ठीकठाक बिजनेस माडल डेवलप किया जिससे इलाके के स्थानीय निवासियों को जबरदस्त फायदा हुआ. राजाराम ट्रेडिशनल हेल्थ प्रैक्टिस (टी.एच.पी.), ट्रेडिशनल हेल्थ थेरेपी (टी.एच.टी), एथनिक मेडिको प्रैक्टिस (ई.एम.पी.),  जनजातियों के अपने डॉक्यूमेंटेशन बिसियन हॉर्न मारिया और मुरिया तथा गोंड में सक्रिय रूप से व्यस्त रहे. उन्होंने टिशू कल्चर के जरिये विलुप्त प्राय किस्मों के संरक्षण-संवर्द्धन का काम किया. इसके बारे में रेड डाटा बुक में भी बताया गया है. इन किस्मों में गुग्गुल, कैमिफोरा विघटी, सर्पगंधाए रॉवेलफिया सरपेंटिना, सफेद मुसलीए क्लोरोफाइटम बोरिविलेनम, वाचा, एकोरस कैलामस और अशोका इंडिका शामिल हैं.

वर्तमान में भारत के 19 राज्यों में एक हजार से ज्यादा एकड़ में फैले 210 से भी अधिक हर्बल फार्मों को राजाराम त्रिपाठी बीज उपलब्ध कराते हैं और उनके सलाहकार भी हैं. इन्फॉरमेशन ट्रेनिंग और कल्टीवेशन, ऑर्गेनिक तरीके से उगाए जाने वाले औषधीय व गंधी पौधों की मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के एक नेटवर्क को भी चलाते हैं जिसके पूरे देश में 21 हजार से ज्यादा किसान सदस्य हैं. चैम्फ इंडिया और सम्पदा के तहत उन्होंने देश का सबसे समृद्ध हर्बल स्पेशीज गार्डन्स बनाए जहाँ 70 दुर्लभ, विलुप्तप्राय और खतरे से घिरी किस्मों की नियमित रूप से जाँच की जाती है और विशेषज्ञों की देखरेख में उन्हें विकसित किया जाता है। वे हर्बल फार्मिंग और मार्केटिंग के जरिए ग्रामीण युवकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु भारतीय औषधीय और गंधी फसलों तथा एथनो मेडिको फॉरेस्ट की स्थापना हेतु ऑर्गेनिक कल्टीवेशन के संवर्द्धन में लगे हुए हैं।

वे हमेशा किसानों की समृद्धि और दुनिया में शांति बनाए रखने की कोशिशों में लगे रहते हैं। इसके लिए वे अधिक मुनाफे वाली वहनीय ऑर्गेनिक खेती हेतु निरंतर सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध कराते हैं ताकि इस ग्रह की जैव विविधता सुरक्षित रहे। उन्होंने हर्बल, औषधीय और गंधी पौधों एरोमैटिक प्लांटस को बड़े स्तर पर उगा कर कृषि व्यवसाय में एक नया अध्याय जोड़ा है और साबित कर दिया है कि पैसा पेड़ों पर उग सकता है। एक पूर्व बैंकर, श्री राजाराम त्रिपाठी को अपने प्रयासों में अनोखी सफलता मिली है और भारत के 19 राज्यों में मौजूद 20 हजार से ज्यादा किसान वहनीय ऑर्गेनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं।

उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र कोंडागाँव को पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया है और जनजातीय परिवारों को ऑर्गेनिक हर्बल फार्मिंग में लगाया है साथ ही वे सशक्त मार्केटिंग रणनीति अपना रहे हैं। इस दिशा में आर्गेनिक हर्बल ग्रुप मां दंतेश्वरी हर्बल प्रोडक्टस लिमिटेड, एमडीएचपी इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। डॉ. त्रिपाठी के एकल प्रयासों से इन फसलों को उगाने वाले लोगों को जड़ी बूटियों और औषधीय पौधों के विशाल बाजार का लाभ उठाने में बड़ी मदद मिली है। श्री राजाराम त्रिपाठी का मिशन कृषि क्षेत्र को एक मुनाफे वाला व्यवसाय बनाना, कृषकों के आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करना ताकि भारत, कृषि उद्योग पर आधारित एक ताकतवर देश बने, क्योंकि उनकी भारतीय एकत्व की दृष्टि यह मानती है कि कृषि और कृषक भारतीय सामाजिक आर्थिक क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी हैं। अपने इस लक्ष्य और पूरे देश के हजारों किसानों की शुभेच्छाओं और साख के साथ वे बड़ी उम्मीद से भविष्य की ओर देख रहे हैं। इन सब कामों के साथ राजाराम ने अपनी साहित्यिक रुचि को हमेशा जिंदा रखा और उसको पूरा निखरने दिया. अब तक उनकी कई किताबें, रचनाएं छप चुकी हैं.

भड़ास4मीडिया डा. राजाराम त्रिपाठी को सम्मानित कर इस ग्रह को बचाने के छिटपुट कोशिशों को मजबूती प्रदान करना चाहता है. साथ ही यह बताना चाहता है कि कोई आदमी सिर्फ नौकरी कर के ही अपना बेस्ट नहीं हासिल कर सकता. उसे बड़ा और नया करना है तो रिस्क लेने पड़ेंगे, वो करना पड़ेगा जो दिल कहता है. राजाराम त्रिपाठी ने खेती किसानी के रास्ते सम्मान, पहचान और समृद्धि हासिल कर एक ट्रेंड शुरू किया है जिससे सबमें यह मैसेज जाए कि एक किसान चाह ले तो क्या नहीं कर सकता. खासकर वो किसान जो खूब पढ़ा लिखा हो और बहुमुखी समझ रखता हो. ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि हम सब राजाराम की तरह अपने अपने इलाके में जाकर खेती किसानी को नई उंचाई दें, साथ ही इसके जरिए अपने परिवार, गांव, समाज, प्रदेश, देश को नई पहचान दिलाएं. राजाराम त्रिपाठी हम सबके लिए प्रेरणा हैं. उन्हें 11 सितंबर 2016 को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में भड़ास मीडिया सरोकार एवार्ड से सम्मानित किया जाएगा.

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भड़ास 8वां स्थापना दिवस : एक वरिष्ठ पत्रकार ने प्रिंट कराईं डेढ़ सौ भड़ासी टी-शर्ट, इसी रविवार को बंटेगा

Yashwant Singh : दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार साथी का मुझ पर अथाह स्नेह / प्रेम है. उनने एक रोज फोन कर कहा कि यशवंत भड़ास4मीडिया का जो कार्यक्रम कर रहे हो, उसमें मैं क्या योगदान कर सकता हूं. मैंने कहा भाई साहब आप का कार्यक्रम में शिरकत करना ही योगदान रहेगा, मुझे कोई कमी या परेशानी नहीं. वे नहीं माने. लगे पूछने क्या क्या कर रहे हो प्रोग्राम में. मैंने सब कुछ बताते हुए यह भी कह दिया कि भड़ास के लोगो लगे टी शर्ट भी तैयार करा रहा हूं. उनने पूछे कितने टी शर्ट. मैंने कह दिया सौ – डेढ़ सौ के करीब.

उनने आदेश दिया कि मेरे पास एक प्रिंटर साथी है. उसका नंबर भेज रहा हूं. डिजाइन / लोगो उसको भेज दीजिए और टी शर्ट डेढ़ सौ छपवा लीजिए. पेमेंट मेरी तरफ से रहेगा लेकिन बस शर्त एक वही पुरानी वाली है कि मेरा नाम कहीं नहीं लेंगे. मतलब ये कि मैं किसी रूप में किसी से न कहूं कि टी शर्ट फलाने जी के सौजन्य से फ्री में पड़ा है भड़ास को. आज यह सब इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि प्रिंटर महोदय कल टी शर्ट प्रिंट करने जा रहे हैं. वादे के मुताबिक टी शर्ट प्रिंट कराने वाले वरिष्ठ पत्रकार साथी का नाम तो नहीं लूंगा लेकिन यह जरूर संकेत दे रहा हूं कि भड़ास के 11 सितंबर वाले कार्यक्रम में उन पत्रकार साथी के हाथों किसी पत्रकार साथी का सम्मान कराया जाएगा या कार्यक्रम में शिरकत करने वाले किसी साथी को टीशर्ट गिफ्ट कराया जाएगा.

टी शर्ट प्रिंटिंग के लिए जो डिजाइन / आउटलाइन भेजा गया है उसमें आगे तो भड़ास का लोगो रहेगा जिसके नीचे लिखा रहेगा दबंग पत्रकारिता के आठ साल. लेकिन टी शर्ट पर पीछे की तरफ बड़ा बड़ा लिखा रहेगा… मीडिया का BAAP!

देखता हूं कितने पत्रकार इस टीशर्ट को पहनकर फील्ड में निकलेंगे? क्योंकि मुझे जो फीडबैक है वो ये कि एक बार एक शहर में एक पत्रकार साथी भड़ासी टी शर्ट पहनकर फील्ड में गए तो अगले कुछ दिनों में उन्हें चौबीस कैरट का ‘भड़ासी’ मान लिया गया. उस शहर की जो भी खबरें भड़ास पर छपे, किसी संस्थान या पत्रकार के खिलाफ तो उसके लिए उन्हेंं ही ‘घूर’ कर देखा जाने लगा. इसलिए कहना चाहूंगा कि 11 सितंबर को कांस्टीट्यूशन क्लब में दिन में एक बजे पधारने वाले साथियों को यह एक बार सोचना चाहिए कि वह यह टी शर्ट लेकर वाकई दिन में पहन कर फील्ड में निकलेंगे या केवल घर पर ही रात-रात में सोते वक्त इस्तेमाल करेंगे 🙂

ये वो टी शर्ट आउटलाइन है जो प्रिंटर के पास भेजा गया है… सौ टी शर्ट एक्सल साइज में हैं और पचास डबल एक्सल. इन्हें कार्यक्रम स्थल पर ही उपस्थित लोगों को दौड़ा कर पकड़ा दिया जाएगा. 🙂

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (5) : शाह आलम, ममता यादव और आशीष सागर होंगे सम्मानित

11 सितंबर दिन रविवार को एक बजे कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल में भड़ास4मीडिया के आठवें स्थापना दिवस के मौके पर भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड से शाह आलम, ममता यादव, आशीष सागर को भी सम्मानित किया जाएगा.

शाह आलम ने हाल के दिनों में ऐसी जानदार घुमंतू पत्रकारिता की है जिसे पढ़ सुन देख कर सच्चे मिशनरी पत्रकारों की याद आ जाती है. हजारों किलोमीटर की यात्रा इस शख्स ने प्रेस लिखी साइकिल से कर दी. रात हो या दिन, बारिश हो या गर्मी, साइकिल सवार यह पत्रकार बीहड़ गांव जंगलों में घूमता लिखता रिपोर्ट करता रहा. फेसबुक पर जो लोग शाह आलम से जुड़े हैं वे इस नौजवान के विलक्षण कार्य, अप्रतिम साहस और अदभुत सरोकार से मुग्ध हैं. भड़ास4मीडिया ने शाह आलम को सम्मानित कर ऐसी तेजस्वी युवा पत्रकारों की नई खेप को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. शाह आलम के बारे में ज्यादा जानने, उनकी तस्वीरें देखने के लिए आप इस फेसबुक लिंक पर क्लिक कर सकते हैं https://www.facebook.com/shahalam1981

ममता यादव मध्य प्रदेश की हैं और भोपाल में लंबे समय से वेब जर्नलिज्म की अलख जगाए हैं. मल्हार मीडिया नाम से ये वेबसाइट संचालित करती हैं. ममता ने बाजारू पत्रकारिता के विकृत चेहरे को नजदीक से देखने महसूस करने के बाद वैकल्पिक पत्रकारिता की मुश्किल राह की तरफ मुड़ गईं. वे अपनी वेबसाइट के जरिए उन सच्चाई को सामने लाते रहीं जिन्हें बताने छापने से मुख्य धारा की मीडिया को पसीना आता रहा. मध्य प्रदेश की पत्रकारिता में युवा पत्रकारों की तेजस्वी खेप में ममता प्रमुख हैं. उन्होंने महिला होने के कारण पुरुषवादी मीडिया के कुरुप सामंती चेहरों की भी शिनाख्त की और इसके खिलाफ हर मंच माध्यम से आवाज उठाया. ममता ने बेहद मुश्किल हालात आने के बावजूद वैकल्पिक मीडिया से मुंह नहीं मोड़ा और अपने मिशन पर चलती गईं जिसके कारण उन्हें अब मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी मान्यता प्राप्त पत्रकार का तमगा देना पड़ा. ममता यादव जैसी महिला पत्रकारों की संख्या मीडिया में ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए ताकि मीडिया में आधी आबादी का संतुलन समुचित रहे, साथ ही सच को पूरी ताकत के साथ कहने की परंपरा कायम रह सके. ममता को भड़ास4मीडिया सम्मानित कर देश की सभी जांबाज और ईमानदार महिला पत्रकारों को सैल्यूट करता है. ममता यादव के बारे में ज्यादा जानने, उनकी तस्वीरें देखने के लिए आप इस फेसबुक लिंक पर क्लिक कर सकते हैं
https://www.facebook.com/mamta25sept.78

यूपी के बुंदेलखंड इलाके के आशीष सागर एक ऐसे स्वतंत्र पत्रकार हैं जिन्होंने खनन कारोबार के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया. जनहित याचिका लगाई. सीबीआई जांच शुरू हुई. आशीष ने पूर्व बसपा सरकार के बाहुबली कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी की अवैध सम्पति के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत की जिसके बाद सीबीआई / ईडी जाँच के आदेश हुए. आशीष सागर सूचनाधिकार एक्टिविस्ट भी हैं. उन्होंने लगातार कई सरकारी योजनाओं का भ्रष्टाचार खोलने में सक्रिय भूमिका निभाई है. इंडिया टुडे मैग्जीन ने अपने 5 सितम्बर 2015 के अंक में देश के बारह प्रमुख व्हिसिल ब्लोअर्स में आशीष सागर को जगह दी है. आशीष को सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने के लिए कई संस्थाओ / समूहों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. इन्हें पर्यावरण प्रहरी, सूचनाधिकार रत्न, बुन्देली गौरव सहित हाल ही में शाइनिंग डायमंड एवार्ड 2016 भी मिला है. युवा आशीष प्रवास सोसाइटी के निदेशक, भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के बुंदेलखंड प्रवक्ता, अन्नदाता की आखत, हरियाली चौपाल, तालाब एवं भूदान चारागाह मुक्ति अभियान के संयोजक हैं. आशीष ने बिना डरे बुरे लोगों से लड़ाई लड़ी, समाज के गरीब लोगों के हित में काम किया, पर्यावरण के लिए जी जान से जुटे. उनकी इस अदभुत सक्रियता और जन सरोकार को देखते हुए भड़ास ने सम्मानित करने का निर्णय लिया है. आशीष सागर दीक्षित के बारे में ज्यादा जानने, उनकी तस्वीरें देखने के लिए आप इस फेसबुक लिंक पर क्लिक कर सकते हैं
https://www.facebook.com/ashishsagar.dixit

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भड़ास 8वां स्थापना दिवस : यूट्यूब से लाखों रुपये कमाने का गुर सिखाएगा एक छात्र, प्रवेश मुफ्त

Yashwant Singh : बस दो चार दिन बाद जो आने वाला इतवार है, वह उन लोगों को एक समझ सीख लर्निंग प्रेरणा देगा जो मानते हैं कि वो काबिल हैं लेकिन उनके लिए इस तंत्र में पैसा नहीं है. चाहें आप मीडिया वाले हों या थिएटर वाले, चाहें आप पुलिस की नौकरी करते हों या किसी कारपोरेट कंपनी के मुलाजिम हों… आप सीईओ हों या एक्जीक्यूटिव…. आप जैसे हर उन साथियों को न्योता है जो चाहते हैं कि उनका एक भी पैसा न लगे लेकिन वे अपनी मेधा, समझ, क्रिएशन, मेहनत के बल पर लाखों रुपये कमा सकें.

जी. ये काम एक छात्र कर रहा है. वह अब अपने घर से पैसे नहीं लेता. वह आईआईटी जैसी बड़ी महंगी पढ़ाई कर रहा है. वह अपने दम पर पढ़ाई करते हुए लाखों रुपये कमा रहा है. वो बालक, वो गुरु, वो होनहार 11 सितंबर को दिन में ठीक एक बजे से कांस्टीट्यूशन क्लब में अपना कोर्स शुरू कर देगा, प्रोजेक्टर पर. आप अगर कागज कलम लेकर नहीं आए, आपने पूरे कोर्स को मन में नहीं उतारा तो आप सच में बहुत कुछ मिस करेंगे.

ऐसा ही एक वर्कशाप मैंने 1100 रुपये लेकर किया था. उसी वर्कशाप को फ्री में भड़ास के आठवें बर्थडे पर एक सफल कामयाब आनलाइन कंटेंट क्रिएटर के जरिए बूझेंगे सीखेंगे सुनेंगे. उस अति प्रतिभाशाली युवक का नाम यहां नहीं लूंगा. वह दिल्ली के लिए रवाना होने की तैयारी में है. टिकट करा लिया है. उससे सीधे आप भड़ास के प्रोग्राम में रुबरु होंगे. तो हे मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे भाइयों, अगर इस प्रोग्राम में नहीं आए तो समझिए आप एक बड़ा मौका मिस कर रहे हैं. ये भड़ास मेरा कभी नहीं था. मैं हमेशा क्लर्क रहा हूं. इस भड़ास को किसी चोर संपादक या किसी चोर अफसर या किसी चोर नेता से हमेशा दूर रखा क्योंकि भड़ास चलाने वास्ते ये जिद रही कि अगर चोरकटई करने का मन करेगा तो एक पीआर कंपनी खोल लूंगा. अब तो खोल ही सकता हूं क्योंकि भड़ास के कारण मेरा नाम ग्राम सब हो चुका है. लेकिन नहीं. भड़ास का मूल उद्देश्य डरे कमजोर सोर्स संसाधन विहीन हिंदी भाषियों को उठाना, आत्मविश्वास भरना और टाइट मनुष्य बनाना था, सो वही काम इसके जरिए चलेगा.

आप का आना प्रार्थनीय है. भीड़ ज्यादा मौके पर हो जाए तो आप दीवाल से सटकर खड़े होकर सुनें, गुनें. ये आपका कार्यक्रम है, ये आपके लिए मौका है. इस मौके पर ऐसे किसी शख्स को नहीं बुलाया जा रहा है जो सौदेबाज या दलाल या चोरकट या नेता हो. उम्मीद करता हूं आप लोगों तक मेरी बात पहुंच पा रही होगी. जै जै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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जबदस्त उथल-पुथल से गुजर रही मीडिया इंडस्ट्री… चैनल और अखबार मालिकों की नींद हराम

Yashwant Singh : मीडिया इंडस्ट्री में जबरदस्त उथल पुथल है. चैनल वालों का कोई इमान धरम नहीं रहा… यानि इन पर कोई भरोसा नहीं करता अब… सब जानते हैं कि ये पैसे लेकर खबरें चलाते हैं… सब जानते हैं कि ये निहित स्वार्थी एजेंडे के तहत कोई खबर या कंपेन चलाते हैं… असली खबरों को दबा देंगे, नकली खबरों को चढ़ा देंगे….

दो लोग सहमति से सेक्स करें तो इससे मीडिया वालों का क्या वास्ता होना चाहिए. पत्रकारिता की पढ़ाई में यह सिखाया जाता है कि परसनल लाइफ पर कभी खबर नहीं बनाई जानी चाहिए.. लेकिन चैनल वाले तो परसनल लाइफ पर न सिर्फ खबर दिखाते हैं, बल्कि परसनल लाइफ नष्ट तक कर डालते हैं. घेरघार कर महिला से एफआईआर करवा लिया गया और एक नेता को इसलिए जेल भेज दिया गया क्योंकि वह एक ऐसी पार्टी से है जिसकी दुश्मन भाजपा के नेता हैं.

दिल्ली पुलिस का इतना शानदार इस्तेमाल कभी किसी ने नहीं किया जितना मोदी जी के कार्यकाल में हो रहा है. भाजपा मेंं शामिल हुए हरक सिंह रावत पर रेप का आरोप लगा तो पुलिस ने हाथ तक नहीं डाला. आरोप लगाने वाली महिला को घेरघार कर यह कहलवा दिया गया कि उसने यूं ही आरोप लगा दिया था, कोई रेप वेप नहीं हुआ. मीडिया वाले भी रेपिस्ट हरक सिंह रावत को बचाने में लग गए और आरोप लगाने वाली महिला को नंगा करने का काम शुरू किया… मीडिया के ऐसेे चिंटुओं से क्या उम्मीद की जाए… सब जानते हैं कि हरक सिंह रावत का इतिहास रेप और रास से भरा पड़ा है… लेकिन उस पर पुलिस नहीं हाथ लगा सकती क्योंकि वह केंद्र में सत्ताधारी पार्टी का नेता है…

मैं आम आदमी पार्टी या कांग्रेस का समर्थक नहीं हूं. न ही भाजपा से कोई खास बैर है. इस लोकतंत्र में जनता जनार्दन जिसे चुने, वही राजा. लेकिन कोई गड़बड़ करे तो उसका जिक्र हम लोगों को जरूर करना चाहिए. इस आधार पर कि हम भाजपा के समर्थक हैं तो भाजपा की गल्तियों से आंख मूंद लेंगे और आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं तो ‘आप’ की करतूतों को इगनोर कर देंगे, गलत है. अगर आप रेशनल, डेमोक्रेटिक हैं तो आपको जो अच्छा हो उसकी तारीफ हो, जो गलत लगे उसका विरोध हो. बात तो अभी मीडिया की मैं कर रहा था. मीडिया में चैनलों को किस तरह एक खास एजेंडे के लिए सक्रिय कर दिया गया है, यह साफ साफ दिख रहा है. केजरीवाल का भारी भरकम विज्ञापन देकर चैनलों का मुंह बंद करना भी काम नहीं आ रहा क्योंकि दूसरी पार्टी लगता है कि कुछ ज्यादा ही माल पहुंचा रही है गोपनीय तरीके से. इस धंधेबाजी के कारण चैनलों की विश्वसनीयता बुरी तरह गिरी है. चैनल मालिकों की नींद उड़ी हुई है कि यही हालात रहे तो लोग चैनल देखना बंद कर देंगे.

अब अखबारों की बात… इनके मालिकान इस किस्म के चोट्टे निकले कि संसद, कानून, न्यायालय सबको धता बताते हुए अपने कर्मियों को उचित कानूनी सेलरी नहीं दो तो नहीं ही दी… अब जब सुप्रीम कोर्ट का डंडा हो रहा है तो सब बाप बाप चिल्ला रहे हैं… सुप्रीम कोर्ट से डरा श्रम विभाग अब सक्रिय हुआ है और ताबड़तोड़ छापे मार रहा है… मालिकों ने दहशत के मारे नोट हगना शुरू कर दिया है…

पता चला है कि अमर उजाला के मालिक राजुल माहेश्वरी ने फिर से अपने कर्मियों के खाते में एरियर की राशि डाल दी है… साथ ही सभी कर्मियों से नए फार्म पर साइन करवाया जा रहा है… जागरण वालों के आफिसों पर भी श्रम विभाग के छापे पड़ रहे हैं…

लखनऊ में अखबर वितरकों ने कई दिनों से हड़ताल कर रखा है… वे कमीशन घटाए जाने से नाराज हैं… इंदौर में इंडिया टीवी के स्टेट हेड पिटा गए लेकिन चैनल ने एक लाइन खबर नहीं चलाई… विस्तार से हाल खबर जानने के लिए भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पर पहुंचिए. आजकल मीडिया के अंदर काफी हलचल है. इसलिए भड़ास तक खूब सारी खबरें आ रही हैं. हालांकि हम लोग अपना काफी वक्त भड़ास के आठवें जन्मदिवस की तैयारियों पर लगा रहे हैं लेकिन मौका मिलते ही भड़ास को अपडेट करने का काम शुरू हो जाता है. इस आने वाले रविवार यानि 11 सितंबर को आप सभी फेसबुकी साथी दिल्ली में रफी मार्ग पर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब पहुंचिए. वहां एक से बढ़कर एक खुलासे होंगे. सम्मान होगा. गीत-संगीत होगा. न्योता यहां अटैच है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (4) : नौकरी छोड़ पहाड़ बचाने के लिए लड़ रहे नौजवान समीर रतूड़ी को एक सम्मान

हम सफलता का मतलब क्या मानते हैं? किसी के लिए नौकरी, परिवार और मकान-दुकान में लगातार रमे रहना और बढ़ते जाना तरक्की है तो किसी के लिए नौकरियों को लात मार कर पहाड़, पर्यावरण, अपने जन के लिए लड़ना सफलता है. सफलता अंबानी के लिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना हो सकता है तो एक फकीर के लिए सब कुछ त्याग कर मस्त रहना ही सफलता है. आज के बाजारू दौर में जब माना जाने लगा है कि हर किसी का लक्ष्य पैसा है, सुख है, भौतिक लाभ है, वैसे में कुछ लोग ऐसे भी दिखते हैं जो इन सबसे अलग जीवन का मकसद वंचितों के पक्ष में खड़ा होना बना लेते हैं.

एमबीए की पढ़ाई कर समीर रतूड़ी ने दिल्ली में अच्छी खासी नौकरी छोड़कर उत्तराखंड के पहाड़ों-गांवों-पर्यावरण को बचाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया. इस नौजवान ने मरणासन्न होने तक आमरण अनशन किया, जेल में बंद किया गया फिर भी नहीं झुका. झुकी तो उत्तराखंड सरकार जो खनन माफियाओं पर रोक लगाने के लिए मजबूर हुई. 11 सितंबर को दिल्ली में कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल में समीर रतूड़ी को उनके अतुल्य नैतिक साहस और सामाजिक सरोकार के प्रति योगदान के लिए भड़ास मीडिया सरोकार सम्मान से नवाजा जाएगा.

(जेल, अनशन, आंदोलन… समीर रतूड़ी के संघर्षों का लंबा इतिहास है)

आइए, समीर रतूड़ी के जीवन के बारे में कुछ जानते हैं. 25 दिसंबर 1979 को जन्मे समीर रतूड़ी ने हाई स्कूल (1996) आल सेंट्स कान्वेंट स्कूल, टिहरी से की. इण्टर मीडिएट (1998) मार्शल स्कूल, देहरादून से किया. स्नातक BSc (2003) स्वामी राम तीर्थ कैंपस टिहरी से. स्नाकोत्तर MA (2005) अर्थशास्त्र स्वामी राम तीर्थ कैंपस, बादसाहिथौल से पूरा किया. इसके बाद MBA 2005-07 की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्लानिंग & मैनेजमेंट IIPM दिल्ली से पूरी की. 2006 में समीर रतूड़ी ने कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी शुरू की. वे एक निजी कंपनी में वाईस प्रेजिडेंट भी बने.

समीर ने 1989 में टिहरी बाँध विरोधी आंदोलन में जाने माने पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा जी के नेतृत्व में आंदोलन में कार्यकर्त्ता की भूमिका निभाई. 1992 में हिमालय बचाओ आंदोलन का सबसे कम उम्र का सदस्य बने. आंदोलनों की पुस्तकें बेच कर आंदोलन के लिए धन जुटाने का कार्य किया.  1992-2002 में हिमालय बचाओ आंदोलन के साथ जुड़े रहे और इसके अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. 1995 में 16 जून को टिहरी बांध विरोधी आंदोलन के दौरान टिहरी डैम साईट पर हुए भीषण लाठीचार्ज का शिकार लोगों में एक समीर भी थे. इनको इतना पीटा गया कि जेब में रखा 50 पैसे का सिक्का तक मुड़ गया. बाद में इसका नेशनल ह्यूमन राईट कमीशन ने संज्ञान लिया और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही की.

1999 में GGIC टिहरी के जबरन नई टिहरी स्थान्तरण को ले के हुए विरोध में स्कूल की छात्राओं के साथ आंदोलन में शामिल हुए. 14 दिन का उपवास भी रखा. 2000 में टिहरी बाँध प्रभावित ग्रामीणों के विस्थापन के आंदोलन में ग्रामीणों के साथ शिरकत की. 187 ग्रामीणों के साथ 11 दिन तक कारावास में रहे. जेल में 11 दिन का उपवास रहे औरर इसी उपवास के दौरान अपने BSc फर्स्ट इयर का पेपर नई टिहरी जेल से टिहरी कैंपस में दिया. पशुलोक व पथरी में मिली जमीन इसी आंदोलन का परिणाम है.

2000-2005 तक कॉलेज की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे. 2001 में टिहरी बाँध विस्थापितों के आंदोलन में एक बार पुनः 7 दिन के लिए कारावास हुआ. 2004 में टिहरी के पूर्ण जलमग्न होने पर नई टिहरी चले गए समीर. 2012 में हिमालय बचाओ आंदोलन का पुनर्गठन, युवाओं द्वारा संभाली गयी कार्य योजना. 2013 में “गाँव बसाओ- हिमालय बचाओ, हिमालय बचाओ- देश बचाओ” व “धार ऐंच पाणी, ढाल पर डाला, बिजली बणावा- खाला खाला” के नारों के साथ 18 दिन की शिवपुरी से मलेथा तक की पद यात्रा जो हेंवल घाटी, पौड़ीखाल, खास पट्टी होते हुए निकली. इस यात्रा ने लगभग 186 km की दूरी तय की. आपदा के बाद प्रभावित इलाको में भ्रमण कर राहत का कार्य किया. रामपुर व त्रियुगीनारायण इण्टर कॉलेज के छात्रो की मार्च 2014 तक की स्कूल फीस पी टी ए के माध्यम से दिलवाई.

(आंदोलन के दौरान पुलिस क्रूरता के शिकार समीर रतूड़ी)

2014 में “गाँव बसाओ-हिमालय बचाओ, हिमालय बचाओ- देश बचाओ” के तहत 28 दिन की पद यात्रा, मलेथा से गैरसैण जो लगभग 438 km की थी. 2014 में मलेथा में चल रहे स्टोन क्रेशर आंदोलन में सहभागिता दी. मलेथा में स्टोन क्रेशर के विरुद्ध चल रहे आंदोलन में जनवरी- फरवरी माह के दौरान 14 दिन का उपवास रखा. जून-जुलाई माह में 30 दिन का उपवास रखा. 30 दिन के उपवास के दौरान पहले 6 दिन व अंत के 4 दिन का निर्जल रह कर आंदोलन को निर्णायक भूमिका में पहुंचाने का सहयोग किया. 2015 में अक्टूबर माह में सरकार द्वारा भांग की खेती का लाइसेंस या वैधानिक स्वरुप दिए जाने के विरोध में 25 अक्टूबर से गोपेश्वर से डांडी मार्च निकाला गया जो 6 नवंबर को देहरादून पहुँचा. 8 नवंबर को 24 घंटे का उपवास रख सरकार की नीति के विरुद्ध सत्याग्रह कर बदलाव की बयार का आह्वान किया. 18 फ़रवरी, 2016 को मलेथा आंदोलनकारियो के ऊपर लगे मुकदमों में जमानत लेने से इनकार के चलते जेल यात्रा की. 23 दिन की जेल यात्रा व 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद सरकार को मलेथा आंदोलनकारियो के ऊपर से मुक़दमे वापस लेने को मजबूर होना पड़ा.

समीर रतूड़ी को यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि वह जिन बदलावों के लिए लड़ रहे हैं, उसके लिए राजनीति में जरूरी है. इसी को देखते हुए उन्होंने आंदोलन में सहभागी गांव वालों और ग्रामीण महिलाओं को आगे करके एक राजनीतिक पार्टी का गठन किया है ताकि आगे आने वाले चुनावों में उत्तराखंड में जनता को एक नया विकल्प दिया जा सके. समीर रतूड़ी की जिद, जिजीविषा, सरोकार और जनता के प्रति समपर्ण को देखते हुए भड़ास4मीडिया ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है.

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (3) : उद्यमिता के लिए संजय शर्मा, अशोक दास और विवेक सत्य मित्रम को सम्मान

हम भारत के लोग बचपन से ही नौकरी करने के लिए ट्रेंड किए जाते हैं. कभी यह नहीं पढ़ाया सिखाया जाता है कि आप खुद कैसे एक सफल उद्यमी बनकर दूसरों को रोजगार दे सकते हैं. खासकर मीडिया की बात करें तो यहां मीडियाकर्मी नौकरी पाने, नौकरी बचाए रखने और नौकरी चले जाने पर नौकरी खोजने में अपना जीवन गुजार देता है. वह अपनी आत्मा, अपने सम्मान, अपने आत्मविश्वास, अपनी ईमानदारी सबसे समझौता करता चला जाता है एक अदद नौकरी के लिए. लेकिन मीडिया के कुछ साथी हमारे आपके बीच में ऐसे भी हैं जिन्होंने करियर की शुरुआत तो मीडिया में नौकरी करने से की लेकिन जल्द ही उन्होंने समझ लिया कि उनका रास्ता ये नहीं है. इन साथियों ने अपने अपने प्रयासों, संघर्षों और प्रयोगों से नया रचा और बड़ा मुकाम हासिल करने की ओर अग्रसर हैं. ऐसे ही तीन साथियों को भड़ास4मीडिया ने इस बार उद्यमिता के लिए सम्मानित करने का फैसला लिया है. इनके नाम हैं- संजय शर्मा, अशोक दास और विवेक सत्य मित्रम्.

‘नया लक्ष्य’ नामक प्रतियोगी परीक्षा मैग्जीन का लोकार्पण यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने अपने आवास पर किया. सबसे बाएं संपादक संजय शर्मा.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा यूपी में बदायूं के रहने वाले हैं. सहारा मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने एक वीकएंड टाइम्स नाम से वीकली हिंदी दैनिक की शुरुआत लखनऊ से की. इन दिनों वह चर्चित सांध्य अखबार 4पीएम और एक प्रतियोगी परीक्षा मैग्जीन नया लक्ष्य का भी प्रकाशन संपादन करते हैं. खुद की प्रिंटिंग मशीन लगाकर और मार्केट से जॉब वर्क जुटाकर उद्यमिता के दम पर पैसे जोड़ने वाले संजय ने अपनी इच्छाशक्ति और समझ के बल पर खुद को भीड़ से अलग साबित किया. उनके नए नवेले मीडिया संस्थान में दर्जनों मीडिया कर्मी काम करते हैं. संजय वीकएंड टाइम्स हिंदी वीकली का विस्तार उत्तराखंड से करने जा रहे हैं और 3 सितंबर को देहरादून में उनके अखबार का लोकार्पण उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत करेंगे. लखनऊ प्रेस क्लब और मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पदाधिकारी संजय शर्मा ने कई बार अपने अखबारों में ऐसी बड़ी खबरें ब्रेक की जिससे शासन सत्ता हिल गया. हाल फिलहाल उन्होंने पंचायती राज विभाग के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया जिसका संज्ञान लेकर शासन ने इस घोटाले को प्रश्रय देने वाले शासनादेश को रद्द कर दिया.

(हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में पत्रकार अशोक दास और उनकी मैग्जीन दलित दस्तक के बारे में रिपोर्ट.)

अशोक दास बिहार के रहने वाले हैं और इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्यनिकेशन दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद अमर उजाला अलीगढ़ के हिस्से बने. कई सामाजिक राजनीतिक मु्ददों से प्रभावित होकर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद लंबी पदयात्रा की. बाद में दिल्ली आकर कुछ दिन तक भड़ास4मीडिया के साथ काम किया. बाद में ‘दलित दस्तक’ नाम से खुद की मैग्जीन शुरू की. आज यह मैग्जीन पूरे देश में दलित विमर्श का केंद्र है और इसकी हजारों प्रतियां प्रसारित होती है. मीडिया में दलितों-वंचितों की आवाज न के बराबर होने के कारण अशोक दास ने अपने जीवन का उद्देश्य बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नक्शेकदम पर चलते हुए उत्पीड़ितों को जागरूक करना बनाया है और इसके लिए ‘दलित दस्तक’ मैग्जीन और वेबसाइट से लगातार अग्रसर है. इन्होंने कई चुनौतियों और मुश्किलों को झेलते हुए दलित दस्तक को न सिर्फ खड़ा किया बल्कि एक पब्लिशिंग हाउस की भी स्थापना की जिसके जरिए कई तरह की जनसरोकार वाली किताबों का प्रकाशन करते हैं. आज ये दर्जनों साथियों को रोजगार देने के साथ साथ मीडिया में पूरे देश के वंचितों की आवाज बन गए हैं. अशोक को कम समय में शानदार काम के लिए कई एवार्ड मिल चुके हैं और कई नेशनल अखबारों ने उनके बारे में विस्तार से आलेखों का प्रकाशन किया है. अशोक दास के जीवन के सफर के बारे में ज्यादा जानकारी इस लिंक पर क्लिक कर पा सकते हैं: https://www.youtube.com/watch?v=otj5wBDs3cs

(एडवाइस अड्डा डाट काम के संस्थापक विवेक सत्य मित्रम्)

विवेक सत्य मित्रम् का जन्म उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जिले की जमानियां तहसील में आने वाले किशुनीपुर गांव में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ. उनके पिता कुमार शैलेन्द्र हिंदी के जाने-माने कवि और साहित्यकार और बिहार के एक डिग्री कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य के विभागाध्यक्ष हैं. विवेक ने 2002 में जाने-माने जनसंचार संस्थान आईआईएमसी में दाखिला ले लिया. 2003 में जनसत्ता में इंटर्नशिप करने के बाद सहारा समय चैनल में बतौर ट्रेनी करियर शुरू किया. बाद में पीटीआई का हिस्सा बने. वहां से स्टार न्यूज़ चले गए. 2008 में इंडिया न्यूज़ की स्पेशल टीम का हिस्सा बने जहां स्पेशल प्रोग्रामिंग हेड से लेकर स्क्रिप्ट इंचार्ज, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर और आउटपुट एडिटर की भूमिका तक निभाई. रीजनल चैनल इंडिया न्यूज़ हरियाणा की लांचिंग में अहम योगदान दिया. साल 2011 में महज़ 27 साल की उम्र में बतौर मैनेजिंग एडिटर और चैनल हेड एक नए लांच हो रहे चैनल जनता टीवी की कमान थामी. साल 2012 में फिर विवेक ने इंडिया न्यूज़ ग्रुप में वापसी की। उन्हें ग्रुप की न्यूज़ एजेंसी न्यूज़ वायर सर्विस यानि एनडब्ल्यूएस के हिंदी विंग का एडिटर बनाया गया. इसके बाद नेशनल न्यूज़ चैनल जिया न्यूज़ में बतौर एसाइनमेंट एडिटर पारी शुरू की. 30 दिसंबर 2013 को अपना वेंचर शुरू करने के लिए उन्होंने चैनल को अलविदा कह दिया.

साल 2014 की शुरूआत के साथ ही विवेक ने 30 साल की उम्र में अपने जीवन की पारी एक आंत्रप्रेन्योर के तौर पर शुरू की और एक अपना ऑनलाइन वेंचर ‘एडवाइस अड्डा डॉट कॉम’ लांच किया जो देश में अपनी तरह का पहला ऐसा वेंचर है जहां जिंदगी के हर मसले पर सलाह लेने के लिए 50 से ज्यादा वर्गों में तकरीबन 500 से ज्यादा विशेषज्ञ मौजूद हैं जिनमें डॉक्टर, लॉयर, साइकोलॉजिस्ट, करियर एडवाइज़र, लाइफ़ कोच, डाइटिशियन शामिल हैं. एडवाइस अड्डा अपनी तरह का पहला और इकलौता ऑनलाइन वेंचर है जहां कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की उलझनों और समस्याओं को सुलझाने के लिए अपनी पहचान ज़ाहिर किए बगैर एक्सपर्ट एडवाइस ले सकता है. इसके लिए पैसे खर्च करने की भी ज़रूरत नहीं है. पिछले दो सालों में एडवाइस अड्डा ने 18 लाख से ज्यादा लोगों की मदद की है और आज की तारीख में हर महीने इस प्लेटफार्म पर एक लाख से ज्यादा लोग अपनी परेशानियां सुलझाने के लिए एक्सपर्ट्स एडवाइस ले रहे हैं. विवेक सत्य मित्रम् को उनके अनोखे वेंचर के लिए ना केवल संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से सम्मानित किया गया बल्कि देश-दुनिया की 70 से अधिक जानी-मानी पत्र पत्रिकाओं ने उनके बारे में लिखा जिनमें बीबीसी वर्ल्ड सर्विस से लेकर इंडिया टुडे, तहलका, बिजनेस स्टैंडर्ड, हिंदुस्तान टाइम्स, एशियन एज, डेक्कन हेराल्ड, बिग एफएम, आजतक, ज़ी न्यूज़ जैसे मीडिया हाउस शामिल हैं. विवेक आजकल एडवाइस अड्डा के विस्तार में लगे हुए हैं.

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (2) : ‘विकास संवाद’ के साथियों के नाम एक सम्मान

मध्य प्रदेश का एक एनजीओ है ‘विकास संवाद‘. इससे कई एक्टिविस्ट, पत्रकार, समाजसेवी, एकेडमिशियन और शोधकर्ता जुड़े हैं. यह एनजीओ हर साल तीन दिवसीय आयोजन कर देश भर के सजग और समझ वाले पत्रकारों, एक्टिविस्टों, समाजसेवियों को एक किसी दूरस्थ जगह बिठाकर सामाजिक और जन सरोकार के मुद्दों पर प्रशिक्षित करता है. कभी जल, कभी जंगल, कभी स्वास्थ्य तो कभी पर्यावरण. साथ ही मध्य प्रदेश के मीडियाकर्मियों को विभिन्न कैटगरीज में शोध के लिए फेलोशिप प्रदान करने का काम भी यह संगठन करता है.

इस संगठन के जनसरोकारी कामकाज और मीडिया की चेतना में जनहित के प्रति लगातार समर्पण का भाव भरने के लिए भड़ास4मीडिया की तरफ से ‘विकास संवाद’ को सम्मानित किया जाएगा. संगठन की तरफ से साथी मनोज गुप्ता, गुंजन मेंहदीरत्ता और राकेश कुमार मालवीय 11 सितंबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब स्थित स्पीकर हाल में एक बजे उपस्थित होकर सम्मान ग्रहण करेंगे, साथ ही संगठन के कामकाज के बारे में विस्तार से सभी समारोह में मौजूद लोगों को अवगत कराएंगे.

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भड़ास मीडिया सरोकार अवार्ड (1) : मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले मीडियाकर्मियों के नाम एक सम्मान

11 सितंबर को दिन में एक बजे दिल्ली में रफी मार्ग पर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल में भड़ास4मीडिया की तरफ से कई मीडियाकर्मियों / संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा. इस कड़ी में सबसे पहले पुरस्कार के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले मीडियाकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा. इन सैकड़ों मीडियाकर्मियों की तरफ से प्रतीकात्मक रूप से यह सम्मान ग्रहण करेंगे मुंबई के पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह. इस लड़ाई के लिए अलग-अलग जगहों पर अलख जगाने वाले और मीडियाकर्मियों को गोलबंद करने वाले साथियों राजस्थान से आलोक शहर और संजय सैनी, उत्तराखंड से अरुण श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश से अशोक चौधरी, दिल्ली से प्रदीप सिंह और श्रीकांत सिंह, चंडीगढ़ से भूपेंद्र प्रतिबद्ध, हिमाचल प्रदेश से रविंद्र अग्रवाल, हरियाणा से मुन्ना प्रसाद आदि साथियों को भी सम्मानित किया जाएगा.

(मुंबई के पत्रकार शशिकांत सिंह. इन्होंने अपने सैकड़ों आर्टकिल्स, रिसर्च, आरटीआई के जरिए देश भर के मीडियाकर्मियों को अपना हक पाने के लिए जागरूक किया, ट्रेंड किया और उन्हें निराश न होने की प्रेरणा दी. 11 सितंबर को भड़ास के आठवें स्थापना दिवस पर शशिकांत और ऐसे ही कई जुझारू मीडियाकर्मियों का सम्मान किया जाएगा.)

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह का कहना है कि आज के बाजारू दौर में जब सारी नीतियां मैनेजमेंड फ्रेंडली होती जा रही हैं, मीडिया में सम्मान और हक के साथ काम करना मुश्किल होता जा रहा है. जिस मजीठिया वेज बोर्ड को सरकार ने गठित किया, उसकी रिपोर्ट को लागू किया, कानून बनाने के बाद मीडिया मालिकों को इसे इंप्लीमेंट करने को कहा, सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों की याचिका को खारिज कर जल्द से जल्द इसका लाभ मीडिया वालों को देने का निर्दश दिया, उसे ही अखबार मालिकों ने कूड़ेदान में डाल दिया. अब सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा चल रहा है. देश के कोने से कोने से सैकड़ों ऐसे मीडियाकर्मी उठ खड़े हुए जिन्हें उनका प्रबंधन उनका वाजिब कानूनी हक नहीं दे रहा था.

तरह तरह की प्रताड़ना और लंबे संघर्ष, जो कि अब भी जारी है, के बाद अब जाकर स्थिति थोड़ी ऐसी बनी है कि जो लड़ रहे हैं, उन्हें उनका सारा बकाया मिलने की प्रक्रिया शुरू हो रही है. मजीठिया वेज बोर्ड का केस भारतीय लोकतंत्र का ऐसा लिटमस टेस्ट है जिसमें न्यायपालिका से लेकर नेता, अफसर, उद्यमी सब कानून-संविधान के खिलाफ खड़े होते दिख रहे हैं और इन्हें इसके लिए कोई दंड भी नहीं मिल रहा है. यही कारण है कि भड़ास4मीडिया ने मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले सभी मीडियाकर्मियों को सम्मान और सैल्यूट के लायक पाया है और इन्हें 11 सितंबर को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है.

यशवंत ने मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले सभी साथियों से अनुरोध किया कि वे 11 सितंबर को दिन में एक बजे दिल्ली के रफी मार्ग पर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब पहुंचें और अपनी एकजुटता का इजहार करें. साथ ही देश भर के मीडियाकर्मियों को यह दिखाएं कि अगर मीडिया में रहना है तो मुंह बंद कर, अन्याय सहन कर के काम करने का कोई मतलब नहीं है. रोजी रोटी के लिए बीस नए तरीके अपनाए जा सकते हैं लेकिन मीडिया में अगर हम हैं तो हमें जनता की न्याय की लड़ाई लड़ने के साथ साथ अपने हक की लड़ाई को भी जोरशोर से लड़ना होगा.

नोट- मजीठिया की लड़ाई लड़ने वाले सभी साथियों का नाम यहां प्रकाशित करना मुमकिन नहीं था इसलिए प्रतीकात्मक रूप से कुछ नामों को दिया गया है. जो भी साथी लड़ाई लड़ रहे हैं वह अपने आने की सूचना और अपना डिटेल शशिकांत सिंह जी को उनके मोबाइल नंबर 9322411335 पर मैसेज कर दें ताकि फाइनल लिस्ट तैयार की जा सके.

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भड़ास 8वां स्थापना दिवस 11 सितंबर को कांस्टीट्यूशन क्लब में, देश भर के मीडियाकर्मी साथी आमंत्रित

Yashwant Singh : भड़ास का 8वां स्थापना दिवस समारोह 11 सितंबर दिन रविवार को स्पीकर हाल, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नयी दिल्ली में होना तय हुआ है। दोपहर एक बजे से शाम 7 बजे तक। अभी से दिन और समय नोट कर लीजिए और दिल्ली से बाहर के साथी टिकट कटा लें। मीडिया में काले धन के खेल पर एक बड़ा खुलासा होगा।

कई जेनुइन पत्रकार साथियों का सम्मान होगा और थोड़ा बहुत गाना बजाना। गुलाब जामुन, समोसा और चाय की व्यवस्था रहेगी। एक अनुरोध ये है कि किन किन साथियों को सम्मानित किया जाए, इसके बारे में मुझे फीडबैक मेल या फोन या मैसेज आदि के जरिए दे सकें तो मेहरबानी होगी।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com

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बहुत-बहुत बधाई यशवंत जी, आठ साल लंबी सरोकारी जिद और साहस को

Yashwant Singh : भड़ास के आठ साल पूरे हो गए आज. 17 may 2008 से 17 may 2016 तक. दिन भर यही सोचता रहा कि आगे जो कुछ करना चाहता हूं क्या उसे कर पाउंगा या इसी भार को ढोता रहूंगा. देखता हूं रोबोट होने से इतर कुछ कर पाता हूं या नहीं.

और हां,

आठ साल होने पर कार्यक्रम 26 अगस्त 2016 को. ताकि मौसम की मार से परे कुछ नया हो सके और मुझे भी तय करने सोचने का मौका मिल सके.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए सैकड़ों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं….

आदित्य बशिष्ठ : बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं भाई ऐसे ही आगे कदम बढ़ाते रहिए और साल-दर-साल सफलता की सीढ़ियों पर बढ़ते चलिए
Yashpal Singh : बधाई यशवतं जी, इस संघर्ष भरे और प्रेरक सफर के लिए
Sanjaya Kumar Singh : याद तो था नहीं। पर अब याद आया तो पाता हूं कि भड़ास के जन्म दिन पर अनजाने ही मैंने मीडिया पर बहुत लिख दिया और आपने सब पोस्ट भी कर दिया।
Pradeep Mahajan : मीडिया दबंग को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं
Anand Agnihotri : बधाइयां, इस बार कार्यक्रम में मैं जरूर शामिल होऊंगा।
Sunit Nigam : संघर्ष भरे कामयाब सफर को सलाम
Khushdeep Sehgal : वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो…
Vivek Dutt Mathuria : जय हो… बधाई हो भाई…. राधे राधे
Kuldeep Panwar : शुभकामनाएं यशवंत भाईसाहब। आज पता लगा कि 17 मई क्रांति के लिए ही बनी है। क्रांतिकारी वेबसाइट और मेरे जैसे विद्रोही लोग इसी दिन जो जन्मे हैं।

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