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न्यूज़ चैनल में झूठी साजिश का शिकार हुआ रिपोर्टर, बीएसपी के नाम पर क्यों डरते हैं चैनल के चीफ एडिटर?

लखनऊ- पत्रकारिता का मूल सिद्धांत निष्पक्षता और सच्चाई की पड़ताल करना होता है, लेकिन अगर खुद मीडिया संस्थानों के संपादक बिना जांच-पड़ताल किए सिर्फ एक फोन कॉल पर अपने ही रिपोर्टर को हटा दें, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है। हाल ही में एक नेशनल न्यूज चैनल में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक सुनियोजित साजिश के तहत एक रिपोर्टर को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

मामला तब शुरू हुआ जब नेशनल न्यूज चैनल के एक रिपोर्टर ने देश की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर का खुलासा किया। यह खबर पुख्ता सबूतों के साथ चलाई गई थी, जिससे एक व्यक्ति का राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होना उजागर हुआ। जिस व्यक्ति का खुलासा किया गया था, उसी व्यक्ति के दामाद के भाई हैं एक सज्जन जो लखनऊ में दूसरे न्यूज़ चैनल में कार्यरत हैं।

खबर के प्रसारण से बौखलाए आरोपी ने अपने दामाद के भाई जो पत्रकार हैं, से संपर्क किया। इसके बाद इस पत्रकार ने नेशनल न्यूज चैनल के लखनऊ स्थित एक रिपोर्टर से संपर्क करवाया। फिर दोनों ने मिलकर एक साजिश रची और चैनल के चीफ एडिटर को फोन कर झूठी जानकारी दी।

साजिश के तहत चीफ एडिटर को यह कहकर गुमराह किया गया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ ख़बर चलाई गई थी, उसे लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती के PSO (सिक्योरिटी ऑफिसर) का फोन आया है। यह सुनते ही चीफ एडिटर घबरा गए और बिना किसी जांच के रिपोर्टर को चैनल से निकाल दिया।

जब इस पूरे मामले की गहराई से जांच की गई, तो सामने आया कि जिसे बीएसपी से जोड़ा जा रहा था, उसका असल में बहुजन समाज पार्टी से कोई संबंध ही नहीं था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिसे मायावती जी का PSO (सुरक्षा अधिकारी) बताया गया था, वह व्यक्ति वास्तव में PSO था ही नहीं, राकेश सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति मायावती की सुरक्षा टीम में नहीं है। यानी कि यह पूरी तरह से झूठी साजिश थी, जिसे नेशनल न्यूज चैनल के चीफ एडिटर ने बिना किसी पुष्टि के सही मान लिया।

इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति को बीएसपी से जुड़ा बताया जा रहा था, उसे 2015 में बीएसपी से निकाल दिया गया था और वर्तमान में वह किसी अन्य पार्टी में है। यानी कि यह भी एक झूठा नैरेटिव था,जिसे बिना किसी जांच-पड़ताल के स्वीकार कर लिया गया।

यह पहला मामला नहीं है जब नेशनल न्यूज चैनल के किसी रिपोर्टर को बिना जांच-पड़ताल के सिर्फ एक फोन कॉल पर हटा दिया गया हो। इससे पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है कि किसी ने खुद को बीएसपी नेता या उनसे जुड़ा व्यक्ति बताकर शिकायत की, और चैनल ने बिना सच जाने रिपोर्टर को बाहर कर दिया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नेशनल न्यूज चैनल के चीफ एडिटर बीएसपी के नाम से इतना क्यों डरते हैं?

क्यों बिना सच्चाई जाने सिर्फ किसी के बीएसपी से जुड़े होने का दावा करने पर फैसले ले लिए जाते हैं?

इस पूरे मामले ने नेशनल न्यूज चैनल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारिता का काम सच्चाई को सामने लाना होता है, लेकिन जब खुद मीडिया संस्थान बिना किसी जांच के अपने ही रिपोर्टरों को हटाने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

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