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सावधान रहें, ‘99एकड़’ प्राइवेसी चोर है!

अनिल भास्कर-

अभी-अभी बालकनी में बैठा धूप सेंक रहा था कि किसी समीर चौधरी का फोन आया। ट्रूकॉलर ने मोबाइल स्क्रीन पर यही नाम दिखाया। रात एक दवा ऑनलाइन ऑर्डर की थी। शायद डिलीवरी वाले का फोन हो, यह सोचकर उठा लिया।

उधर से आवाज आई- “अनिल सर नमस्कार। फलां रियल एस्टेट कम्पनी से समीर बोल रहा हूं। हमारी कम्पनी एनएच 24 पर एक शानदार प्रोजेक्ट ला रही है। रेजिडेंशियल कम कमर्शियल। इनवेस्टमेंट के लिहाज से बहुत शानदार ऑफर है सर।”

मैंने टोकते हुए कहा, सॉरी डियर। अभी ऐसा कोई प्लान नहीं। वह फिर भी लगा रहा। लोकेशन की खासियत से लेकर खासा रिटर्न का गणित समझाता रहा।

जब रुका तो मैंने दोहराया, भाई कहा न, अभी कोई प्लान नहीं है। वह बोला- “पर सर आपने तो 99एकड़ पर क्वेरी की है।”

मैंने कहा, तो क्या हुआ? फेसबुक पर एक एड पॉपअप हुआ। उसे क्लिक किया तो 99एकड़ पर पहुंच गया। बस। कोई क्वेरी नहीं की भाई।

वह बोला- “सर वहीं से आपका नंबर मिला था। कुछ तो देख रहे होंगे।”

मैंने कहा, भाई! मैंने तो फेसबुक पर महारानी-4 वेब सीरीज का एड भी क्लिक किया था। तो क्या मेरे लिए हुमा कुरैशी का रिश्ता लेकर आ जाओगे? या किसी पार्टी का टिकट दिला दोगे? वह थोड़ी देर सन्नाटे में रहा। फिर अचानक फोन काट दिया।

कमाल है न! माना कि डेटा आज सबसे बड़ा मार्केटिंग टूल बन गया है। धंधे का मूल आधार। जिसके पास जितना बड़ा डेटा बैंक, वह उतना बड़ा धंधेबाज़। लेकिन इसमें हमारा क्या कुसूर?

इस धंधे ने चुपके से हमारी प्राइवेसी के सारे कपड़े उतार दिए हैं। बाज़ार में जैसे नंगे खड़े हैं हम। हद है यह तो!!

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