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सुख-दुख

हेमंत जी ने अपनी पहल पर मुझे रजत शर्मा जी से मिलवाया और उसी दिन एप्वाइंटमेंट लेटर दिलवाकर ज्वाइन करा दिया!

अमरेन्द्र राय-

आज हेमंत शर्मा का जन्म दिन है। जो लोग हेमंत शर्मा को नहीं जानते वो पूछ सकते हैं कि ये कि ये कौन हैं? लेकिन जो लोग ठीक से जानते हैं उनके चेहरे पर एक मुस्कान आएगी। उनके सामने हेमंत शर्मा का हंसमुख स्वभाव, उनका शानदार व्यक्तित्व और उनकी मजाकिया बातें आ जाएंगी। बहरहाल जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दूं कि हेमंत शर्मा ठेठ बनारसी, बीएचयू के पढ़े हुए, साहित्य के अध्येता, यूपी से लेकर दिल्ली की पत्रकारिता करने वाले प्रिंट से लेकर टीवी तक के पत्रकार हैं। आजकल टीवी 9 में डाइरेक्टर हैं। राजनीति पर अच्छी पकड़ है। अपने व्यक्तित्व और यारबाजी के कारण सभी दलों के प्रिय हैं। जब ये लखनऊ में पत्रकारिता कर रहे थे तो बनारस में इनकी शादी हुई। उस समय मुलायम सिंह की सरकार थी। तब पूरा मंत्रिमंडल इनकी शादी में उपस्थित था और वर वधू को आशीर्वाद दे रहा था। अब कुछ साल पहले जब इनकी बिटिया की शादी हुई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत तमाम गणमान्य लोग बेटी-दामाद को आशीर्वाद दे रहे थे।

बीएचयू से मैं भी पढ़ा हूं। हेमंत जी मुझसे एक साल जूनियर थे। मैं इतिहास विभाग का छात्र था ये हिंदी के। लेकिन हमारा वहां परिचय नहीं था। मैं दिल्ली जनसत्ता में आ गया और हेमंत जी बनारस से जनसत्ता से जुड़े। अपनी प्रतिभा के दम पर जल्दी ही बनारस से लखनऊ और फिर दिल्ली तक का सफर तय किया। जनसत्ता के दिनों से मेरा इनसे परिचय हुआ। परिचय के दो महत्पूर्ण आधार थे। बनारस का होना और बीएचयू में पढ़ाई। एक और चीज थी जो हमलोगों को और करीब महसूस कराती थी। सुधांशु मिश्र हम दोनों से पहले जनसत्ता से जुड़े थे और वे बनारस के रहने वाले थे।

हेमंत शर्मा बेहद विनम्र स्वभाव के हैं, यारों के यार हैं, सबके मददगार हैं। लेकिन इनकी बातचीत का चुटीला अंदाज सबके साथ रहता है, जो लोग पसंद भी करते हैं। मुझे नौकरी की जरूरत थी। इंडिया टीवी गया। किसी और से मिलने। मिले तो पूछा आप यहां कैसे ? तब मेरा नहीं हो पाया। एक दिन कहीं और मुलाकात हो गई तो पूछा, अरे, क्या हुआ और मेरे बताने पर कि कुछ पता नहीं चला तो इन्होंने अपनी पहल पर मुझे रजत शर्मा जी से मिलवाया और उसी दिन एप्वाइंटमेंट लेटर दिलवाकर ज्वाइन करा दिया। रजत शर्मा से हमारी मुलाकात लंच पर हुई। उनसे मिलने जाते समय इन्होंने बहुत ही मजाकिया अंदाज में कहा, अमरेंद्र जी, मैं रजत जी से लंच पर मिलने जब जाता हूं तो कभी डांट खा लेता हूं तो कभी खाना खा लेता हूं। लेकिन मैंने उस संस्थान में देखा कि बाकी लोग रजत शर्मा का इंतजार करते थे और रजत शर्मा हेमंत शर्मा का इंतजार करते थे। रजत जी हेमंत जी को पंडिजी कहते थे। आप कभी हेमंत शर्मा से मिलें तो आपको वो अपने गुरुदेव शुकदेव सिंह ( जिनके अंडर मे इन्होंने पीएचडी की ) से लेकर तमाम ख्याति प्राप्त लोगों के किस्से अपने ही रोचक अंदाज में सुनायेंगे खासकर उनका विदेश यात्रा प्रसंग। तब मै अपने बालों में मेहदी लगाया करता था। हेमंत जी यदाकदा मुझे मेहदी हसन कह कर संबोधित किया करते थे।

हेमंत जी खान-पान के शौकीन हैं। पान से मतलब मदिरा पान से न लगायें। पान ही समझें। बनारसी पान। होली पर अपने आवास पर भव्य कार्यक्रम करते हैं। ऊपर जो लिखा है उससे आप ने शायद अब तक ये निष्कर्ष निकाल लिया होगा कि मेरे उनसे बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन इतने भी अच्छे नहीं हैं कि होली वाले कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करें। पिछली से पिछली होली को मैंने इनसे शिकायत की थी कि आप मुझे बुलाते नहीं तो फौरन आमंत्रित किया। मौखिक और लिखित दोनों ही तरह से। लेकिन पिछली होली में फिर नहीं बुलाया। उम्मीद है आगे भी वो मुझे आमंत्रित करना भूल ही जाएंगे। इसका मतलब ये नहीं कि हम लोगों के रिश्ते कमजोर हो गये हैं बल्कि इतनी सी बात है कि हमलोग संपर्क में कम ही रहते हैं। मिलने पर वही पुराना प्रेम दीखता है।

आम तौर पर इन्हें किसी की वाल पर या इनकी वाल पर ही इन्हें मैं जन्म दिन की बधाई देता रहा हूं। लेकिन आज जब फेसबुक खोला तो देखा बीएचयू के अपने मित्र वामन देव सिंह ने इन्हें बधाई की पोस्ट डाली है। थोड़ी ही देर बाद अपने सीनियर शंभू नाथ शुक्ल की पोस्ट देखी। मुझे लगा मुझे भी इसी तरह बधाई देनी चाहिए। तो जन्म दिन की बधाई हो हेमंत शर्मा।

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