विदेशी सैलानियों की अवैध ऐशगाह ने छीना ग्रामीणों का हक

Illegal construction

पौड़ी गढ़वाल। विदेशी सैलानियों को गंगा नदी के विहंगम दृष्य की झलक दिखाने की खातिर पौड़ी तहसील के भंडालू में निर्माणाधीन एक आलीशान बंगले ने गांव के ग्रामीणों से लिपाई-पुताई में प्रयुक्त होने वाली लाल मिट्टी से भी महरूम कर दिया है। विदेशी नागरिकों के लिए बन रही इस ऐशगाह के लिए जिस जमीन का उपयोग किया जा रहा है उसका एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार की कैसरहिंद भूमि है। पीआईओ कार्ड धारक एक विदेशी द्वारा राजस्व विभाग की भूमि पर निर्माण से विभाग के स्थानीय कारिंदों पर भी उंगली उठना स्वाभाविक है। यह विदेशी इतना ढीठ है कि उसने एसडीएम सदर को भी धमकी दे डाली है।

जनपद गढ़वाल की पौड़ी तहसील की बनेलस्यूं पट्टी के भंडालू गांव में इन दिनों ग्रामीण गांव की कृषि भूमि के बीचों बीच स्थित टीले पर बन रहे एक बंगले के चलते परेशान हैं। दरअसल यह बंगला एक विदेशी नागरिक द्वारा कुछ ग्रामीणों को लालच देकर बनाया जा रहा है। इस स्थान से व्यासघाट स्थित गंगा नदी का विहंगम दृष्य नजर आता है। बताया जा रहा है कि भविष्य में इस बंगले का उपयोग विदेशी सैलानियों को गंगा के विहंगम दृष्य से रूबरू कराने के लिए किया जाएगा।

लेकिन विदेशी सैलानियों के लिए बन रहा यह बंगला भंडालू गांव के ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गया है। जिस स्थान पर इस बंगले का निर्माण किया जा रहा है कभी उस स्थान से गांव के ग्रामीण अपनी रसोई व अन्य भवनों की लिपाई पुताई करने के लिए विशेष प्रकार की लाल मिट्टी खोदते थे। लेकिन अब ग्रामीण इस मिट्टी से भी महरूम हैं। वहीं पूर्व में यह स्थान पशुओं के चारागाह के रूप में भी प्रयोग में लाया जाता था। गांव की महिला मंगल दल की अध्यक्ष सुशीला नेगी बताती हैं कि जैसे ही महिलाएं इस स्थान मिट्टी लेने जाती हैं तो विदेशी नागरिक व निर्माण में लगे मजदूरों द्वारा उन्हे खदेड़ दिया जाता है। इतना ही नहीं इस स्थान से मवेशियों की आवाजाही को भी बंद कर दिया गया है।

विदेशियों की दस्तक से महिलाएं असहज

महिला मगल दल की अध्यक्ष सुशीला नेगी यह भी बताती  हैं कि अभी भले ही बंगले का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है लेकिन गांव में विदेशी नागरिकों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। अमर्यादित वस्त्र पहन कर आने वाले विदेशी नागरिकों के कारण गांव की महिलाएं खेतों में आने में भी स्वयं को असहज महसूस कर रही हैं। उन्होने जोड़ा कि विदेशी नागरिक द्वारा गांव के गरीब व प्रवासी भूस्वामियों को भी पैसे का लालच देकर मनमानी दरों पर गांव में और भूमि खरीदी जा रही है। वहीं अवैध तरीके से सड़क का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है।
फोटो फाईल-सुशीला देवी अध्यक्ष महिला मंगल दल भंडालू

पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध

कैसरहिंद भूमि पर विदेशी द्वारा निर्माण किए जाने के बावजूद मात्र दो किमी दूर तैनात राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं। ग्रामीण यह आरोप भी लगाते रहे हैं कि क्षेत्रीय पटवारी द्वारा विदेशी नागरिक से पैसे लेकर इस मामले से आंखे फेर ली गईं। हालांकि इस बीच संबंधित पटवारी हिरासत में मौत के एक मामले में निलंबित चल रहा है।

व्यासघाट में भी चला रहा गतिविधि

इस विदेशी नागरिक की गतिविधियां भंडालू गांव तक ही सीमित नहीं हैं, बताया जा रहा है कि व्यासघाट के निकट भोटा नामक स्थान पर भी इस नागरिक द्वारा गंगा तट पर अनेक प्रकार की गतिविधियां संचालित करने के साथ ही निर्माण कार्य कराने की तैयारी भी चल रही है। इतना ही नहीं इस विदेशी ने व्यासघाट में अपने शौचालयों की नालियां भी सीधे गंगा में ही डाल दी है।

पीआईओ कार्ड धारक है विदेशी

बताया जा रहा है कि यह विदेशी नागरिक पीआईओ-पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन कार्ड धारक है। जिसके तहत भले ही इसे बिना वीजा के लंबी अवधि तक भारत में रहने, शिक्षा व रोजगार पाने का हक हो, लेकिन कृषि, वनीकरण व संपत्ति खरीदने का अधिकार इस श्रेणी के कार्ड धारक को प्राप्त नहीं है।

अवैध पाया गया तो ध्वस्त किया जाएगा

उपजिलाधिकारी सदर पीएल शाह का कहना है कि इस बावत पूर्व में भी शिकायत मिली हैं। उनके द्वारा मौके पर जाकर निर्माणाधीन बंगले के लिए प्रयुक्त हो रही भूमि का मुआयना कर कार्रवाई की जाएगी। यदि निर्माण अवैध पाया गया तो उसे ध्वस्त किया जाएगा। मामले में लिप्त राजस्व कर्मियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

 

लेखक अनिल बहुगुणा पत्रकार हैं।

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Comments on “विदेशी सैलानियों की अवैध ऐशगाह ने छीना ग्रामीणों का हक

  • Shyam Singh Rawat says:

    उत्तराखण्ड में चकबंदी लागू हो जानें के बाद तो स्थिति और भी भयावह हो जाने वाली है, जब गाँव-के-गाँव थोक में बिकने लगेंगे। उत्तराखण्ड के अतिरिक्त सभी हिमालयी राज्यों में बाहरी व्यक्ति द्वारा भूमि खरीदने पर संवैधानिक रोक लगी हुई होने से यहाँ जमीनों की खरीद-फरोख्त तेजी से हो रही है। जिसे चकबंदी अधिक क्षेत्रफल एकसाथ खरीदना और भी आसान बना देगी।

    मैंने अपने एक आलेख “उत्तराखण्ड को चकबंदी नहीं संवैधानिक संरक्षण की जरूरत है” में सविस्तार ऐसे ही अनेक मुद्दे उठाए हैं। जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है–

    https://www.bhadas4media.com/state/uk/1015-chakbandi-in-uttarakhand.html

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