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कुंभ कवरेज में इस रिपोर्टर ने आज अपने ही संस्थान की ‘चॉपर पत्रकार’ को मात दे दी!

विनीत कुमार-

पत्रकारिता की दुनिया में चॉपर पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले तथाकथित सबसे तेज चैनल की मैनेजिंग एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट) ने अपने साक्षात्कार में कहा कि यदि हम चॉपर से नहीं चलते तो महज 30 दिन में 100 लोकसभा चुनाव क्षेत्र कवर नहीं कर पाते. कॉर्पोरेट मीडिया की पत्रिका IMPACT ने इस चौपर पत्रकारिता की जबरदस्त ब्रांडिंग की.

मैनेजिंग एडिटर और चॉपर पत्रकारिता कर रही एंकर ने अपनी पूरी बातचीत में कहीं नहीं बताया कि इस 100 लोकसभा क्षेत्र में कितने लोग दिलो-दिमाग़ में रह गए, कितने लोगों से मिलना हुआ? लोकतंत्र में नागरिक की संख्या और वो कहीं नहीं.

आज इसी मीडिया संस्थान के अभिनव पांडेय की चारों ओर चर्चा हो रही है. जो काम उनके संस्थान का सबसे टॉप चेहरा नहीं कर पाया, वो उन्होंने किया और पत्रकारिता की बिगाड़ी गयी उनकी परिभाषा को दुरुस्त करने का काम किया.

आप कवरेज को लेकर सेलेब्रेट कीजिए, आंकड़े का जश्न मनाइए लेकिन बिना लोग, उनकी आवाज़ और बात शामिल किए पत्रकारिता देर-सबेर दम तोड़ देगी, मीडियाकर्मी की प्रोफाइल चाहे जितनी बढ़ती जाय, एसयूवी से आगे भले ही चॉपर से ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग करने लग जाय.

पत्रकारिता यदि तकनीकी सुविधाओं और साधनों से लैस पेशे का नाम होता तो हमारा देश कभी अंग्रेजी हुक़ूमत का मुक़ाबला नहीं कर पाता. तब तो अपने पास बुनियादी सुविधाएं तक न मौज़ूद रही. पत्रकारिता यदि तब भी शुरु हुई और पूरे दम से अंग्रेजों से लड़ी तो इसकी वज़ह रही इस पेशे से जुड़े लोगों के भीतर साहस और देश को बेहतर शक़्ल में देखने का सपना.


अभिनव पांडेय आप लंबे समय तक जिस तरह कुंभ कवरेज के नाम पर रील खोजने में उलझे रहे, देखकर मन थोड़ा उदास हो गया लेकिन आख़िर में आपने वो किया जो एक मीडियाकर्मी को करना चाहिए. साहस के बिना इस पेशे में होने का कोई मतलब नहीं है. यही इस पेशे की शोभा है और ताक़त भी. आपने यह साहस दिखाया, इससे देश के हजारों मीडिया छात्रों की समझ साफ़ होगी कि पत्रकारिता रील कंटेंट खोजने से बहुत आगे की दुनिया है. पीछे, अपने पुरखे के काम को देखने की दुनिया.. कि ऐसा उन्होंने क्या किया कि सुविधाओं से लैस अंग्रेजी हुक़ूमत पस्त हो गयी.

लोकतंत्र में अंतिम व्यक्ति की आवाज़ बने बिना पत्रकारिता संभव नहीं. मुझे नहीं पता कि आप कब तक ऐसा कर पाएंगे लेकिन फिलहाल तो आपने वो किया है जो इस पेशे के एक से एक चमकीले चेहरे न कर पाए, आज आप उनसे बहुत आगे और अंतिम व्यक्ति के साथ नज़र आ रहे हो, शुक्रिया.


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