असीमित दीवानी क्षेत्राधिकार के लिए शुरू हुआ अनोखा सत्याग्रह

दिल्ली : पिछले दिनो से दिल्ली जिला अदालतों में दीवानी मामलों के क्षेत्राधिकार को लेकर हड़ताल चल रही है। दूसरी ओर, कॉमर्शियल डिवीजन एंड कॉमर्शियल अपीलेट डिविजन ऑफ हाई कोर्ट्स एंड कॉमर्शियल कोर्ट्स बिल, 2015 को लागू करने पर अड़ी है। सरकार के इस रवैये के खिलाफ कड़कड़डूमा कोर्ट में एक अनोखे सत्याग्रह की शुरुआत की गई है। इस सत्याग्रह को नाम दिया गया है- ‘गेट वेल सून मिस्टर पीएम’ (GET WELL SOON Mr. PM)।

इस सत्याग्रह के संयोजक एडवोकेट पीयूष जैन ने बताया कि कॉमर्शिल कोर्ट्स बिल लाकर केंद्र सरकार देश की न्यायिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की तैयारी कर रही है। यह सब देश की चुनिंदा लॉ फर्मों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इससे पहले इस बिल को द प्रोविजन ऑफ दि कॉमर्शियल डिविजन ऑफ हाईकोर्ट्स बिल, 2009 के (The provision of the commercial division of high courts bill 2009) नाम से लाया गया था। विरोध होने पर इसे वापस ले लिया गया था।

उन्होंने बताया कि “दिल्ली हाईकोर्ट अमेंडमेंड बिल, 2014” को कानून मंत्री सदानंद गौड़ा द्वारा कॉमर्शियल कोर्ट बिल वापस लेने के बाद इस अभियान को चलाने का फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री सरकार के हर काम के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री को गेट वेल सून मि.पीएम अभियान की ओर से कम से कम 50 हजार चिट्ठियां भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में हर वकील से अलग अलग चिट्ठी लेकर प्रधानमंत्री को पार्सल के माध्यम से भेजी जाएंगी।

श्री जैन ने कहा कि कानून मंत्री ने राज्यसभा में अपने वक्तव्य में कहा था, एक करोड़ से ऊपर के दीवानी मामले हाईकोर्ट में चलाए जाएंगे। दिल्ली को छोड़कर सारे देश में इस समय सारे देश की जिला अदालतों को असीमित दीवानी क्षेत्राधिकार मिला हुआ है। इसका अर्थ है कि कितनी भी कीमत का दीवानी मामला हो, उसकी सुनवाई जिला अदालत में ही होती थी। हाईकोर्ट केवल अपीलीय कोर्ट का काम करती थी। 

यदि यह कानून लागू हो गया तो देश के 24 हाईकोर्टों में मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी और जिला कोर्ट में प्रेक्सिट करने वाले वकीलों के लिए भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। यह कानून लागू होने के बाद दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी अपना मुकदमा लड़ने के लिए हाईकोर्ट जाना होगा। अभी कोई एक करोड़ से ऊपर की कीमत का मुकदमा बागपत जिला अदालत में चल रहा है तो कानून लागू होने के बाद उसे इलाहाबाद के चक्कर लगाने पड़ेंगे। यही स्थिति देश के सारे राज्यों की होगी। 

खबर अंग्रेजी में पढ़ें – 

Lawyers stated unique satyagrah for

unlimited pecuniary jurisdiction

Press release

Lawyers of Karkardooma court started satyagrah “GET WELL SOON Mr. PM” For Unlimited pecuniary jurisdiction for Delhi district courts and scrap the commercial court bill 2015. 

The convener of satyagrah Piyush Jain said that by introducing the commercial bill central government is trying to devastate the current judicial system.  This is a plan to provide immense benefits to selected few law firms, this bill was previously introduced as “The provision of the commercial division of high courts bill 2009”.  This bill was not passed due to immense aggression shown by the lawyers against this bill.   

Advocate Piyush Jain said that this satyagrah has been started after the Delhi high court amendment bill 2014 has been introduced by law minister sadanand gauda.  Prime minister of India bears the moral responsibility for any action by the government under his governance, Hence we have decided to send 50 thousand letters to our Hon’ble prime minister with the message “Get Well Soon Mr. PM” we are planning to send these letters from all the lawyers via courier. 

Mr. Jain informed that the minister of law has said that any case which accounts for more than one carore should be dealt in High court (under commercial court bill).  All district courts in India have unlimited pecuniary jurisdiction rights whereas all Delhi district courts have been refrained from this right.  If the commercial court bill 2015 gets introduced this would mean that 24 high courts of our country will be fluded with the number of cases whereas the district courts will have almost nothing to do. This will leave our lawyers with no option but to leave the profession of law and seek something for earning.  Also if this bill gets introduced people of India living in far flung areas will have to come a long way to file the cases in high courts which for sure will be very difficult for the common man. 

An example to cote: – if there is a case which accounts for more than one carore rupees is being dealt in Bagpat district court, this will get transferred to Allahabad high court after introduction of the commercial court bill 2015.  Which means that the resident of bagpat will have to go to Allahabad for the hearing of his case,  and same would be the condition of all the states in India.

Piyush Jain requests all the fellow lawyers and colleagues to raise there voice against the commercial court bill 2015 to safeguard their own interest and to serve the common man. 



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