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बिहार

बंदूक की नोक पर पाँच दिन में तीन बार बेची गई यह रिपोर्टर!

निहारिका चौधरी-

बिहार में मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए महिमा सिंह ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। दैनिक भास्कर की पत्रकार महिमा सिंह ने मई 2026 में बिहार के सीवान इलाके में ऑर्केस्ट्रा पार्टियों की आड़ में चल रहे कथित सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट के भीतर पांच दिन बिताए।

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और आसपास के इलाकों की लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर इस नेटवर्क में फंसाया जाता था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर शोषण, हिंसा और मानव तस्करी के दलदल में धकेल दिया जाता था।

महिमा सिंह ने इस पूरे नेटवर्क का सच सामने लाने के लिए खुद उस दुनिया में प्रवेश किया। दावा किया गया है कि इस दौरान उन्हें मारपीट, बंदूक की नोक पर धमकियों और लगातार खतरे का सामना करना पड़ा। यहां तक कि पांच दिनों के दौरान तीन अलग-अलग ऑपरेटरों के बीच उनका “सौदा” तक किया गया।

अपनी पड़ताल में उन्होंने सिर्फ कुछ अपराधियों का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया। रिपोर्ट के अनुसार इसमें दलाल, तस्कर, अस्पताल कर्मचारी, डॉक्टर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोग और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग भी शामिल थे।

खबर प्रकाशित होने के बाद बिहार में कई जगह छापेमारी की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों को छुड़ाया गया और कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

यह सिर्फ एक पत्रकार की बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर भी सवाल है जिस पर लंबे समय से ऐसे नेटवर्क की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगते रहे हैं।

महिमा सिंह की इस रिपोर्टिंग के बाद कई लड़कियां अपने घर लौट सकीं, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर ऐसी कितनी लड़कियां अब भी किसी अगले खुलासे का इंतजार कर रही होंगी।

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