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सुख-दुख

दैनिक भास्कर की महिमा सिंह ने वो कर दिखाया जो ज्यादातर पत्रकार पूरे करियर सोच भी नहीं पाते!

मनीष मिश्रा-

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर बात मेरी अंडरकवर रिपोर्टर Mahima Singh की जिसने वह कर दिखाया, जो ज्यादातर जर्नलिस्ट अपने पूरे करियर में सोच भी नहीं पाते।

खतरनाक लोगों के बीच अंडरकवर बनकर घुसना, उनके माहौल में खुद को ढालना और लगातार 5 दिन उनके बीच रहना… यह सिर्फ पत्रकारिता नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और जुनून की पराकाष्ठा है।

तुमने न सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि पूरे गैंग को बेनकाब कर वहां फंसी महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की दर्दनाक सच्चाई दुनिया के सामने ला दिया।

हमारी इस इन्वेस्टिगेशन के बाद प्रशासन अलर्ट हुआ, पूरे राज्य में छापेमारी शुरू हुई और अब तक 25 से अधिक नाबालिग लड़कियों को एजेंट्स के चंगुल से मुक्त कराया जा चुका है। एजेंट्स गिरफ्तार हो रहे हैं।

यह सिर्फ एक इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी नहीं थी…यह इतिहास बन गया। रेड लाइट एरिया की जब भी चर्चा होगी अपनी इस स्टोरी की चर्चा होगी।

मुझे शुरू से विश्वास था कि तुम इस जिम्मेदारी के लिए परफेक्ट हो, और तुमने उस भरोसे को सच साबित कर दिया।

तुम्हारा साहस और काम के प्रति समर्पण के साथ जोश जज्बा यूं ही बरकरार रहे, ताकि आगे भी तुम समाज के लिए सच्चाई के सबसे कठिन दरवाज़े खोलती रहो।

तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत बधाई!

मूल खबर…

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